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Harish Euthanasia: सम्मानजनक मौत के लिए हरीश संग डॉक्टर लड़ रहे जिंदगी से जंग, अब ऐसी है स्थिति; हेल्थ अपडेट

Fri, 20 Mar 2026 09:38 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

एम्स दिल्ली के शांत वार्ड में भर्ती गाजियाबाद निवासी हरीश राणा की हालत फिलहाल स्थिर है। डॉक्टरों की टीम सतर्कता से उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए है। सम्मानजनक मौत के लिए हरीश के साथ डॉक्टर जिंदगी से जंग लड़ रहे हैं।
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Harish Rana Euthanasia - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
एम्स के एक शांत वार्ड में जिंदगी और मौत के बीच ठहरी एक लंबी प्रतीक्षा चल रही है। हरीश राणा अब शब्दों से परे एक ऐसी अवस्था में हैं, जहां हर निर्णय संवेदनाओं, कानून और चिकित्सा की सीमाओं के बीच संतुलन साध रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत डॉक्टरों की टीम बेहद सतर्कता से उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए है। 

मशीनों से हटकर सामान्य बेड तक का सफर जितना चिकित्सकीय है, उतना ही भावनात्मक भी, जहां पास खड़े माता-पिता की आंखों में उम्मीद, पीड़ा और स्वीकार्यता, तीनों एक साथ झलक रहे हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, फिलहाल हरीश राणा की हालत स्थिर है।

 
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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, पैसिव यूथेनेशिया के तहत चरणबद्ध तरीके से हरीश राणा का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जा रहा है। कुछ दिन पहले पेट में लगी पोषण नली को बंद कर दिया गया था। हालांकि, डॉक्टर अभी उनके दिमाग को दी जाने वाली दवाइयां दे रहे हैं। 


 
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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह प्रक्रिया मेडिकल प्रोटोकॉल और विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही है। हरीश की मां लगातार उनके साथ रहती हैं जबकि पिता, भाई और बहन समय-समय पर मुलाकात करने आते हैं। इस दौरान डॉक्टर लगातार उनकी शारीरिक स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। 

 

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बेटे हरीश के साथ मां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यदि किसी चरण में कोई चिकित्सा जटिलता सामने आती है, तो उसके अनुसार उपचार या प्रक्रिया में बदलाव भी किया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह समय-सीमा एक अनुमान है। हर मरीज की स्थिति अलग होती है और उसी के अनुसार प्रक्रिया की गति भी तय होती है।
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हरीश राणा और उसके पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'पैलिएटिव केयर में मौत को तेज नहीं किया जाता'
अस्पताल के पूर्व पैलिएटिव विशेषज्ञ डॉ. सुशमा भटनागर के अनुसार, पैलिएटिव केयर में मौत को तेज नहीं किया जाता, बल्कि दर्द-तकलीफ कम कर प्राकृतिक मौत की अनुमति दी जाती है। फोकस मरीज की आराम और गरिमा पर है।
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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भारत के पहले निष्क्रिय इच्छामृत्यु को लागू करने के लिए डॉ. सीमा मिश्रा की अध्यक्षता में एक विशेष मेडिकल टीम का गठन किया गया है। डॉ. सीमा मिश्रा एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं। इस टीम में न्यूरो सर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन और मनोरोग विभागों के डॉक्टर शामिल हैं।
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बेटे हरीश के साथ माता-पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
15 दिन से एक महीना तक लग सकता है
एम्स के पूर्व निदेशक और सीताराम भारतीय इंस्टीट्यूट के कंसलटेंट डॉ. एमसी मिश्रा ने बताया कि ऐसे मामलों में हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जाता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन कर कोर्ट को रिपोर्ट देते हैं और उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होती है।

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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश राणा के मामले में यह कहना मुश्किल है कि उनकी सांसें कब तक चलेंगी। अगर निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो न्यूट्रिशन बंद करने के बाद भी 15 दिन, एक महीना या उससे ज्यादा समय लग सकता है।
 

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हरीश के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश के अंगदान पर भी टीम कर रही जांच 
सूत्रों के अनुसार, हरीश के अंगों को दान करने के परिवार के संकल्प के बाद, एम्स की एक मेडिकल टीम अपने सहयोगियों की मदद से उनके शरीर की पूरी जांच कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन से अंग अभी काम कर रहे हैं और दान के लिए सही हैं। 

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बेटे हरीश के साथ पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद पूरी जानकारी और सहमति के साथ अंग निकालने की जरूरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हरीश के माता-पिता ने बड़ा दिल दिखाते हुए अंगदान का फैसला किया है। एम्स के नियमों के अनुसार, हरीश की किडनी, दिल, पैंक्रियास और आंतों जैसे अंगों को दान के लिए विचाराधीन रखा गया है, बशर्ते वे काम कर रहे हों। उनकी कॉर्निया और हार्ट वाल्व की भी जांच की जा रही है। शुरुआती जांच के बाद, डॉक्टर तय करेंगे कि कौन से अंग ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित रूप से निकाले जा सकते हैं।
 

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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है।
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Harish Rana Case - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए। हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी।

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