तिहाड़ के बाहर खड़े लोग
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जैसे ही दोषियों को फांसी शुक्रवार सुबह 5.30 बजे दिए जाने की सूचना मिली, मैं तत्काल तिहाड़ जेल पहुंचा। पूर्व सैनिक ने बताया कि घटना के चंद मिनट बाद मैं महिपालपुर के पास से गुजर रहा था। अचानक बचाओ, बचाओ की आवाज सुनने के बाद जब मैंने बाइक खड़ी की तो देखा झाड़ियों में एक युवती बेहद गंभीर हालत में कराह रही थी, लेकिन मुझे इस बात का मलाल रह गया कि निर्भया को नहीं बचाया जा सका।