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इन 5 कारणों के चलते बीजेपी ने दिल्ली में कर दिया सबका सूपड़ा साफ

Wed, 26 Apr 2017 06:39 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली में एमसीडी चुनावों परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश में अभी मौसम ऐसा ही है जो कमल को खिलने के लिए पूरी तरह मुफीद है। दिल्ली के नगर निगम में पिछले दस साल से राज करने के बावजूद एक ‌बार फिर बीजेपी ने पहले से ज्यादा सीटों पर कब्जा जमाया है। ये हैं वो कारण जो बीजेपी के कमल को खिलाने में कर रहे हैं मदद...
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एमसीडी इलेक्शन - फोटो : सोशल मीड‌िया
1- मोदी फैक्टर: 2014  के आम चुनाव के बाद होने वाले लगभग सभी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनके चमत्कारी व्यक्तिव को दिया है। दिल्ली नगर निगम चुनावों के बाद भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सहित दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी तक ने इस जीत के लिए पीएम मोदी की लीडरशिप को सबसे बड़ा फैक्टर माना है।
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2- 'आप' की नकारात्मक राजनीति: दिल्ली नगर निगम पर पिछले दस साल से बीजेपी का कब्जा है और अगर बीजेपी पार्षदों के काम मूल्यांकन किया जाए तो आम से लेकर खास तक सभी ये मानते हैं कि इस दौरान नगर निगमों का काम निराशाजनक ही रहा है। इसके बावजूद बीजेपी को इस चुनाव में 2012 के बदले ज्यादा सीटें मिली क्योंकि दिल्ली की सत्ता पर पिछले दो साल से काबिज आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में फैलने वाली गंदगी से लेकर डेंगू और चिकगुनिया तक के लिए बीजेपी को दोषी ठहराने का काम किया। आम आदमी पार्टी की इस नकारात्मक राजनीति का फायदा भी बीजेपी को ही मिला।

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एग्जिट पोल के नतीजों में बीजेपी की आंधी
3- सभी सीटों पर खड़े किए नए उम्मीदवार: दिल्ली प्रदेश भाजपा ने नगर निगम चुनाव से ठीक पहले एक बड़ी घोषणा करते हुए सबकों चौंका दिया कि पहले से काबिज किसी भी पार्षद या उनके रिश्तेदार को एमसीडी चुनाव में टिकट नहीं दिया जाएगा। पार्टी ने 270 सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा जिन्होंने जितने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी जिसका नतीजा सबके सामने है।
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mcd election - फोटो : अमर उजाला
4- प्रचार के लिए बनाई खास रणनीति : भारतीय जनता पार्टी शुरू से ही अपनी रणनीति में तकनीकी को प्राथमिकता देती रही है और स्‍थानीय स्तर का चुनाव होने के बावजूद पार्टी ने दिल्ली में जो वाररूम बनाया उसमें 18 ऐसे युवाओं को जगह दी जो तकनीकी के माहिर थे। इस टीम ने दिल्ली के प्रत्येक नागरिक से सीधे जुड़ने के लिए खास रणनीति बनाई जिसमें वो काफी हद तक कामयाब भी हुई।
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mcd election - फोटो : अमर उजाला
5- मनोज तिवारी का चला करिश्मा: दिल्ली में दशकों से राजनीति कर रहे बीजेपी के सीनियर नेताओं की अनदेखी करते हुए पार्टी ने 2014 में दल में शामिल हुए मनोज तिवारी को पार्टी का नेतृत्व सौंपने का रिस्क लिया। बता दें कि ऐसा ही रिस्क पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भी लिया था जब किरण बेदी को पार्टी ने सीएम कैंडीडे घोषित कर सबकों चौंका दिया था। हालांकि उस चुनाव में पार्टी को मुंह की खानी पड़ी थी बावजूद इसके पार्टी ने अपना प्रयोग जारी रखा और एक बार फिर से नए चेहरे पर भरोसा दिखाया। माना जाता है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में यूपी-बिहार के लोग रहते हैं जिनके बीच मनोज तिवारी काफी लोकप्रिय हैं। पूर्वांचली उम्मीदवारों को आकर्षितक करने में मनोज तिवारी के जादू ने भी पार्टी के हित में काम किया। 
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