B Chandrakala IAS
बी. चंद्रकला ने लिखी ये कविता...
रे रंगरेज़ ! तू रंग दे मुझको।।
रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको,
फलक से रंग, या मुझे रंग दे जमीं से ,
रे रंगरेज़! तू रंग दे कहीं से।।
छन-छन करती पायल से,
जो फूटी हैं यौवन के स्वर ;
लाल से रंग मेरी होंठ की कलियाँ,
नयनों को रंग, जैसे चमके बिजुरिया,
गाल पे हो, ज्यों चाँदनी बिखरी,
माथे पर फैली ऊषा-किरण,
रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको,
यहाँ से रंग, या मुझे रंग दे, वहीं से,
रे रंगरेज़ तू रंग दे, कहीं से।।
कमर को रंग, जैसे, छलकी गगरिया,
उर,,,उठी हो, जैसे चढ़ती उमिरिया,
अंग-अंग रंग, जैसे, आसमान पर,
घन उमर उठी हो बन, स्वर्ण नगरिया।।
(जारी है...)