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खौफनाक मंजर: सीमापुरी सड़क हादसे का चश्मदीद बोला- कुचले पड़े थे करीम-शाहआलम, प्रदीप की टांगें टूटकर लटकी थीं

Wed, 21 Sep 2022 06:47 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सीमापुरी रोड एक्सिडेंट - फोटो : अमर उजाला
सीमापुरी हादसे के बाद वहां का मंजर बेहद खौफनाक था। जिसने भी हालात देखे उसके रौंगटे खड़े गए। सड़क पर कुछ लोगों की लाश पड़ी थी जबकि कुछ लोग दर्द से छटपटा रहे थे। सीमापुरी बस डिपो के पास नजदीक में ही एक पीसीआर वैन खड़ी थी। लोग भागकर वहां पहुंचे। 
 
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सीमापुरी रोड एक्सिडेंट - फोटो : अमर उजाला
इस बीच कुछ लोगों ने पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचना देने से पहले थाने को भी खबर दे दी। मौके पर थाने की ईआरवी वैन भी पहुंच गई। मौके पर स्ट्रीट लाइट का खंभा गिरा हुआ था। इसके अलावा हताहत हुए लोगों के बिस्तर भी वहां बिखरे पड़े थे। खबर मिलते ही जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। लोगों का कहना था अंदर झुग्गियों में गर्मी रहने की वजह से पुरुष सदस्य बाहर फुटपाथ या डिवाइडर पर आकर सो जाते थे। मंगलवार देर रात जब हादसा हुआ लोग एक लाइन से पतले से डिवाइडर पर अपनी जान जोखिम में डालकर सो रहे थे।
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सीमापुरी रोड एक्सिडेंट - फोटो : अमर उजाला
मौके पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि देर रात को वह घटना स्थल के नजदीक रिक्शा के पास खड़ा होकर अपने जानकार से बातचीत कर रहा था। अचानक उसने तेज ब्रेक लगने की आवाज सुनी। जैसे ही उसने सामने देखा तो एक तिरपाल चढ़ा ट्रक डिवाइडर पर चढ़ता हुआ डीएलएफ टी-प्वाइंट की ओर भाग गया। युवक भागकर मौके पर पहुंचा तो उसने देखा कि करीम और शाहआलम कुचली हुई हालत में वहां पड़ा हुआ था। 

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सीमापुरी रोड एक्सिडेंट - फोटो : अमर उजाला
मनीष के हाथ पर ट्रक चढ़ा हुआ था जबकि प्रदीप की दोनों टांगे टूटकर लटकी हुई थी। इस बीच शोर मच गया और लोग झुग्गियों से निकलकर इकट्ठे हो गए। बाद में पुलिस की टीमें वहां पहुंची तो धीरे-धीरे सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में वहां सो रहे तीन से चार लोग बाल-बाल बच गए। 
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सीमापुरी रोड एक्सिडेंट - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय निवासी रहीम ने बताया कि झुग्गियों में रहने वाले ज्यादातर लोग कूड़ा बीनने का काम करते हैं। रात को सीमापुरी और आसपास के इलाकों में कूड़ा बीनने के बाद उसको बोरों में इकट्ठा कर लिया जाता है। अपने इकट्ठे किए गए सामान को यह लोग पास में ही रखकर फुटपाथ या डिवाइडर पर सो जाते हैं। सुबह होते ही सामान को बेच दिया जाता है। एक महिला ने बताया कि कई बार लोगों से अपने घर आकर ही सोने के लिए कहा गया, लेकिन वह खुले में सोने के कारण सड़क पर ही सो जाते थे।
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