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वैंकेया ने की दिल की बातें : 'मैं किसी एक का नहीं, सभी पार्टियों का हूं'

Fri, 11 Aug 2017 09:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने शपथ ग्रहण के बाद राज्यसभा के पदेन सभापति की कुर्सी मानसून सत्र के अंतिम दिन संभाल ली। विपक्ष की ओर से स्वागत भाषण में उठी आशंकाओं पर उन्होने स्पष्ट किया वे किसी एक पार्टी के नहीं सभी पार्टियों के हैं। वैंकेया ने अपने भाषण में सदस्यों की ओर से आईं नसीहतों और सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने निष्पिक्षता के साथ सदन की परंपराओं, समय प्रबंधन और कार्य पद्धति में गुणात्मक सुधार का भी आश्वासन दिया। वैंकेया ने कहा कि ये उनके दिल की बातें हैं। 
वैंकेया ने कहा कि मैं पहली बार 1958 में सदन आया था तो कल्पना नहीं की थी। लोकतंत्र का चमत्कार है मेरे जैसे आम आदमी पर भी ये जिम्मेदारी डाल सकती है। मुझे गर्व है कि मैं किसान का बेटा और खेतिहर हूं। मैं राजनीति से ऊपर उठकर काम करूंगा। मैं किसी पार्टी का व्यक्ति नहीं हूं मैं सभी पार्टी का हूं। हमारी कोशिश होगी सदन की कार्यवाही सुचारू चले नियमों का पालन हो और सभी सदस्यों को बोलने का मौका मिले।
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वैंकेया ने कहा कि मैं नहीं मानता कि विपक्ष की भूमिका नहीं है। सरकार की ओर से विधेयक आए विपक्ष उस पर चर्चा करे बहस करे और विधेयक पारित हो। शोरगुल में विधेयक पास कराने की स्थिति नहीं आएगी। विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए स्वतंत्र है तो सरकारी कामकाज भी जरूरी है। हम दुनिया की सबसे विकसित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं इस भूमिका को ध्यान में रखकर समता और समानता साथ चलना होगा। ग्रामीण और शहरी के बीच संतुलन बना होगा। आर्थिक असमानता कैस दूर हो इसके लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए और सदन का प्रबंधन बेहतर कैसे हो। हम सभी भारतीय हैं और भारत की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि विकास का लाभ गरीब से गरीब तक पहुंचे अंत्योदय का मतलब यही है। हम नीति बनाने के लिए काम करें विभाजित रूप से काम करके नहीं हो सकता है। राजनीतिक दुश्मन नहीं हैं अपनी-अपनी विचारधारा से देश का मजबूत कर रहे हैं। वैंकेया ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि उनका भी कहना है कि संसद में चर्चा करनी चाहिए विचारों का आदान प्रदान आसान है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चुनाव में कोई न कोई जीतकर आता है। कार्यपालिका में सत्तापक्ष के पास शक्ति होती है। विपक्ष को विरोध करने का अधिकार है जो बातें आगे रखे लेकिन जनादेश का पालन होना ही चाहिए। उन्होंने छोटी पार्टियों को भी पर्याप्त महत्व देने और चर्चा के लिए सदन का समय बढ़ाने की भी बात कही।

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उन्होंने कहा कि लोगों के बीच एक चिंता बढ़ रही है कि हम लोग ठीक से काम नहीं कर रहे हैं लोग कह रहे हैं। समय का प्रबधंन जरूरी है। बार-बार व्यवधान से गतिरोध बढ़ता है नागरिक भ्रमित होते है। सदन का सीधा प्रसारण होता है युवा पीढ़ी बहुत रुचि ले रही है हमें अपेक्षा से देखते हैं। संविधान में मिले अधिकारों के लिए गरीब की पहचान जरूरी है उसे मान्यता दी जानी चाहिए।
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Venkaiah Naidu - फोटो : ANI
वैंकेया नायडू बतौर सभापति चाहते हैं कि सदन में होने वाले गंभीर विषयों की कवरेज मीडिया जरूर दिखाए। उन्होंने कहा कि  मीडिया स्वतंत्र है मैं निर्देश नहीं दे सकता न ही सलाह देना चाहता हूं लेकिन मीडिया में केवल सनसनीखेज, नकारात्मक और ड्रामेबाजी वाली खबरों को अधिक महत्व मिलता है। उन्होंने अपने साथ बीती एक घटना का जिक्र कर बताया कि उन्होंने बड़ी तैयारी के साथ इसी सदन में बतौर नए सदस्य कृषि पर 57 मिनट बोला लेकिन अगले दिन समाचार पत्रों को देखा तो निराशा हुई खबर पूरी तरह से गायब थी। उन्होंने कहा कि मीडिया को संवेदनशीलता पैदा करनी चाहिए।
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