नोटबंदी से परेशान छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी और खोमचे वालों, चाय वालों को भी अब कैशलेस इकोनॉमी का फंडा समझ में आ गया है। शहर में कदम-कदम पर छोटे-छोटे कारोबार करने वाले लोग मोबाइल वॉलेट का उपयोग कर रहे हैं। प्लास्टिक मनी का उपयोग भी धड़ल्ले से हो रहा है। उनका कहना है कि हमारा तो व्यापार चलना चाहिए। नकदी हो या न हो।
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- फोटो : लाल सिंह
रेहड़ी वाले कर रहे स्वाइप मशीन का इस्तेमाल
पवन शाह सेक्टर- 21 की मार्केट में गर्म कपड़ों की रेहड़ी लगाते हैं। नोटबंदी के बाद धंधा मंदा हो गया था। ऐसे में पवन ने तकनीक का सहारा लिया और बैंक से स्वाइप मशीन ले ली। पवन ने बताया कि रेहड़ी लगाकर व्यापार कर रहा हूं, तो क्या हुआ। अब मैं भी स्वाइप मशीन के जरिये व्यापार कर रहा हूं। इससे यह फायदा हो रहा है कि अब खुले के लिए किचकिच नहीं करनी पड़ती। यह मार्केट 80 प्रतिशत तक कैशलेस हो गया है। बड़ी-छोटी सभी तरह की दुकानों पर भी ई-वॉलेट या स्वाइप मशीन से पैसे लिए जा रहे हैं।
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- फोटो : लाल सिंह
छोटे दुकानदार ई-वॉलेट से ले रहे थोक सामान
सेक्टर- 21-25 चौराहे पर बुके की दुकान लगाने वाले सुशील कुमार ने भी अब ई-वॉलेट से भुगतान लेना शुरू कर दिया है। सुशील ने बताया कि मैं जहां से फूल खरीदता हूं, वहां भी मोबाइल से ही पैसे ट्रांसफर करता हूं। हमारी पूरी चेन ऐसे ही चल रही है। अच्छा है इससे आसानी से पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं। आसपास की दुकानों ने भी इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
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- फोटो : लाल सिंह
ऑटो वाले कर रहे मोबाइल वॉलेट का उपयोग
नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित परिवहन के साधन हुए। इसमें ऑटो से सफर करने वाले भी बेहद परेशान रहे। लेकिन ऑटो चालकों और लोगों ने इसका प्रबंध कर लिया। अब ऑटो वाले के पास पेटीएम का लाइसेंस है। वह इससे कनेक्ट हो चुका है। सवारियों के मोबाइल में भी पेटीएम डाउनलोड हो चुका है और पेटीएम के वॉलेट में पैसा भी है। किराया देने के लिए कैमरे से बारकोड स्कैन किया और पैसा ऑटो चालक के अकाउंट में पहुंच गया।
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- फोटो : लाल सिंह
इन बाजारों ने अपनाया तरीका
हरौला मार्केट में करीब 20 फीसदी दुकानदार स्वाइप मशीन और मोबाइल वॉलेट से पैसे ले रहे हैं। इंद्रा मार्केट में भी 30 फीसदी दुकानदार यह तरीका अपना रहे हैं। अट्टा मार्केट का भी यही हाल है। शहर के कुछ अन्य मार्केट भी इसी तरह से व्यवसाय चल रहा है। नोएडा प्राधिकरण के पास सभी चाय वाले मोबाइल वॉलेट का उपयोग कर रहे हैं।
शुरुआत में हमें काफी परेशानी हुई। सवारियों के पास नकदी नहीं होती थी, तो हमें मजबूरी में सवारी छोड़नी पड़ती थी। अब जिनके पास नकदी मिल गई तो ठीक है, नहीं तो पेटीएम से लोग पैसे चुका दे रहे हैं। - निर्देश, ऑटो चालक
पेटीएम ने हमारी काफी मदद की है। सवारी अगर 100 रुपये किराया देगी, तो कंपनी की ओर से 5 से 10 फीसदी ज्यादा अमाउंट मिलता है। अब रोज की परेशानी नहीं होती। -दिनेश, ऑटो चालक