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चौंकिए मत! खतरे में है 100 साल पुराना ऐतिहासिक अस्पताल, जहां न पानी है न शौचालय

Mon, 29 Jan 2018 03:32 PM IST
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली
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लेडी हार्ड‌िंग मेड‌िकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का आलम कोई नया नहीं है, लेकिन बात जब केंद्र के अस्पताल की हो तो स्थिति थोड़ा चौंकाती है। जिन अस्पतालों की कायाकल्प पर करोड़ों का बजट दिया जा रहा है, उन्हीं में से 100 साल पुराना एक अस्पताल खतरे में है। यह अस्पताल है कनॉट प्लेस स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज। 
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लेडी हार्ड‌िंग मेड‌िकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
कहीं छज्जा टूटा है तो कहीं गंदा पानी भरा हुआ। प्रसूति वार्ड नंबर-1 के पीछे की दीवार जर्जर हो चुकी है। ऐसे में यहां संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। अमर उजाला की पड़ताल में यहां ऐसी कई खामियां सामने आईं है, जिन पर सरकार की नजर पड़नी जरूरी है। उधर, अस्पताल के निदेशक डॉ राजीव गर्ग का कहना है कि वे स्वास्थ्य सचिव के निर्देश पर ही कुछ जवाब दे सकते हैं।
दीवारों पर काई प्रसूति वार्ड के आसपास दीवारों पर काई लग गई है। मुख्य प्रसूति ऑपरेशन थिएटर के बाहर छतों से सरिया बाहर निकाली हुई है। वार्ड नंबर-2 के आसपास झाड़ियां उग आई हैं। हाल ही में नई इमारत बनी है, यहां जाते समय मरीजों को गंदे पानी से भरे तालाब को पार करना पड़ता है। अस्पताल के कई कोनों में शराब की खाली बोतलें भी मिलीं, जो प्रबंधन पर सवाल खड़ी करती हैं। 
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लेडी हार्ड‌िंग मेड‌िकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
न पानी, न शौचालय साल 1916 में स्थापित दिल्ली के पुराने अस्पतालों में शामिल करीब आठ सौ बिस्तरों के इस अस्पताल में तीमारदारों के लिए कोई इंतजाम नहीं है। न तो तीमारदारों के लिए पीने की पानी की कोई व्यवस्था है और न ही शौचालय। एक ओर सरकार स्वच्छ भारत अभियान को लेकर गंभीर है तो वहीं उसके ही अस्पताल में हालात हद से ज्यादा बदतर हैं।
जगह-जगह दिखती हैं पट्टियां मरीजों की चोट पर बंधनी वाली पट्टियों का इस अस्पताल में रस्सी के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक हर जगह पट्टियां बंधी दिखाई देती हैं। कई वार्डों के दरवाजों तक में यही हाल है। ओपीडी के गलियारों से वार्ड तक जाने में कई जगह जैविक कचरा भी फैला दिखता है।

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लेडी हार्ड‌िंग मेड‌िकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल में होता है प्रचार चौंकाने वाली बात है कि अस्पताल के प्रसूति वार्ड जैसे सुरक्षा कवच वाले स्थानों पर प्रचार भी जबरदस्त देखने को मिलता है। यहां वार्ड की दीवारों पर प्रसाद वितरण, दुबई और सिंगापुर घूमने का ऑफर और कई संगठनों के पोस्टर चिपके हुए हैं। अस्पताल के बीचों बीच बने इस वार्ड के नोटिस बोर्ड तक पर ये पर्चे चस्पा दिए गए हैं।
नहीं लेता कोई सुध अव्यवस्थाओं पर जब अस्पताल के डॉक्टर व कर्मचारियों से पूछताछ की गई तो लगभग सभी ने एक जैसा जवाब दिया। उनका कहना था कि गंदगी और जर्जर इमारतें लंबे समय से हैं, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं। कई महीनों तक अधिकारी निरीक्षण करने के लिए नहीं आते। अगर कोई मंत्रालय से अधिकारी आता है तो साफ सुथरी जगह तक ही उसे ले जाते हैं।
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लेडी हार्ड‌िंग मेड‌िकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
महिला डॉक्टरों से छेड़छाड़ अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि अव्यवस्थाएं इस कदर हैं कि महिला डॉक्टरों के हॉस्टल तक बाहरी लोग आकर छेड़खानी करते हैं। कुछ ही समय पहले इसकी शिकायत प्रबंधन से की गई थी। हॉस्टल के पीछे निर्माणाधीन इमारत है, जहां बाहरी लोग आकर नशा करते हैं। 
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लेडी हार्ड‌िंग मेड‌िकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
कई बार लिख चुके हैं पत्र अस्पताल के आरडीए अध्यक्ष डॉ विवेक चौकसे बताते हैं कि अस्पताल में सिर्फ इलाज से ही लेना-देना नहीं होता। डॉक्टर और पूरा स्टाफ किन मुसीबतों का सामना हर दिन कर रहा है, इसके बारे में किसी को मतलब नहीं है। अस्पताल में मरीजों को दिक्कत होती है। डॉक्टरों के लिए भी बहुत परेशानी है। कई बार पत्र लिखकर इसके बारे में मंत्रालय तक को अवगत करा चुके हैं।
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