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52 दिन बाद उम्मीदों की ट्रेन में सवार हुए लगभग 5000 श्रमिक, लौटे बिहार

Sat, 16 May 2020 07:22 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
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दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से ले जाए गए मजदूर - फोटो : अमर उजाला
सपनों के शहर में उम्मीदें लेकर आए कामगार, उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे लगभग पांच हजार लोग शानिवार को बिहार वापस लौट गए। सरकार और प्रशासन के प्रयास से दादरी और दनकौर से शनिवार को बिहार के औरंगाबाद, सासाराम (रोहतास), बख्सर और सिवार के लिए चार विशेष ट्रेन रवाना हुईं। देखें तस्वीरें...
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52 दिन बाद उम्मीदों की ट्रेन में सवार हुए लगभग 5000 श्रमिक, लौटे बिहार

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दादरी और दनकौर से रेलवे स्टेशन ले जाए गए मजदूर - फोटो : अमर उजाला
प्रत्येक ट्रेन में लगभग 1500 यात्रियों की संख्या निर्धारित की गई थी। लेकिन यात्री समय पर नहीं पहुंचे, इसके चलते सभी ट्रेनों को देरी से रवाना करना पड़ा। इस दौरान पुलिस आयुक्त आलोक सिंह समेत पुलिस-प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और रेलवे के कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी यात्रियों को भोजन पानी आदि का बंदोबस्त कराया गया।
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52 दिन बाद उम्मीदों की ट्रेन में सवार हुए लगभग 5000 श्रमिक, लौटे बिहार

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दादरी और दनकौर से रेलवे स्टेशन ले जाए गए मजदूर - फोटो : अमर उजाला
अफसरों के कड़े प्रयास के बावजूद यात्रियों के इंतजार करने और कतार में लगने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन भी देखा गया। लेकिन यात्रियों ने सरकार और प्रशासन के स्पेशल ट्रेन चलाने को लेकर सराहना की। दनकौर से सिवान के लिए रवाना होने वाली चौथी ट्रेन में काफी अधिक यात्री पहुंचे हैं और  पुलिस-प्रशासन व्यवस्था बनाने के प्रयास में जुटा रहा। 

52 दिन बाद उम्मीदों की ट्रेन में सवार हुए लगभग 5000 श्रमिक, लौटे बिहार

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दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से ले जाए गए मजदूर - फोटो : अमर उजाला
सरकार और रेलवे मंत्रालय के निर्देश पर जिला प्रशासन ने दादरी से सुबह 11 बजे औरंगाबाद, दनकौर से दोपहर 12 बजे बख्सर और दादरी से दोपहर तीन बजे सासाराम और दनकौर से शाम चार बजे सिवान के लिए बिहार के प्रवासी मजूदरों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की थीं।
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दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से ले जाए गए मजदूर - फोटो : अमर उजाला
इन ट्रेनों में घर जाने वाले प्रवासियों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना था और प्रशासन की ओर से भेजे जाने वाले मैसेज को रेल का टिकट माना गया था। यात्रियों को निर्धारित समय से दो घंटे पहले पहुंचना था। इस व्यवस्था के बाद शनिवार को दिन निकलते ही बिहार के प्रवासी मजदूर अपने परिवार की महिला और बच्चों को लेकर दादरी व दनकौर रेलवे स्टेशन पर पहुंचना शुरू हो गए।
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दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से ले जाए गए मजदूर - फोटो : अमर उजाला
पुलिस-प्रशासन ने यात्रियों को घर भेजने के लिए दोनों स्टेशन पर कड़े बंदोबस्त किए थे। इसके अंतर्गत यात्रियों को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए कतार में खड़ा होकर चेकिंग आदि करानी थी। इसके बाद उन्हें ट्रेन एक सीट छोड़कर बैठते हुए भी सामाजिक दूरी का पालन करना था।
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दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से ले जाए गए मजदूर - फोटो : अमर उजाला
व्यवस्था इसी हिसाब से चल रही थी लेकिन दादरी में ट्रेन चलने के समय 11 बजने के बाद भी पूरे 1500 यात्री नहीं पहुंचे थे। इसके चलते अफसरों को अन्य मजदूरों के आने का इंतजार करना पड़ा। तब तक दूसरी ट्रेन में सवार होने के लिए भी मजदूर आना शुरू हो गए। इसके चलते उन्हें अस्थाई टैंट लगाकर वहां रोका गया।

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दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से ले जाए गए मजदूर - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन देखा गया। दनकौर में भी यात्री सुबह से पहुंचना शुरू हो गए लेकिन निर्धारित समय तक काफी कम लोग पहुंचे। इसके चलते ट्रेन केवल 656 यात्रियों को लेकर दो घंटे देरी से रवाना हुई। जबकि इस ट्रेन के लिए 1350 यात्रियों ने रजिस्ट्र्रेशन कराया था।
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दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से ले जाए गए मजदूर - फोटो : अमर उजाला
दादरी से सासाराम जाने वाले ट्रेन में 1524 यात्री रवाना हुए। दनकौर से सिवान जाने वाली ट्रेन में सफर के लिए निर्धारित से काफी अधिक संख्या में यात्री पहुंचे और पुलिस-प्रशासन को व्यवस्था बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। 
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