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न जाती शाहरूख के मां की याददाश्त तो बॉलीवुड को न मिलता किंग खान

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दिल्ली में पैदा हुए और पले-बढ़े बॉलीवुड के बादशाह शाहरूख खान और उनकी प्रेम कहानी से तो आप सभी वाकिफ होंगे लेकिन उनकी अम्मी लतीफ फातमा और उनके अब्बा मीर ताज मोहम्मद खान की फिल्मी स्टाइल वाली प्रेम कहानी के बारे में नहीं जानते होंगे। जैसे गौरी और शाहरुख की कहानी को बेहद रूमानी और फिल्मी कहा जाता है वैसे ही उनके अम्मी और अब्बा की प्रेम कहानी और फिर शादी कम दिलचस्प नहीं है।
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न जाती शाहरूख के मां की याददाश्त तो बॉलीवुड को न मिलता किंग खान

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शाहरुख की मां लतीफ फातमा कर्नाटक की रहने वाली थीं और अपनी चार बहनों में सबसे बड़ी थीं। वो दक्षिण भारत की चारों भाषाओं में पारंगत थीं। शाहरुख के माता-पिता का मिलना अगर जानेंगे तो यही लगेगा की आप कोई फिल्मी कहानी सुन रहे हैं।
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एक शाम जब शाहरुख के अब्बू मीर ताज मोहम्मद अपने चचेरे भाई जनरल शाह नवाज के साथ दिल्ली के इंडिया गेट पर घूम रहे थे तब उन्होंने देखा कि एक कार सड़क पर उल्टी पड़ी है।

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ये तब हुआ जब शाहरुख की मां लतीफ फातमा अपने पिता और बहनों के साथ दिल्ली घूमने आईं थीं और ये हादसा हो गया।
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यह देखते ही मीर ताज मोहम्मद अपने भाई के साथ कार के पास उसके अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए भागे।
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अब आप इसे फातिमा की बदकिस्मती कहें या मीर ताज और फातिमा के मिलने का संयोग कहें। कार में सवार सभी लोग बिना किसी बड़ी चोट के इस हादसे से बच गए सिवाए फातिमा के।
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इस हादसे में फातिमा ने न सिर्फ अपनी यादाश्त खो दी बल्कि उन्हें ब्लड चढ़ाने की भी जरूरत पड़ी। अब आप सोचेंगे कि फातिमा के एक्सीडेंट से इन दोनों की शादी का क्या लेना-देना। यहीं है स्टोरी में ट्विस्ट।

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अस्पताल पहुंचने पर जब फातिमा को खून चढ़ाने की जरूरत हुई तो पता चला कि मीर ताज यानी शाहरुख के पिता और उनकी मां फातिमा का ब्लड ग्रुप समान है और इस तरह मीर ताज ने फातिमा को अपना खून दिया। इसी घटना के बाद दोनों में नजदीकियां बढ़ीं जो आगे चलकर प्यार में बदल गईं। मगर अब भी इनकी शादी इतनी आसान नहीं थी क्योंकि फातिमा की पहले ही मंगनी हो चुकी थी।
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ये शादी शायद मुश्किल होती अगर मीर ताज का खून फातिमा को नहीं मिला होता। मीर ताज के खून ने फातिमा की जान बचाई और उनके अब्बू के दिल में मीर ताज के लिए जगह बनाई जिसके चलते उनके वालिद दोनों की शादी के लिए तैयार हो गए। और इस तरह दोनों की ये फिल्मी शादी पूरी हुई।
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