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पहले और अब: तस्वीरों में देखिए खाने की थाली ने कैसे कम की अन्नदाता और सरकार के बीच की दूरी

Wed, 30 Dec 2020 08:00 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खाने की थाली ने मिटाई दूरियां - फोटो : ANI
कृषि कानूनों के विरोध में बीते 35 दिनों से हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं। शीतलहर और घटता तापमान भी उनका हौसला नहीं तोड़ सका। बुधवार को सरकार और किसानों के बीच सातवें दौर की वार्ता हुई। इस दौरान भोजनावकाश के समय एक बार फिर सभी की नजरें किसानों और सरकार पर टिकी रही। आईए तस्वीरों में देखें कि खाने की थाली ने अन्नदाता और सरकार के बीच की दूरियों को कैसे कम कर दिया है-

 
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सरकार के खाने को किसानों ने ठुकराया - फोटो : अमर उजाला
हालांकि बैठक की सफलता और असफलता पर ही इस आंदोलन का भविष्य टिका है। लेकिन पिछली बार भोजनावकाश पर किसानों ने अनोखे अंदाज में विरोध किया था, वहीं इस बार सरकार के प्रतिनिधियों ने किसानों के साथ उनके ही अंदाज में दूरियों को कम करने का प्रयास किया।

 
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अपना खाना खाते किसान - फोटो : ANI
सबसे पहले जब दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों और सरकार के बीच बातचीत हुई थी तो किसानों का गुस्सा साफ देखा जा सकता था। किसान अपनी मांगों को लेकर इतने अडिग और सरकार से इतने नाराज थे कि उन्होंने सरकार द्वारा दिए गए भोजन और चाय तक को स्वीकार नहीं किया था।

 

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कृषि मंत्री ने किसानों संग खाया खाना - फोटो : ANI
उस समय किसानों ने विज्ञान भवन में स्पष्ट कहा था कि लंच ब्रेक में सरकार ने हमें खाने और चाय का ऑफर दिया था लेकिन हमने मना कर दिया और अपने साथ ले जाए गए लंगर के खाने को ही खाया। इसके बाद कई तस्वीरें सामने आईं जिसमें किसान नेता अपने खानों को आपसे में बांटकर खाते नजर आए।

 
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कृषि मंत्री ने किसानों संग खाया खाना - फोटो : ANI
इसके बाद सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। आज सातवें दौर में सरकार ने उनकी चार में से दो मांगों पर स्वीकृति दे दी है। बैठक तो देर शाम को खत्म हुई, लेकिन दोपहर के भोजन के समय का नजारा पहले दौर की वार्ता से बिल्कुल भिन्न नजर आया। 

 
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कृषि मंत्री ने किसानों संग खाया खाना - फोटो : अमर उजाला
इस बार सरकार के प्रतिनिधि भी किसानों के साथ ही खाना खाते नजर आए। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और नरेंद्र सिंह तोमर ने भोजनावकाश में किसानों के साथ भोजन किया। कुछ इसी तरह खाने की थाली ने दोनों पक्षों के बीच की दूरियों को कम करने का काम किया। उम्मीद जताई जा रही है कि चार जनवरी को होने वाली अगली बैठक में इस आंदोलन की समाप्ति का रास्ता निकल सकता है।
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