जिस लड़की को रेलवे ने नौकरी देने से किया इनकार उसने IAS में टॉप कर दिया उन्हें जवाब
Mon, 05 Jun 2017 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
सार
- दिव्यांगता को कमी बताई, टॉप करके दिया जवाब
- जेएनयू की रिसर्च स्कॉलर्स प्रांजल पाटिल ने 124वां रैंक किया हासिल
- दिव्यांग वर्ग में सौ फीसदी नेत्रहीन में किया टॉप, बनीं आईएएस
- 2015 में 773 रैंक पाने के बाद भी रेलवे मंत्रालय ने नहीं दी थी नौकरी
जेएनयू की पीएचडी स्कॉलर्स प्रांजल पाटिल ने सफलता के बाद दिव्यांगता को कमी बताकर ठुकराने वालों को यूपीएससी परीक्षा में 124 रैंक हासिल कर करार जवाब दिया है। प्रांजल ने दिव्यांग वर्ग में भी टॉप किया है।
विज्ञापन
2 of 7
प्रांजल पाटिल
अब प्रांजल का सपना आईएएस बनकर देश सेवा करना है। अपनी मां को आइडियल मानने वाली प्रांजल आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा पाती हैं। प्रांजल का कहना है कि मैं उन लोगों को यह दिखाना चाहती हूं कि मैं दिव्यांग नहीं थी, बल्कि उनकी सोच थी कि उन्होंने मेरे जज्बे को समझा नहीं।
विज्ञापन
3 of 7
प्रांजल पाटिल
अमर उजाला से विशेष बातचीत में इंटरनेशनल रिलेशन में पीएचडी स्कॉलर्स प्रांजल पाटिल ने बताया कि बेशक मैं आंखों की रोशनी न होने के चलते इस दुनिया के रंगों को देख नहीं सकती हूं पर महसूस करती हूं।
4 of 7
प्रांजल पाटिल
पिछला साल बेहद कड़वे अनुभवों से बीता। महज छह साल की उम्र में अचानक आंखों की पूरी तरह रोशनी चली जाने के बाद भी अपनी मां ज्योति पाटिल की आंखों से दुनिया को देख रही थी।
विज्ञापन
5 of 7
प्रांजल पाटिल
हालांकि, यूपीएससी परीक्षा 2015 में 773 रैंक लेने के बाद भी रेलवे मंत्रालय ने मुझे नौकरी देने से इनकार कर दिया। क्योंकि उन्होंने मेरी आंखों की सौ फीसदी नेत्रहीनता को कमी का आधार बनाया था।
विज्ञापन
6 of 7
प्रांजल पाटिल
यह जिद थी कि मैं उन लोगों को अपना सपना तोड़ने नहीं दूंगी। यूपीएससी परीक्षा की दोबारा तैयारी शुरू की और मैंने 124वां रैंक हासिल किया है। अब मुझे आईएएस मिलेगा, क्योंकि यहां पर मेरी नेत्रहीनता कमी नहीं होगी।
मूलरूप से महाराष्ट्र निवासी प्रांजल के पिता एलजी पाटिल सरकारी मुलाजिम हैं और मां ज्योति घरेलू महिला हैं। हालांकि, प्रांजल खुद में अपनी मां की छवि देखती हैं और पिता उन्हें आगे बढ़ने की जिद का सपना पूरा करने में मदद करते हैं।