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Delhi Blast: डॉ. उमर को लेकर साथी डॉक्टरों का खुलासा, अल फलाह ने दे रखी थी पूरी छूट; न इलाज करने आता न पढ़ाने

Wed, 19 Nov 2025 03:30 AM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद

सार

अमर उजाला से बातचीत में यूनिवर्सिटी के दो डॉक्टरों ने एक अन्य चौंकाने वाला खुलासा किया है। इन्होंने बताया कि डॉ. उमर की ड्यूटी हमेंशा इवनिंग या नाइट शिफ्ट में ही अस्पताल में लगाई जाती थी। उन्हें कभी भी मॉनिंग शिफ्ट में ड्यूटी दी ही नहीं गई। 
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डॉ. उमर नबी - फोटो : अमर उजाला
अल फलाह यूनिवर्सिटी का यदि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल से कोई संपर्क नहीं था तो दिल्ली में बम धमाका करने वाले डॉ. उमर को इतनी छूट यहां क्यों दी जा रही थी। अमर उजाला ने यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर यहां अप्रेंटिस कर रहे दो डॉक्टरों से बात की। 
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आतंकी उमर - फोटो : वीडियो ग्रैब
उमर शुरू से ही बेहद कम क्लास लेता था
डॉक्टरों ने कहा कि डॉ. उमर शुरू से ही बेहद कम क्लास लेता था। वो सप्ताह में एक या दो लेक्चर ही लेता और वो भी अधिकतम 15-20 मिनट में खत्म कर वापस अपने रूम में चला जाता था। डॉक्टरों ने बताया कि अन्य लेक्चरार ऐसा नहीं करते थे, वो पूरी समय क्लास लेकर ही बाहर निकलते थे।
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डॉ. उमर - फोटो : अमर उजाला
डॉ. उमर की अस्पताल में होती थी नाइट शिफ्ट
अमर उजाला से बातचीत में यूनिवर्सिटी के दो डॉक्टरों ने एक अन्य चौंकाने वाला खुलासा किया है। इन्होंने बताया कि डॉ. उमर की ड्यूटी हमेंशा इवनिंग या नाइट शिफ्ट में ही अस्पताल में लगाई जाती थी। उन्हें कभी भी मॉनिंग शिफ्ट में ड्यूटी दी ही नहीं गई। ये शिफ्ट शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक और रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक वाली होती थी। 

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दिल्ली में धमाके का मुख्य आरोपी डॉ. उमर। - फोटो : अमर उजाला
कॉल करने पर ही आता था इलाज करने 
डॉ. उमर ड्यूटी पर आता ही नहीं था। जब भी कोई मरीज उनकी ड्यूटी टाइम में अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होता तो उन्हें अक्सर कॉल कर ही बुलाना पड़ता था। बार-बार कॉल करने के बाद ही डॉ. उमर अस्पताल में पहुंचकर इलाज करता। कुछ मिनट रुकने के बाद अन्य सहायक स्टॉफ को निर्देश देकर वो वापस अपने कमरे में चला जाता था।



 
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AL-Falah University - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
जब छह महीने के लिए अस्पताल से चला गया था डॉ. उमर
डॉक्टरों ने बताया कि साल 2023 के दौरान लगभग छह महीने के लिए डॉ. उमर अस्पताल से चला गया था। इस दौरान किसी को भी ये नहीं पता चला कि वो कहां गया है। लगभग छह महीने बाद उसने अस्पताल लौटकर वापस से ड्यूटी जॉइन कर ली थी। जूनियर व छात्र होने के चलते ये तो किसी से पूछ नहीं सकते थे कि आखिर वो गया कहां। डॉ. उमर व मुज्जमिल के अन्य बैचमेट सीनियर डॉक्टरों को भी उसके आने-जाने की जानकारी नहीं थी।
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