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Harish Rana Euthanasia: हरीश अब सामान्य बेड पर शिफ्ट, वेंटिलेटर और अन्य गहन जीवनरक्षक उपचार हटाए; हेल्थ अपडेट

Thu, 19 Mar 2026 10:46 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

हरीश राणा को अब सामान्य बेड पर शिफ्ट कर दिया गया है। वेंटिलेटर और अन्य गहन जीवनरक्षक उपचार से हटा दिया गया है। चरणबद्ध तरीके से इच्छामृत्यु प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हरीश के मेडिकल बोर्ड का विस्तार कर दिया गया है।
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Harish Rana Euthanasia - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
इच्छामृत्यु प्रक्रिया के तहत एम्स में भर्ती गाजियाबाद निवासी हरीश राणा को बुधवार को वेंटिलेटर और अन्य गहन जीवनरक्षक उपचार से हटाकर सामान्य बेड पर शिफ्ट कर दिया गया है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। 

सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों उनकी पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई थी और फीडिंग ट्यूब पर कैप लगा दिया गया था। हालांकि, उसे अभी शरीर से हटाया नहीं गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हरीश के मेडिकल बोर्ड का विस्तार किया गया है। 
 
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Harish Rana Case - फोटो : वीडियो ग्रैब
पहले पांच सदस्यों वाला बोर्ड 10 का हो गया है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, चरणबद्ध तरीके से उनकी जीवनरक्षक उपचार प्रणाली को बंद किया जा रहा है। पेट में लगी कृत्रिम पोषण ट्यूब को बंद कर दिया गया है, लेकिन जरूरी दवाइयां दी जा रही हैं। 

 
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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डॉक्टरों ने कहा कि यह प्रक्रिया मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत और विशेषज्ञों की राय के अनुसार की जा रही है। हरीश के अंगों की स्थिति का भी परीक्षण जारी है, ताकि अंगदान के बारे में अंतिम निर्णय लिया जा सके। अस्पताल प्रशासन ने परिवार की काउंसलिंग पर भी जोर दिया है। 

 

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बेटे हरीश के साथ माता-पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मनोचिकित्सकों की टीम रोजाना माता-पिता और भाई से बातचीत कर रही है। उनकी मां ज्यादातर समय उनके पास रहती हैं, जबकि पिता, भाई और बहन समय-समय पर मुलाकात करते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इच्छामृत्यु प्रक्रिया में समय का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
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हरीश के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पैलिएटिव केयर वार्ड में छह बेड की सुविधा
डॉक्टर के अनुसार, पैलिएटिव केयर वार्ड में छह बेड की सुविधा है। हरीश के स्वास्थ्य का मूल्यांकन लगातार जारी है। समय-समय पर डॉक्टर आगे की प्रक्रिया निर्धारित करेंगे। डॉक्टरों का कहना है कि इच्छामृत्यु की प्रक्रिया में समय का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। 

 
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बेटे हरीश के साथ मां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस दौरान मेडिकल टीम लगातार मरीज की स्थिति की निगरानी करेगी और समय-समय पर रिपोर्ट तैयार कर अदालत को सौंपेगी। अंतिम निर्णय इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर लिया जाएगा।
 
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बेटे हरीश के साथ पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'पैलिएटिव केयर में मौत को तेज नहीं किया जाता'
अस्पताल के पूर्व पैलिएटिव विशेषज्ञ डॉ. सुशमा भटनागर के अनुसार, पैलिएटिव केयर में मौत को तेज नहीं किया जाता, बल्कि दर्द-तकलीफ कम कर प्राकृतिक मौत की अनुमति दी जाती है। फोकस मरीज की आराम और गरिमा पर है।

 

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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भारत के पहले निष्क्रिय इच्छामृत्यु को लागू करने के लिए डॉ. सीमा मिश्रा की अध्यक्षता में एक विशेष मेडिकल टीम का गठन किया गया है। डॉ. सीमा मिश्रा एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं। इस टीम में न्यूरो सर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन और मनोरोग विभागों के डॉक्टर शामिल हैं।

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हरीश राणा और उसके पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
15 दिन से एक महीना तक लग सकता है
एम्स के पूर्व निदेशक और सीताराम भारतीय इंस्टीट्यूट के कंसलटेंट डॉ. एमसी मिश्रा ने बताया कि ऐसे मामलों में हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जाता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन कर कोर्ट को रिपोर्ट देते हैं और उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होती है।

 

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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश राणा के मामले में यह कहना मुश्किल है कि उनकी सांसें कब तक चलेंगी। अगर निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो न्यूट्रिशन बंद करने के बाद भी 15 दिन, एक महीना या उससे ज्यादा समय लग सकता है।
 

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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश के अंगदान पर भी टीम कर रही जांच 
सूत्रों के अनुसार, हरीश के अंगों को दान करने के परिवार के संकल्प के बाद, एम्स की एक मेडिकल टीम अपने सहयोगियों की मदद से उनके शरीर की पूरी जांच कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन से अंग अभी काम कर रहे हैं और दान के लिए सही हैं। 

 

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हरीश राणा का फ्लैट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद पूरी जानकारी और सहमति के साथ अंग निकालने की जरूरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हरीश के माता-पिता ने बड़ा दिल दिखाते हुए अंगदान का फैसला किया है। एम्स के नियमों के अनुसार, हरीश की किडनी, दिल, पैंक्रियास और आंतों जैसे अंगों को दान के लिए विचाराधीन रखा गया है, बशर्ते वे काम कर रहे हों। उनकी कॉर्निया और हार्ट वाल्व की भी जांच की जा रही है। शुरुआती जांच के बाद, डॉक्टर तय करेंगे कि कौन से अंग ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित रूप से निकाले जा सकते हैं।
 

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Harish Rana - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है।


 
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Harish Rana Case - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए। हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी।

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