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जब 25 मिनट मिसिंग रही लाहौर बस सेवा तो घबराई पाकिस्तान की सरकार 

Sat, 01 Oct 2016 06:45 AM IST
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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लाहौर बस सेवा - फोटो : अमर उजाला
भारत-पाकिस्तान दोस्ती की मिसाल लाहौर बस सेवा शुक्रवार को करीब 25 मिनट मिसिंग रही और पाकिस्तान सरकार टेंशन में आ गयी। ट्रैफिक जाम के चलते बस के नो मैन्स लैंड पर पहुंचने में देरी से पाकिस्तान रेंजर्स ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान सरकार को जानकारी दी और इसी के साथ ढाई बजे दिल्ली स्थित पाकिस्तान दूतावास के फोन घनघनाते रहे।
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लाहौर बस सेवा - फोटो : अमर उजाला
वहीं, सर्जिकल स्ट्राइक के चलते लाहौर बस सेवा अब नो मैंन्स लैंड क्रास नहीं कर रही है। तनाव के बीच भारत सरकार ने बस की सुरक्षा में आठ पीसीआर लगा दी हैं। 
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लाहौर बस सेवा - फोटो : अमर उजाला
इंटरनेशनल बस टर्मिनल अंबेडकर स्टेडियम से भारत की सदा-ए-सरहद शुक्रवार को दिल्ली से अटारी बार्डर (पाकिस्तान) के लिए सुबह चार बजे दिल्ली से निकली थी, लेकिन ट्रैफिक के चलते करीब 25 मिनट लेट रही। 

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लाहौर बस सेवा - फोटो : अमर उजाला
ड्राइवर का फोन न मिलने के चलते अटारी बार्डर पर पाक रेंजर्स ने पाकिस्तानी सरकार को लाहौर बस सेवा की मिसिंग की जानकारी दी और पाकिस्तान सरकार ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान दूतावास से बस की जानकारी मांगी। पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों ने करीब 25 मिनट तक डीटीसी के इंटरनेशनल बस टर्मिनल अंबेडकर स्टेडियम में फोन से बस भेजने की जानकारी मांगी। 
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लाहौर बस सेवा - फोटो : अमर उजाला
हालांकि बाद बाघा बार्डर से खबर मिली कि बस पहुंच गयी। एक जनवरी 2015 से अभी तक लाहौर बस सेवा पाकिस्तान के अटारी बार्डर से थोड़ा आगे जाकर सवारियों को उतारती थी। जहां से टैक्सी या बस के माध्यम से यात्रियों को लाहौर के इंटरनेशनल बस अड्डे तक पहुंचाया जाता था। हालांकि सर्जिकल स्ट्राइक  से ठीक पहले और उड़ी हमले के बाद बस बार्डर क्रास नहीं कर रही है। बल्कि नो मैंन्स लैंड से पहले ही रूक जाती है।
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पाकिस्तान से आए यात्री - फोटो : अमर उजाला
तल्खी के बीच ओपन हार्ट सर्जरी भरेगी दिलों की दरारें  
भारत-पाक रिश्तों की तल्खी के बीच इस्लामाबाद के समीर अपने आठ साल के बच्चे शतिर को नोएडा स्थित जेपी अस्पताल में दिल का इलाज करवाने पहुंचे हैं। नोएडा के डॉ. अजय बच्चे की ओपन हॉर्ट सर्जरी करेंगे। बच्चे की मौसी सोफिया का कहना है कि रिश्ते सरकारों के बीच तल्ख होते हैं, लेकिन आम लोगों को इससे कोई मतलब नहीं होता है। थोड़ी देर के लिए गुस्सा आता है, लेकिन असल जिंदगी की जंग तो रोटी, कपड़ा और मकान है।
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यात्री - फोटो : अमर उजाला
जनता सिर्फ अमन और शांति की चाहत रखती है
सर्जिकल स्ट्राइक हो या उड़ी हमला, दोनों देशों की जनता सिर्फ अमन और शांति की चाहत रखती है। मैं पाकिस्तान से कानपुर अपनी बहन और पत्नी के मायके जा रहा हूं। मुझे एक बार भी नहीं लगा कि मुझे नहीं जाना चाहिए। दोनों देशों की जड़ें तो एक हैं। सिर्फ हुक्मरानों के चलते जंग हैं।  -कामरान, इस्लामाबाद, बिजनेसमैन, पाकिस्तानी नागरिक। 

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यात्री - फोटो : अमर उजाला
हिंदोस्तानी युवा अब पाकिस्तान में नहीं करना चाहते शादी 
भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद भी रिश्तेदारी कायम थी। हालांकि अब भारतीय युवा पाकिस्तान में अपने खानदानों में भी शादी नहीं करना चाहते हैं। क्योंकि जब भी कोई हमला होता है तो रिश्तों में तल्खी आ जाती है। इन बीस दिनों की यात्रा में पाकिस्तान में अपने रिश्तेदारों से मेरी मीडिया रिपोर्ट के बाद बहस हुई। रिश्तेदारी भूलकर ऐसे मौके पर सिर्फ हम हिंदोस्तानी पहले हैं यही याद आता है।  - नफीस, लखनऊ निवासी। 
 

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यात्री - फोटो : अमर उजाला
घर से एक फोन आया तो बस में जा बैठे 
सर्जिकल स्ट्राइक का तो पता नहीं चला लेकिन कल दुपहर लखनऊ से फोन आया कि टिकट लो और वापस आओ। घर वालों ने फोन पर कोई जानकारी नहीं दी, लेकिन टीवी पर कुछ चल रहा था लेकिन अधिक समझ नहीं आया। पाकिस्तान बार्डर पर अजीब सी नजरों से जब घूरा तो लगा कुछ हुआ है। हम तो सामान तक लेकर नहीं आए, बस जल्दबाजी में टिकट ली और भारत आ गए।  -हमीदा, लखनऊ निवासी। 

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लाहौर बस सेवा - फोटो : अमर उजाला
रिश्तों में तल्खी ने रोकी थी बस सेवा की रफ्तार 
बता दें कि 19 फरवरी 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने भारत-पाकिस्तान दोस्ती की गवाह लाहौर बस सेवा को हरी झंडी देकर रवाना किया था। हालांकि 13 दिसंबर 2001 को संसद हमले के बाद बस सेवा रोक दी गयी थी। 
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यात्री - फोटो : अमर उजाला
उसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में मधुरता आने के बाद 16 जुलाई 2003 को लाहौर बस सेवा दोबारा बहाल कर दी गयी थी। हालांकि एक जनवरी 2015 को पहला मौका था, जब पाकिस्तानी सरकार ने खुद पत्र लिखकर भारत को बस रूट में बदलाव करने की मांग रखी थी। 

 
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