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Harish Dead: 'जहां भी रहिए, आपको भगवान का आशीर्वाद', पिता ने कहे ये शब्द; हरीश के दर्द से दाहक भी नहीं अंजान

Thu, 26 Mar 2026 11:47 AM IST
Sharukh Khan फिरदौस आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित मुक्तिधाम में हरीश राणा का अंतिम संस्कार किया गया। माता-पिता और भाई समेत अन्य रिश्तेदार मौजूद  रहे। पिता ने कहा जहां भी रहिए, आपको भगवान का आशीर्वाद मिले। हरीश के अंतिम संस्कार करते समय आंखें नम हो गईं।
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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित मुक्तिधाम में बुधवार की सुबह एक ऐसी विदाई का साक्षी बनी, जिसमें सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि अंतिम संस्कार कराने वाले भी हरीश राणा के 13 साल लंबे दर्द से अछूते नहीं रह सके। इच्छामृत्यु के बाद जब उन्हें अंतिम विदाई दी गई, तो हर आंख नम थी। यहां तक कि दाह-संस्कार कराने वालों की आंखों में आंसू दिखे।

गाजियाबाद निवासी हरीश राणा का पार्थिव शरीर सुबह करीब 8:40 बजे श्मशान घाट लाया गया। एंबुलेंस जैसे ही रुकी, माहौल भारी हो गया। माता-पिता की आंखों से बहते आंसू उस पीड़ा की कहानी कह रहे थे, जो उनके बेटे ने वर्षों तक सही थी। मां निर्मला का रो-रोकर बुरा हाल था। मानो 13 साल का जमा हुआ दर्द एक साथ छलक पड़ा हो। 
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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
इस कठिन घड़ी में भी पिता अशोक राणा ने खुद को संभालते हुए हाथ जोड़कर वहां मौजूद लोगों से कहा, आप सब रोइए मत, बेटे को शांति से जाने दीजिए.... जहां भी रहे, भगवान का आशीर्वाद उसे मिले। उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल भर आया।

 
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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
करीब 9:45 बजे वह क्षण आया, जब छोटे भाई आशीष राणा ने कांपते हाथों से अपने बड़े भाई को अंतिम प्रणाम किया और मुखाग्नि दी। उस पल की सिसकियां और खामोशी-दोनों मिलकर एक ऐसे दर्द को बयां कर रही थीं, जिसे शब्दों में पिरो पाना मुश्किल है। 

 

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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
विजय कुमार पांडेय ने बताया कि उन्होंने हरीश की कहानी पहले सोशल मीडिया पर पढ़ी थी, लेकिन जब उन्हें अंतिम संस्कार की सूचना मिली, तो वे खुद को रोक नहीं पाए। जब पार्थिव शरीर यहां लाया गया, तो उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि 13 साल के दर्द का अंत है।
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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुबह करीब 8ः40 बजे उन्हें शमशान घाट लाया गया। उस दौरान उनके माता-पिता और उनके भाई भी मौजूद थे। सभी की आंखें नम थी। बहुत ही मान-सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।- अवधेश कुमार पांडे, हरीश राणा का अंतिम संस्कार कराने वाले।
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बेटे हरीश के साथ माता-पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जब हरीश राणा को शमशान घाट लाया गया उस समय पूरा माहौल गमगीन था। लोगों की आंखें नम थीं। बहुत ही मान-सम्मान के साथ उनको अंतिम विदाई दी गई। उनके छोटे भाई ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। -विजय कुमार पांडे, हरीश का अंतिम संस्कार कराने वाले।
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हरीश के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे।

 

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बेटे हरीश के साथ मां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है। इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए।

 
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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी थी। मंगलवार को गाजियाबाद निवासी हरीश राणा ने एम्स दिल्ली में अंतिम सांस ली।



 
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