फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dhanteras 2019: अपनी राशि के अनुसार करेंगे खरीदारी तो बरसेगी लक्ष्मी, खरीदी गई चीज 13 गुना बढ़ेगी

Fri, 25 Oct 2019 10:46 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 9
- फोटो : Twitter
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को धनतेरस से दिवाली के पंचपर्व की शुरुआत मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से त्रयोदशी को ही धन्वंतरि अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे। इस वजह से इस दिन बरतन एवं धातु खरीदने का रिवाज है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को उनका जन्मदिन माना जाता है और माता लक्ष्मी और कुबेर के साथ ही भगवान धन्वंतरि भी पूजे जाते हैं। मान्यता है कि धनतेरस पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने से उन्नति होती है और खरीदी गई चीज में 13 गुना की बढ़ोतरी होती है। अपनी राशि के अनुसार जानिए किस चीज की करनी है खरीदारी और लक्ष्मी-गणेश की किस रंग की मूर्ति लानी है...
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 9
dhanteras - फोटो : amar ujala
जलाएं दीप कि जीवन जगमगाए: ज्योतिषाचार्य गुंजन वार्ष्णेय कहती हैं कि धनतेरस से प्रतिदिन पंचपर्व भैया दूज तक लगातार घर के मंदिर सहित रसोई में भी दीपक जलाने से आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ स्वास्थ्य सुख भी प्राप्त होता है। धनतेरस पर खरीदारी के लग्न के अनुसार शुभ घड़ियां होती हैं और इन घड़ियों में  खरीदारी करने से शुभ ही शुभ होता है, क्योंकि इन घड़ियों में लक्ष्मी निवास करती हैं। खरीदारी के लिए चार घड़ियां हैं।

1- सूर्योदय से लेकर सुबह 10.40 बजे तक
2- दोपहर 12.05  से लेकर  02.53 बजे तक
3- शाम 04.17  से लेकर 05.42 बजे तक
4- रात 09.00  से लेकर 10.30 बजे तक
विज्ञापन

3 of 9
धनतेरस पर सजे बाजार - फोटो : अमर उजाला

राशि के अनुसार खरीदारी घर में लाएगी शुभता:

धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तु स्थायी रूप से रहती है। हालांकि लोग अपनी सामर्थ्य अनुसार सोना, चांदी या अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदते हैं, अगर इस दिन सोना-चांदी के सिक्कों, गणेश-लक्ष्मी के साथ ही राशि स्वामी से संबंधित वस्तुओं का संग्रह किया जाए तो वर्षभर समृद्धि बनी रहती है। तो जानिए अपनी राशि के अनुसार खरीदारी और पाइए वर्षभर खुशहाली।

मेष - तांबे का बर्तन और मूंगे या लाल रंग से रंगी लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा।
वृष - चमकदार पालिश वाले बर्तन, चांदी या हीरा, सिल्वर रंग की लक्ष्मी- गणेश प्रतिमा।

4 of 9
शुभ धनतेरस - फोटो : अमर उजाला
मिथुन - कांसे का बर्तन और हरे रंग से रंगी लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा।
कर्क - चांदी के बर्तन, सिल्वर कलर के रंग से रंगी लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा।
सिंह - तांबा या गोल्डन पॉलिश के बर्तन, गोल्डन रंग से रंगी लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
विज्ञापन

5 of 9
Dhanteras shimla
कन्या - कांसे का बर्तन, श्री यंत्र और हरे रंग से रंगी लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा।
तुला - इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, चांदी के बर्तन और प्लास्टर ऑफ पेरिस की लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा।
वृश्चिक - तांबे का बर्तन, सोने के आभूषण, मूंगा या लाल रंग से रंगी लक्ष्मी गणेश- प्रतिमा।
विज्ञापन

6 of 9
नगर के सहादतपुरा बाजार में बर्तन की दुकान से खरीदारी करते लोग। - फोटो : mau
धनु - पीतल का बर्तन, स्वर्ण आभूषण, गोल्डन कलर या पीतल की लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा।
मकर - लोहे का बर्तन, नील या श्याम वर्ण की लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
कुंभ - भारी वाहन, मिश्रित धातु के बर्तन और अनेक रंगों में रंगी लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा।
मीन- पीतल का बर्तन, सोने चांदी के आभूषण, गोल्डन रंग में रंगी लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा।
विज्ञापन

7 of 9
धनतेरस - फोटो : dhanteras
खत्म हो जाता अकाल मौत का डर: स्कंद पुराण के अनुसार, इस दिन प्रदोष काल (शाम) में यमराज के नाम का दीप और नैवेद्य समर्पित करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। ज्योतिषाचार्य गुंजन वार्ष्णेय बताती हैं कि सूर्यास्त के पश्चात रात्रि के आने से पूर्व का समय प्रदोष काल कहलाता है। 25 अक्तूबर के दिन सूर्यास्त 5.21 बजे होगा। इस दिन दीपक का मुंह दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए।

8 of 9
diwali - फोटो : अमर उजाला
मिट्टी का यह बड़ा दीपक साफ पानी से धुला होना चाहिए। रुई से दो लंबी बत्तियां बना लें। उन्हें दीपक में एक-दूसरे पर आड़ी इस प्रकार रखें कि दीपक से बाहर बत्तियों के चार मुंह दिखें। दीपक में तिल का तेल डालें और कुछ काले तिल भी डाल दें। इस दीपक का रोली, चावल और फूल से पूजन करें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार के बाहर खील या गेहूं की छोटी ढेरी बनाएं।
विज्ञापन

9 of 9
- फोटो : diwali 2019
इसके साथ मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह। त्रयोदश्यां दीपदनात् सूर्यजरू प्रीयतामिति। मंत्र बोलते हुए दक्षिण दिशा की तरफ यह दीपक रख दें और हाथ में फूल लेकर ऊं यमदेवाय नम:। नमस्कारं समर्पयामि। मंत्र बोलते हुए दक्षिण दिशा की तरफ यमदेव को नमस्कार करें।

फूल को दीपक के पास रख दें और हाथ में एक बताशा लेकर ऊं यमदेवाय नम: नैवेद्यं निवेदयामि मंत्र जपते हुए उसे भी दीपक के पास रख दें। अब हाथ में थोड़ा सा जल लेकर ऊं यमदेवाय नम: आचमनार्थे जलं समर्पयामि मंत्र जपते हुए आचमन करें। अब एक बार फिर से यमदेव को ऊं यमदेवाय नम: कहते हुए दक्षिण दिशा में नमस्कार करें। इस तरह दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें