अल-फलाह यूनिवर्सिटी से शुरू हुए सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के डॉक्टरों के बैंक खातों की जांच शुरू हो गई है। मेवात के एजेंट के जरिये दिल्ली के हवाला नेटवर्क से इनके पास रकम पहुंचाई जा रही थी। खुफिया विभाग के एक आधिकारिक सूत्र ने बड़ा खुलासा किया है।
फरीदाबाद के धौज स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से शुरू हुए सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल को फंडिंग हवाला नेटवर्क के जरिये पहुंच रही थी। ये फंडिंग हवाला नेटवर्क के जरिये ही यूनिवर्सिटी से पकड़े गए और अभी भागे हुए डॉक्टरों तक पहुंचाई जा रही थी। खुफिया विभाग के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि डॉक्टरों के बैंक खातों की ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। उनके खातों में बीते कुछ महीनों के दौरान हुई ट्रांजेक्शन को चेक किया जा रहा है।
एक अधिकारी ने बताया कि हवाला का बड़ा नेटवर्क दिल्ली में सक्रिय है। इस मामले में जांच एजेंसी को इनपुट मिला है कि डॉ. मुज्जमिल, डॉ. उमर और डॉ. शाहीन दिल्ली के नेटवर्क के संपर्क में सीधे तौर पर नहीं थे।
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शाहीन
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
डॉ. शाहीन से हुआ था सबसे पहले एजेंट का संपर्क
ये सभी लोग मेवात के एक एजेंट के जरिये दिल्ली के हवाला नेटवर्क के संपर्क में आए थे। एजेंट ही इनको टेरर फंडिंग के लिए हवाला से आ रहे रुपये लाकर मुहैया कराता था। इनमें सबसे पहले एजेंट का संपर्क डॉ. शाहीन से हुआ था। बाद में डॉ. मुज्जमिल और कुछ दिन पहले ही डॉ. उमर से एजेंट का संपर्क हुआ।
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डॉ. मुजम्मिल की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
लॉजिस्टिक से लेकर हर तरह के खर्च में काम आती है टेरर फंडिंग की ये रकम
आधिकारिक सूत्र ने बताया टेरर फंडिंग की ये रकम आतंकी मॉड्यूल से जुड़े आरोपी लॉजिस्टिक से लेकर हर तरह के खर्च में प्रयोग करते हैं। अधिकारी ने उदाहरण देकर बताया कि दिल्ली धमाके से पहले अमोनियम नाइट्रेट खरीदने के लिए, बम धमाके में इस्तेमाल कार के लिए, धमाके के लिए अन्य सामान खरीदने के लिए रुपयों की जरूरत रहती है। बार-बार रेकी करने जाने के लिए, कुछ अन्य सामान खरीदने में होने वाले खर्च सभी इन्हीं रुपयों से किए जाते हैं।
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डॉ. मुजम्मिल अहमद की मां अपने बेटे का तस्वीर दिखाते हुए।
- फोटो : बसित जरगर
डायरी में मिले 30 से अधिक नाम व नंबर की भी हो रही जांच
जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि डॉ. मुज्जमिल के कमरे से उन्हें एक डायरी के अलावा लैपटॉप समेत अन्य सामान मिला। उस पर जांच चल रही है। उस डायरी में 30 से अधिक लोगों के नाम व मोबाइल नंबर लिखे हुए हैं। इसके साथ ही कई नाम के आगे कुछ रकम भी लिखी हुई है।
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अल फलाह यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
इस लिस्ट के आधार पर मोबाइल नंबरों के जरिये जांच कर पता लगाया जा रहा है कि ये कौन लोग हैं और देश के किस हिस्से में एक्टिव है। ये भी शक है कि जिन कुछ नामों के आगे रकम लिखी हुई है, उन्हें आतंकियों की टेरर फंडिंग की रकम पहुंचाई गई है।
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अल-फलाह यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर कसा शिकंजा, पटवारियों ने शुरू की जमीन की पैमाइश
सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का लिंक सामने आने के बाद धौज स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर प्रशासन ने भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को पटवारियों की एक टीम यूनिवर्सिटी पहुंची और यहां जमीन की पैमाइश की। टीम ने मौके पर जांच के दौरान ये पता लगाने का प्रयास किया कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने गांव की कुछ सरकारी जमीन पर तो कब्जा नहीं किया है।
