31वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में पहली बार छह नए देश भाग लेने आ रहे हैं। जो अपनी संस्कृति से मेले में आने वाले पर्यटकों को रूबरू करवाएंगे। इसके साथ खाने के शौकीन लोगों को मेले में मिस्र, झारखंड और हरियाणा के विलुप्त व्यंजनों का मजा मिलेगा। इस मेले में हरियाणा में मनाई जा रही स्वर्ण जंयती की झलक भी देखने को मिलेगी।
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- फोटो : अमर उजाला
जिंबॉब्वे, सीरिया, दक्षिण अफ्रीका, तनजानियां, जिबूती और लाओस देश के कलाकार और शिल्पकार मेले मे पहली बार आ रहे हैं। इन सभी देशों से 50 सदस्य आ रहे हैं। जो अपने देश की संस्कृति और रहन-सहन के बारे में पर्यटकों को रूबरू करवाएंगे। इनके साथ 24 देशों के कलाकार मेले में आ रहे हैं।
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नेशन पार्टनर मिस्र के कलाकार पहुंच भी चुके हैं। इन सभी 24 देशों से आए कलाकारों और अधिकारियों को हरियाणा की संस्कृति और स्वर्ण जयंती के बारे में बताया जाएगा। जिससें देश के साथ-साथ विदेशों में हरियाणा की अपनी अलग पहचान बन सके।
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इस मेले की खासियत मिस्र, झारखंड और हरियाणा के विलुप्त होते 30 से ज्यादा व्यंजनों के स्टाल होंगे। इन स्टाल पर आधुनिक जीवनशैली की वजह से बिसरा दिए गए व्यंजन पारंपरिक रूप से ही बनाकर लुत्फ उठाया जा सकेगा। जिसमें मिस्र और झारखंड के 10 मशहूर व्यंजन परोसे जाएंगे। इसके साथ हरियाणा के आठ लुप्त हो चुके व्यंजन भी खाने को मिलेगे।
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- फोटो : अमर उजाला
मेले में बने फूड जोन में मिस्र के स्टाल पर 10 मशहूर व्यंजन पर्यटकों को खाने के लिए मिलेंगे। जिसमें ज्यादा व्यंजन नॉनवेज है। इसमें फुल वा तमाया यह फास्ट फूड है जो फावा बिन्स से बनाया जाता है, कुशरी जो चावल-पास्ता और टोमेटो सॉस से तैयार होता है, कबाब वा काफता, हवाशी मिस्र का मीट पाई, शोरमा, फतह यह बिरयानी है, सायादया यह सी फुड है, बलादी ब्रैड और एक शाकाहारी डिश ऐ बेसरह है।
झारखंड के भोजन में बिहारी लिट्टी, छिलका रोटी, तिल बरफी, आलू चोखा, डुस्का, हाड़िया और रूगरा खाने को मिलेंगे। मेले में पहली बार हरियाणा के लुप्त हो रहे व्यंजनों के लिए फूड कोर्ट में अलग से स्टाल बनाया जाएगा। जिसमें बाजरे की खिचड़ी, पूड़े, बूरा रोटी घी, मालपुआ, गुलगुले, कचरी की चटनी आदि खाने को मिलेगी।