भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे के आंदोलन और नेताओं से मिली चुनौती के बाद केजरीवाल ने तय किया कि वो राजनीति करेंगे और दिखा देंगे कि जब आम आदमी राजनीति करने उतरता है तो बाकी लोगों का क्या अंजाम होता है। 2015 में दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी ने सीटों का ऐसा आंकड़ा छुआ कि इतिहास ही बना दिया। 70 में से 67 सीटें जीत कर उन्होंने बड़े-बड़े राजनीतिकों और विश्लेषकों को सकते में डाल दिया। लेकिन दो साल के भीतर ही पार्टी का ग्राफ तेजी से गिरने लगा। हाल ही में हुए पंजाब, गोवा विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार और दिल्ली में राजौरी गार्डन उप-चुनाव में आप उम्मीदवार की जमानत जब्त होने के बाद रविवार को हो रहे नगर निगम चुनाव ने पार्टी के अस्तित्व के लिए ही खतरा पैदा हो गया है। सूत्रों की मानें तो तीनों नगर निगमों का चुनावी नतीजा दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए ताबूत की आखिरी कील साबित हो सकता है। आइए जानते हैं क्या हैं वो कारण जो केजरीवाल सरकार के लिए बन रहे हैं खतरा...
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अरविंद केजरीवाल
सत्ता में आने के बाद केजरीवाल सरकार ने अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया जिसे चुनाव आयोग में चुनौती दी गई। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केजरीवाल सरकार से इस पर जवाब मांगा है जिस पर आयोग का फैसला आना बाकी है। माना जा रहा है कि निगम चुनाव के बाद किसी भी वक्त आयोग अपना फैसला सुना सकता है।
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इसके साथ ही साथ राजौरी गार्डन उप-चुनाव में हार के बाद आम आदमी पार्टी अपना एक विधायक पहले ही गवां चुकी है। साथ ही आम आदमी पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी के चलते आठ से ज्यादा विधायक असंतुष्ट हैं जो नगर निगम परिणाम आने के बाद पार्टी से अलगाव कर सकते हैं। यानि 21 विधायकों की सदस्यता रद्द होने और आठ विधायकों के बगावत के बाद आप विधायकों की संख्या में 29 की कमी हो सकती है जो फिलहाल 66 से घट कर 37 हो जाएगी।
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बीजेपी की लगातार जीत की श्रृंखला में अगर दिल्ली नगर निगम चुनाव के नतीजे भी उनके पक्ष में आते हैं (दिल्ली के तीनों नगर निगम पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है) तो विरोधियों के लिए आप विधायकों को अपनी ओर खिंचना ज्यादा आसान हो जाएगा। साथ ही बीजेपी का राजनीतिक भविष्य भी आप विधायकों को आकर्षित कर सकता है। ऐसे में नगर निगम चुनाव परिणाम के बाद दिल्ली की आप सरकार को अल्पमत में लाना ज्यादा आसान हो जाएगा।
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योगेंद्र यादव
- फोटो : SELF
इसके अलावा योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के राजनीति में आने के बाद इस बात की संभावना बढ़ी है कि आप में कुछ असंतुष्ट विधायक और नेता ऐसे भी हैं जो किसी भी समय योगेंद्र यादव की स्वराज इंडिया पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
इसके साथ ही साथ दिल्ली में आम आदमी पार्टी की घटती लोकप्रियता के साथ उनके नेताओं का भ्रष्टाचार से लेकर अन्य मामलों में फंसना इस बात की ओर साफ संकेत है कि किसी भी वक्त इन नेताओं की सदस्यता भी जा सकती है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि नगर निगम चुनाव परिणाम के बाद केजरीवाल अपनी पार्टी और दिल्ली की सरकार बचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।