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बी चंद्रकला: सोशल मीडिया पर लोकप्रिय आईएएस से लेकर एक 'भ्रष्ट' अधिकारी तक

Tue, 08 Jan 2019 02:33 PM IST
shubham बीबीसी, नई दिल्ली
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b chandrakala - फोटो : ट्विटर
सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स और मातहत अफसरों को लताड़ते वीडियो। सख्त और ईमानदार अफसर की पिछले दस साल में हासिल की गई छवि एकाएक धूमिल हो जाएगी, ये शायद बी. चंद्रकला ने पहले कभी नहीं सोचा होगा। हालांकि, इस तरह की 'रॉबिनहुड' टाइप और ईमानदार छवि के बावजूद उन पर कई तरह के आरोप पहले भी लगे और कार्यशैली की आलोचना भी हुई लेकिन राज्य सरकारों की वो इतनी चहेती थीं कि उन पर कभी आंच नहीं आई।
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b chandrakala - फोटो : ट्विटर
साल 2008 बैच की आईएएस अधिकारी भुक्या चंद्रकला मूल रूप से तेलंगाना के करीमनगर की रहने वाली हैं और उन्होंने अपनी पढ़ाई हैदराबाद से की है। आईएएस बनने के बाद साल 2009 में उनकी पहली तैनाती इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के फूलपुर में एसडीएम के रूप में हुई। उसी समय से वो सुर्खियों में आना शुरू हुईं और ये क्रम अब तक बना हुआ है। साल 2012 में बी. चंद्रकला को हमीरपुर का डीएम बनाया गया और 2017 तक वो कुल पांच जिलों में डीएम की जिम्मेदारी निभा चुकी थीं।
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b chandrakala - फोटो : ट्विटर
सपा सरकार का करीबी होने की थी चर्चा
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद कहते हैं, "हमीरपुर में तैनाती के बाद से ही खनन को लेकर उनकी संदिग्ध भूमिका की चर्चा होने लगी थी। तमाम आलोचनाओं के बावजूद उनकी लगातार होती तरक्की से ये चर्चा आम हो गई कि वो सपा सरकार के बेहद करीब हैं।" हालांकि इस दौरान वो अक्सर अपनी कार्यशैली को लेकर भी चर्चा में रहीं। बुलंदशहर की डीएम रहते हुए उन्होंने एक स्थानीय ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। उसके बाद तो ऐसे कई वीडियो वायरल हुए जिनमें बी. चंद्रकला अपने मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों को ईमानदारी का पाठ पढ़ा रही हैं। एक प्राथमिक स्कूल की जांच के दौरान वहां के विद्यार्थियों से उनका संवाद और फिर अध्यापकों को दी गई नसीहत का वीडियो भी काफी सुर्खियों में रहा था।

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b chandrakala
बीजेपी नेताओं से हुई थी तनातनी
बी. चंद्रकला को क़रीब से जानने वाले एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि सोशल मीडिया में सक्रियता और पब्लिसिटी के चलते उनके ऐसे कई काम मीडिया में जगह नहीं पा सके, जिनमें उनकी छवि ख़राब होती। उनके मुताबिक़, "यदि मेरठ में वो बीजेपी के नेताओं से न उलझतीं, उन पर एक पार्टी विशेष के लिए काम करने का ठप्पा न लगता तो सत्ता परिवर्तन के बावजूद वो अपनी जगह बनाए रखतीं।" उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बी. चंद्रकला मेरठ के डीएम के पद पर तैनात थीं। बीजेपी नेताओं से उनकी जमकर तनातनी हुई और बीजेपी ने उनकी शिकायत चुनाव आयोग से भी की थी।
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b chandrakala
बीजेपी नेताओं ने उन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और सत्ताधारी पार्टी की एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया था। बीजेपी ने उस वक़्त चुनाव आयोग से उनके ट्रांसफर की भी मांग की थी। मेरठ के तत्कालीन विधायक और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं, "पिछली सरकारें अफ़सरों के तालमेल से जिस तरह से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही थीं, ये उसका जीता-जागता उदाहरण है। ऐसे अफसर न सिर्फ उन सरकारों के गलत कार्यों को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे थे बल्कि पार्टी के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे। हमलोगों ने तब भी उनकी शिकायत की थी, लेकिन तब हमारी सुनवाई नहीं हुई।"
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b chandrakala - फोटो : ट्विटर
केंद्र में भी हो चुका है ट्रांसफर
2017 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही बी. चंद्रकला के प्रभाव में भी परिवर्तन आ गया। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पहले वो दिल्ली गईं लेकिन कुछ दिन पहले ही मूल कैडर में वापस आ गईं। सीबीआई ने उन पर अवैध खनन मामले में छापेमारी की है, जब वो हमीरपुर जिले की कलेक्टर थीं। बुंदेलखंड में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर कहते हैं, "केन, बेतवा और यमुना नदियों में अवैध खनन का कारोबार सत्ता समर्थित सिंडिकेट के जरिए होता है। बी. चंद्रकला जैसे अधिकारी वही करते हैं जो कि सत्ताधीशों और रसूखदारों के हित में होता है और ये ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि ये इनके भी हित में होता है।"
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B Chandrakala IAS
सोशल मीडिया पर काफी प्रसिद्ध

पिछले साल मई में उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से भी झटका लगा था। हाईकोर्ट ने इलाहाबाद की सीजेएम कोर्ट से उनके ख़िलाफ़ जारी समन आदेश को सही मानते हुए उनकी अर्जी को खारिज कर दिया था। इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश मिश्र बताते हैं, "इस मामले में चंद्रकला सहित कुछ अन्य लोगों पर आरोप हैं कि इन्होंने मिलकर अनंती देवी नाम की एक महिला के घर को जाने वाले रास्ते को ख़त्म कर दिया था। यह मामला उस समय का है जब बी चंद्रकला इलाहाबाद की फूलपुर तहसील में एसडीएम थीं. गांव की एक महिला आसमा बानो ने साल 2011 में एसडीएम से मिलकर रास्ते में आने वाली जमीन पर क़ब्ज़ा कर लिया था।"
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B Chandrakala IAS
अनंती देवी ने एसडीएम के इस फैसले को इलाहाबाद की सीजेएम कोर्ट में चुनौती दी थी। सीजेएम कोर्ट ने बी चन्द्रकला समेत अन्य लोगों को समन जारी किया था, जिसे बी चंद्रकला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी थी और सीजेएम के समन को वैध ठहराया था। इसके अलावा बी चंद्रकला सरकारी दस्तावेज़ों में अपनी संपत्ति की घोषणा को लेकर भी चर्चित रही हैं। नौकरी की शुरुआत में उन्होंने अपनी संपत्ति शून्य दिखाई थी लेकिन एक साल बाद ही संपत्ति में दस लाख रुपये की बढ़ोत्तरी का रिटर्न भरा। बी चंद्रकला सोशल मीडिया पर काफ़ी प्रसिद्धी बटोर चुकी हैं। फेसबुक और ट्विटर पर उनके न सिर्फ़ लाखों फॉलोवर्स हैं बल्कि उनकी एक-एक पोस्ट पर हज़ारों की संख्या में लाइक्स आते हैं। इस मामले में वो कई नेताओं और अभिनेताओं से भी आगे निकल चुकी हैं।
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