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चिराग त्यागी हत्याकांड: यश के मन में डेढ़ साल से था बदले का जहर, 50 हजार में 15 दिन पहले खरीदी थी पिस्टल

Sun, 31 May 2026 09:55 PM IST
विकास कुमार माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद/मुरादनगर

सार

पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या में इस्तेमाल पिस्टल यश ने करीब 15 दिन पहले 50 हजार रुपये में खरीदी थी। आशंका है कि वारदात के बाद उसने हथियार वापस कर दिया। पुलिस अब हथियार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की तलाश कर रही है।
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पैरा एथलीट चिराग त्यागी - फोटो : अमर उजाला
100 मीटर व 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेने वाले अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट चिराग त्यागी की हत्या अचानक हुए किसी विवाद का नतीजा नहीं, बल्कि डेढ़ साल से पल रही रंजिश का अंत निकली। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी यश ने कुबूल किया है कि उसने दोस्ती और भरोसे का फायदा उठाकर चिराग को पीछे से दो गोलियां मारकर उसकी जान ली है। करीब डेढ़ वर्ष पहले राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खुद के डिस्क्वालिफाई होने के बाद से वह चिराग से बदला लेने की योजना बना रहा था।
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ग्रामीणों ने लगाया जाम - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों ने किया मार्ग जाम
इस बीच रविवार दोपहर चिराग का शव उनके गांव बसंतपुर सैंथली पहुंचते ही माहौल गम और गुस्से में बदल गया। ग्रामीणों और परिजनों ने पहले मेरठ रोड पर जाम लगाने का प्रयास किया। उसके बाद गांव के प्रमुख मार्ग को दोपहर तीन से शाम चार बजे तक जाम रखा।
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एंबुलेंस में पहुंचा शव - फोटो : अमर उजाला
शाम को हुआ अंतिम संस्कार
उन्होंने आरोपी के एनकाउंटर की मांग की। मौके पर पहुंचे कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ और एडिशनल सीपी केशव चौधरी ने परिवार को किसी तरह समझाकर यातायात सुचारु कराया। इसके बाद शाम को गांव के श्मशान घाट पर चिराग का अंतिम संस्कार किया गया।

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चिराग त्यागी हत्याकांड पर भड़के ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला संवाद
बधाई देने पहुंचा, फिर साथ लाकर कर दी हत्या
पुलिस के मुताबिक, मुरादनगर के रावली रोड निवासी यश और बसंतपुर सैंथली गांव निवासी चिराग करीबी दोस्त थे। दोनों साथ में प्रैक्टिस करते थे और एक-दूसरे के घर भी आते-जाते थे। बंगलूरू में 8वीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण व रजत पदक जीतने के बाद चिराग के दिल्ली पहुंचने पर यश शनिवार तड़के उनसे मिलने पहुंचा। उसने पदक जीतने पर उसे बधाई दी और साथ घर चलने की बात कही।
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स्वर्ण पदक विजेता चिराग - फोटो : अमर उजाला
इस वजह से नहीं हुआ यश पर चिराग को शक
दोनों अक्सर साथ आते-जाते थे, इसलिए चिराग को उस पर शक नहीं हुआ। दोनों दिल्ली से कैब में सवार होकर निकले और करीब 11 बजे साईं उपवन पहुंचे। यश ने चिराग से कहा कि उसे एक परिचित से 50 हजार रुपये लेने हैं और इन्हीं रुपयों से वह उसकी उधारी भी चुका देगा। इस बहाने वह चिराग को उपवन के भीतर ले गया।
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चिराग त्यागी - फोटो : अमर उजाला
पीछे से मारी दो गोलियां
एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय ने बताया कि उपवन में पहुंचने पर वहां कोई नहीं मिला। दोनों टहलते हुए बातचीत करने लगे। इसी दौरान चिराग कुछ कदम आगे निकल गया। मौका देखते ही यश ने पीछे से उस पर गोलियां चला दीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दो गोलियां लगने की पुष्टि हुई है। हत्या के बाद आरोपी अपने घर पहुंच गया। पुलिस ने शक के आधार पर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ में उसने पूरा घटनाक्रम बता दिया।
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श्मशान जाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
दोस्त नहीं, विश्वासघाती निकला यश
परिजनों का कहना है कि चिराग हमेशा यश की मदद करता था। दोनों अच्छे दोस्त थे। चिराग यश की हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखता था। चिराग के चचेरे भाई अंकुर त्यागी ने बताया कि डेढ़ वर्ष से अधिक समय तक यश चिराग के संपर्क में रहा। यश का घर में आना-जाना था और जरूरत पड़ने पर चिराग ने उसे अपना एटीएम कार्ड तक दे दिया था। परिवार का कहना है कि जिस व्यक्ति पर चिराग ने सबसे ज्यादा भरोसा किया, उसी ने उसके साथ सबसे बड़ा विश्वासघात किया।

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गुस्साए ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
15 दिन पहले खरीदी थी पिस्टल
पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या में इस्तेमाल पिस्टल यश ने करीब 15 दिन पहले 50 हजार रुपये में खरीदी थी। आशंका है कि वारदात के बाद उसने हथियार वापस कर दिया। पुलिस अब हथियार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की तलाश कर रही है। डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि चिराग के चाचा राजेश त्यागी की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103(1) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। हत्या में अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

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चिराग के परिजन - फोटो : अमर उजाला
जापान जाने वाला था चिराग
परिजनों के अनुसार, चिराग त्यागी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। हाल ही में उनका चयन अंतरराष्ट्रीय टीम में हुआ था और अक्तूबर में उन्हें भारत की ओर से जापान में एशियन पैरा गेम्स में प्रतिभाग करने जाना था। इससे पहले ही उनकी हत्या ने परिवार के साथ खेल जगत को भी स्तब्ध कर दिया।

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
तिरंगे में दी गई अंतिम विदाई
ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन ने चिराग के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर सम्मान दिया। अधिकारियों ने आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया। वहीं, कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक ने तत्काल पांच लाख रुपये की सहायता व शासन स्तर पर अतिरिक्त आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया।
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गम में डूबा गांव, बेसुध हुए माता-पिता
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की अंतिम यात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा। तिरंगे में लिपटे बेटे को अंतिम विदाई देते समय पिता मनोज त्यागी और मां निशा त्यागी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों के विलाप और गांव के माहौल ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। ग्रामीणों का कहना था कि चिराग सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि गांव, जिले और देश की उम्मीद था। उसकी असमय मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया।
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