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AL-Falah University
- फोटो : ANI (फाइल फोटो)
शुक्रवार सुबह ब्रेजा कार में सवार होकर दो पटवारियों की टीम यहां पहुंची और कई घंटे तक जांच की। इसके बाद टीम यहां से लौट गई। एक सूत्र ने बताया कि अभी ये टीम आला अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। इसके बाद ही ये स्पष्ट हो सकेगा कि यूनिवर्सिटी ने कुछ जमीन पर कब्जा किया है या नहीं। यदि जमीन पर कब्जे की बात सामने आई तो प्रशासन का दस्ता यहां तोड़-फोड़ कार्रवाई कर अपनी जमीन खाली भी करा सकता है।
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अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग
- फोटो : अमर उजाला
पंचायत ने लगाया आरोप यूनिवर्सिटी पर गांव की सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप धौज गांव की पंचायत ने भी लगाया हुआ है। पंचायत की ओर से लगभग 6 महीने पहले ही अदालत में याचिका भी दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी ने गांव टीकरी खेड़ा और गांव धौज के बीच 22 मीटर चौड़ी सड़क के लगभग एक किलोमीटर के हिस्से पर कब्जा कर निर्माण कर लिया है। पूर्व के सरपंचों के साथ मिलकर इसे 78 एकड़ के कैंपस में मिलाने का आरोप है।
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अल फलाह यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
यूनिवर्सिटी लगभग 78 एकड़ में फैली है। साल 2014 में यूनिवर्सिटी बनने से पहले साल 1997 में अल-फलाह फाउंडेशन की ओर से यहां इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू किया गया। साल 2016 में मेडिकल की पढ़ाई शुरू हुई। 2019 में पहला बैच आया और बाद में पैरामेडिकल के कोर्स भी शुरू हो गए। साल 2021 में इंजीनियरिंग का आखिरी बैच यहां रहा और उसके बाद इंजीनियरिंग में दाखिले बंद हो गए।
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अल फलाह यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
यूनिवर्सिटी में अब तक रहे पुराने डॉक्टरों का डाटा खंगाल रही टीम
अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सामने आए सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल में जांच एजेंसी मौजूदा डॉक्टरों व स्टॉफ के अलावा पुराने लोगों को भी चेक कर रही है। शुक्रवार को जांच कर रही टीम ने यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचकर ये पता लगाया कि यहां पहले कौन डॉक्टर व स्टॉफ काम कर चुके हैं।
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अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग
- फोटो : अमर उजाला
इसमें टीम ने पूछा कि वे लोग कितने समय पहले यहां से छोड़कर जा चुके हैं। उनके यहां से छोड़ने के कारण का भी पता किया गया कि वे किन कारणों से छोड़कर गए और वे कहां के रहने वाले थे। सभी के नाम, नंबर, निवास स्थान और यूनिवर्सिटी परिसर में कार्यरत रहने के दौरान उनके पद के अनुसार डिटेल ली गई है।
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संदिग्ध डॉ. मोहम्मद उमर
- फोटो : पीटीआई
जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो ये शक है कि यहां पहले कार्यरत रह चुके कुछ लोग भी इस आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा हो सकते हैं। इनमें डॉक्टर, छात्र या अन्य पदों पर कार्यरत सभी तरह के लोग शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को यूनिवर्सिटी परिसर से मिली लिस्ट में जम्मू कश्मीर के लोगों की संख्या काफी अधिक है।
इनमें डॉक्टर, प्रोफेसर, छात्र व अन्य पदों पर काम करने वाले लोग शामिल हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ भी ये लिस्ट जांच एजेंसी ने साझा की है ताकि वो इसे वेरिफाई कर सकते हैं।