फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिस शख्स ने सबसे पहले निर्भया को गंभीर हालत में देखा था उसने दोषियों की फांसी पर क्या कहा?

Fri, 20 Mar 2020 08:44 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
तिहाड़ जेल के बाहर दोषियों की फांसी पर जश्न मनाते लोग - फोटो : अमर उजाला
निर्भया के दोषियों को फांसी देने में शायद इतनी देरी नहीं होती, अगर सभी दोषियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होती। अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने की वजह से सुनवाई में वक्त लगा, लेकिन सात साल बाद दरिंदों को फांसी दिए जाने के बाद देशभर के हजारों लोगों को सुकून मिला है। पूर्व सैनिक राजकुमार को इस बात का सुकून है कि निर्भया के साथ हुई दरिंदगी के बाद सबसे पहले उसकी हालत को देखने वाले अब गुनहगारों की फांसी के वक्त भी जेल के बाहर गवाह बने।
 
विज्ञापन

2 of 5
तिहाड़ के बाहर बैनर लेकर खड़े लोग - फोटो : अमर उजाला
16 दिसंबर, 2012 की रात वहशीपन की सारी हदें पार कर निर्भया को दरिंदों ने सड़क के पास फेंक दिया था। इस दौरान गुरुग्राम टोल प्लाजा से लौटते हुए सबसे पहले निर्भया को गंभीर हालत में देखने वाले शख्स पूर्व सैनिक राजकुमार ने बताया कि मेरी ख्वाहिश थी कि इन दोषियों को फांसी की सजा का भी मैं भी गवाह बनूं।
विज्ञापन

3 of 5
तिहाड़ के बाहर खड़े लोग - फोटो : अमर उजाला
जैसे ही दोषियों को फांसी शुक्रवार सुबह 5.30 बजे दिए जाने की सूचना मिली, मैं तत्काल तिहाड़ जेल पहुंचा। पूर्व सैनिक ने बताया कि घटना के चंद मिनट बाद मैं महिपालपुर के पास से गुजर रहा था। अचानक बचाओ, बचाओ की आवाज सुनने के बाद जब मैंने बाइक खड़ी की तो देखा झाड़ियों में एक युवती बेहद गंभीर हालत में कराह रही थी, लेकिन मुझे इस बात का मलाल रह गया कि निर्भया को नहीं बचाया जा सका।

4 of 5
तिहाड़ के बाहर खड़े लोग - फोटो : अमर उजाला
बचाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ नारेबाजी
सुबह 5.30 बजे जब निर्भया के गुनाहगारों को फांसी दी गई, उस वक्त उसे बचाने के लिए अलग-अलग तिकड़म लगाने वालों के खिलाफ लोगों ने नारेबाजी की। दोषियों को इस बात की तो खुशी थी कि निर्भया को न्याय मिला, लेकिन सभी के चेहरे पर सजा में देरी का दर्द दिखा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
स्वाति मालिवाल
वहीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने निर्भया के दरिंदों को फांसी दिए जाने पर खुशी जताते हुए इसे पूरे देश की जीत बताई है। उन्होंने विश्वास जताया कि अब देश में एक कठोर सिस्टम बनाने की जरूरत है जिससे समाज की सोच में बदलाव आएगा। स्वाति मालीवाल ने कहा कि सात साल के लंबे इंतजार के बाद आज न्याय की जीत हुई। निर्भया की मां ने न्याय के लिए दर दर की ठोकर खाई। दोषियों को सजा दिलाने के लिए सारा देश सड़क पर उतरा, अनशन किया और लाठी खाई। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें