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गाजियाबाद: जिंदगी संवारने आए थे, परिवार ही उजड़ गया, सीवर में जो गया वापस न आया

Fri, 23 Aug 2019 10:23 AM IST
पूजा त्रिपाठी राहुल सक्सेना, अमर उजाला, गाजियाबाद
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sewer death - फोटो : अमर उजाला
गाजियाबाद में सीवर लाइन हादसे के शिकार हुए मजदूर बिहार से जिंदगी संवारने के लिए एनसीआर में काम करने आए थे लेकिन उनका परिवार ही उजड़ गया। ये सभी मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। हादसे में इन मजदूरों की मौत के बाद 20 लोगों का भविष्य दांव पर लग गया है। मोर्चरी पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में आंसू और जुबां पर यही बातें थीं।
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इसी सीवर में गिरकर हुई मौत - फोटो : अमर उजाला
नंदग्राम कृष्णा कुंज में सीवर ठीक करने के दौरान पांच लोगों की जानें चली गईं। विजय राय, शिवकुमार, संदीप, दामोदर और होरिल बिहार समस्तीपुर के रहने वाले थे। ललित सिंह ने बताया कि सभी रोजगार के लिए एनसीआर आए थे। यहां कमाई करके पैसा घर भेजते थे। इससे परिवार के साथ-साथ बच्चों का भविष्य भी अच्छा रहेगा। खुद ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाए, लेकिन बच्चों को पढ़ा लिखाकर अच्छा इंसान बनाएंगे।
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सीवर के पास जमा लोग - फोटो : अमर उजाला
पांचों ने गाजियाबाद शहर को चुना और यहां पर पिछले कई वर्ष से काम करने लगे। सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन बृहस्पतिवार इन परिवारों के लिए काल बनकर आया। एक के बाद एक करके पांच लोगों की जानें चली गईं।

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हादसे के बाद जमा लोग - फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर कृष्णा कुंज में जान जाने से दुखी हैं लोग
देवेंद्र कुमार ने बताया कि कॉलोनी का नाम कृष्णा कुंज है और भगवान कृष्ण के नाम पर ही इसे रखा गया है। शुक्रवार को जन्माष्टमी है। कृष्णा कुंज में पांच लोगों की जानें जाना बहुत दुखद है। कॉलोनी के लोग भी बहुत परेशान हैं। उनका मानना है कि त्योहार के मौके पर यह बड़ा अशुभ हुआ।
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sewer death - फोटो : अमर उजाला
मौत का मंजर देखकर कांपने लगे लोग
स्थानीय निवासी सरदानंद ने बताया कि जैसे ही पांचों लोगों को सीवर से निकाला और जमीन पर रखा तो वहां मौजूद महिलाएं और बच्चे कांपने लगे थे। एक बार तो भगदड़ जैसा माहौल हो गया था। कई महिलाएं तो उन्हें देखकर रोने लगीं। 
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मौके पर पहुंची पुलिस टीम - फोटो : अमर उजाला
ढक्कन उठाने के लिए नहीं था कोई सामान
जिस सीवर पर पांचों काम कर रहे थे, वहां सीवर के ऊपर रखे ढक्कन को हटाने के लिए कोई सामान नहीं था। लोगों ने भागदौड़ करके इधर-उधर से लोहे की सरिया लेकर आए। उसके बाद ढक्कन को साइड में हटाया गया।
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