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अब सिर्फ वीकिपीडिया पर, 225 साल पुरानी मशहूर दुकान बंद

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1790 में जब घंटेवाला हलवाई की दुकान दिल्ली में खुली थी तो मुगल बादशाह शाह आलम-द्वितीय दिल्ली पर राज कर रहे थे। उस वक्त टीपू सुल्तान मैसूर की गद्दी पर आसीन थे व पेरिस, फ्रेंच रिवॉल्यूशन के दौर से गुजर रहा था।
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बुधवार को वही 225 साल पुरानी शाही हलवाई की दुकान जो चांदनी चौक में थी हमेशा के लिए बंद हो गई। इस तरह राजधानी के इतिहास से जुड़ा एक मनोरम चैप्टर खत्म हो गया। इसके साथ ही मुगलों को भी अपने स्वाद का ‌दीवाना बनाने वाली यह दुकान इतिहास का हिस्सा भर बन कर रह गई।
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दुकान के मालिक सुशांत जैन से जब दुकान के बंद होने के बारे में पूछा गया तो वह इतने भावुक थे कि कुछ बोल भी नहीं पा रहे थे। उन्होंने इतना ही कहा कि इस वक्त उनके लिए दुकान के बारे में बात करना बहुत मुश्किल है। सुशांत बोले कि इसे बंद करने का दुख वो बयां भी नहीं कर सकते। ये दुकान उनकी आठ पीढ़ियों ने चलाई है। इसे बंद करने की वजह केवल यही है कि ये पिछले कई सालों से काफी घाटे में जा रही थी।

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घंटेवाला दुकान के ठीक बगल में स्थित अनारकली बाजार के नामक साड़ी की दुकान के मालिक अशोक अरोड़ा भी इस दुकान के बंद होने से काफी दुखी हैं। अशोक बताते हैं कि घंटेवाला के घी रिसते सोहन हलवे ‌के फैन इतने ज्यादा थे जिसकी पूछिए मत। घंटेवाला में राजीव गांधी भी आ चुके हैं।
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अशोक ने अपनी यादों के झरोखे में जाते हुए बताया कि उन्हें अच्छे से याद है जब मोहम्मद रफी अपनी कार से घंटेवाला की दुकान पर आए थे। मोरारजी देसाई भी अपनी जलेबियां यहीं से ले जाते थे। दिवाली के समय तो घंटेवाला के मालिकों को दुकान पर होने वाली भीड़ को मैनेज करने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ता था।
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दिल्ली आने वाले सै‌लानियों खासकर चांदनी चौक घूमने आने वाले लोगों के लिए यह दुकान बहुत बड़ा आकर्षण थी। दर्जनों विदेशी सैलानी अपने गाइड को लेकर यहां आते थे और इस दुकान के आगे अपनी फोटो लेते थे।
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अनारकली के मालिक अरोड़ा बताते हैं कि अब भी कोई अगर उनकी दुकान का पता पूछता है तो वो हमेशा उसे बताते हैं कि घंटेवाला के बगल में। अरोड़ा कहते हैं कि 1 जुलाई 2015 का दिन उनके लिए बेहद दुखदाई दिन है।

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अपने स्वाद के लिए ये दुकान जितनी मशहूर है उतनी ही अपने नाम को लेकर भी यह चर्चा में रही है। इस दुकान का नाम घंटेवाला कैसे पड़ा इसके पीछे कई कहानियां हैं। कहा जाता है कि ये हलवाई की दुकान का नाम उस घंटाघर के नाम पर पड़ा जो इससे दूर पर स्थित था। वहीं एक कहानी ये भी है कि इस दुकान का नाम घंटेवाला स्कूल के घंटे से पड़ा। वहीं ये भी कहा जाता है कि मुगल बादशाह जो लाल किले से घंटे की आवाज सुनकर आदेश देते थे कि घंटे के पास वाली दुकान से उनके लिए मिठाई लाई जाए और इस तरह दुकान का नाम घंटेवाला पड़ा।

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इतिहासकारों के अनुसार घंटेवाला हलवाई की दुकान का बंद होना पुरानी दिल्ली के लिए एक बहुत बड़ा लॉस है। इनटैक के दिल्ली चैप्टर के कंवेनर एजीके मेनन का कहना है कि ये दुकान इस क्षेत्र की सबसे पुरानी दुकान थी। लोग की यादों में चांदनी चौक और घंटेवाला उसी तरह बसा है जैसे लोग जामा मस्जिद के साथ करीम को लिंक किया जाता है। घंटेवाला शाहजहांनाबाद की प्रमुख धरोहर थी।

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गौरतलब है कि चांदनी चौक में दो घंटेवाला की दुकानें थीं। एक चांदनी चौक फौव्वारे के पास थी जो काई साल पहले ही बंद हो चुकी है। दूसरी अभी तक चल रही थी और जिसके नाम पर गली का भी नाम घंटेवाली गली पड़ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार घंटेवाला शॉप दो भाईयों के बीच में बंट गई थी। बड़े भाई ने अपना हिस्सा सालों पहले बेच दिया था और दूसरी सुशांत चला रहा था जो बुधवार 1 जुलाई को बंद हो गई।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग एक दशक या उससे ज्यादा समय से ही इस दुकान का कारोबार काफी डांवाडोल चल रहा था। जब अन्य दुकानें बढ़ने लगीं और नई खुलने लगीं तो घंटेवाला के लिए अपने आप को बनाए रखना काफी मु‌श्किल हो गया।

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इस मिठाई की दुकान का उल्लेख तो महमूद फारूकी की बुक बीसीज्ड में भी मिलता है। इस किताब में उन्होंने समकालीन अखबार देहली ऊर्दू अखबार के एक लेख का उल्लेख करते हुए उन्होंन‌े लिखा है कि, 'वो सैनिक जो बाहर पूरी बहादुरी से लड़ते थे, जैसे ही वो जामा मस्जिद और आसपास जाकर घंटेवाला की दुकान से कलाकंद और लड्डू खाते थे उनके अंदर लड़ने की सारी इच्छाएं ही खत्म हो जाती हैं।'

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1954 में आई मीना कुमारी अभिनीत हिंदी फिल्म चांदनी चौक में भी घंटेवाला दुकान के कुछ सीन हैं।
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बुधवार देर शाम इस दुकान की सफाई हो रही थी। अंदर से एक बड़ा फ्रिज निकाला गया तो दुकान के आसपास ढेर सारे लोग जमा हो गए। घंटेवाला का एक बहुत पुराना मुलाजिम इन सारी बातों से बहुत अपसेट था। उससे जब इस धरोहर के बारे में पूछा गया तो उसने चिढ़ते हुए जवाब दिया क्या धरोहर? वह जोर से चिल्लाया, किस धरोहर के बारे में बात कर रहे हैं आप? जब दुकान का शटर बंद किया गया तो उसने आखिरी बार दुकान के अंदर देखा और अपना पसीना पोछते हुए बिना दोबारा पीछे देखे वहां से चला गया।
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