hashimpura massacre
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हाशिमपुरा कांड के पीड़ित रियाजुद्दीन और मुस्तकीम बताते हैं कि असल विवाद तो शबे बरात पर पटाखों की चिंगारी के बाद शुरू हुआ था। यह चिंगारी एक टाट में जाकर गिर गई थी, जिससे वहां आग लग गई थी। इसके बाद तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गईं, जिससे सांप्रदायिक माहौल खराब हो गया और फिर विवाद बढ़ता चला गया। वह बताते हैं कि रमजान का महीना था। अलविदा जुमे का दिन था। जुमे की नमाज पढ़कर लोग आए थे, जिसके बाद पीएसी वाले आए और तलाशी के नाम पर घरों में घुस गए और जो भी किशोर, नौजवान दिखा, सबको पकड़कर ले गए। जो ट्रक में भरकर ले जाए गए थे उन्हें मार दिया गया, जबकि जो बाकी थे उन्हें जेल में डाल दिया गया।