गम में डूबा गांव, बेसुध हुए माता-पिता
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की अंतिम यात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा। तिरंगे में लिपटे बेटे को अंतिम विदाई देते समय पिता मनोज त्यागी और मां निशा त्यागी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों के विलाप और गांव के माहौल ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। ग्रामीणों का कहना था कि चिराग सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि गांव, जिले और देश की उम्मीद था। उसकी असमय मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया।