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नोटबंदी के 22 दिन बाद भी नहीं सुलझीं ये 11 परेशानियां 

Thu, 01 Dec 2016 10:05 AM IST
संजीव श्रीवास्तव/अमर उजाला, गुड़गांव
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- फोटो : लाल स‌िंह/अमर उजाला
नोटबंदी के 22 दिन बाद भले ही बैंकों और एटीएम के बाहर लगने वाली लाइनें कम होती दिख रही हों लेकिन, लोगों की परेशानी अभी भी जस की तस बनी हुई है। साइबर सिटी के नाम से पहचान रखने वाले गुरुग्राम से लेकर नूंह, बल्लभगढ़, फरीदाबाद के शहर से लेकर गांव कुछ ऐसे ही हालात बयां करते हैं। नोटबंदी के 22 दिन बाद भी इन जगहों पर ये 11 पेरशानियां दिखाई दीं...
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- फोटो : लाल सिंह
22 दिन बाद भी नए नोट के दर्शन दुर्लभ: देश की राजधानी से महज 100 किलोमीटर की दूरी में फैले इन गांवों में अभी भी ज्यादातर लोगों ने सरकार द्वारा जारी की गई 500 और 1000 की नए नोटों के दर्शन नहीं किए हैं। बल्लभगढ़ से फरीदाबाद को जाने वाले हाइवे पर ईंट के भट्टे पर काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि उन्हें अभी भी मजदूरी के तौर पर 500 के पुराने नोट ही मिल रहे हैं। यहां काम करने वाले किसी भी मजदूर ने अभी तक नई नोट देखी ही नहीं है।
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- फोटो : लाल सिंह
2. अभी भी चल रहे पुराने नोट: शहर सहित कस्बों और गांवों में अभी भी ज्यादतर लेन-देन 1000 और 500 के पुराने नोटों में ही हो रहा है। हालांकि शहरों में दुकानदार खुल कर इस बात को स्वीकार करने से मना कर देते हैं लेकिन गांवों में जाते ही आप इन नोटों का प्रचलन आसानी से देख सकते हैं। हालांकि 500 के बदले इन्हें तीन या चार सौ मिल रहे हैं जबकि 1000 की नोटों के बदले सात या आठ सौ रुपये ही दिए जा रहे हैं।
 

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- फोटो : लाल सिंह
3. खाद-बीज की दुकानों पर नहीं लिए पुराने नोट: नोटबंदी के बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि अस्पतालों मेडिकल स्टोर सहित सरकारी खादी और बीज की दुकानों पर पुराने नोट चलते रहेंगे ताकि किसानों को किसी तरह की पेरशानी न हो। इस बारे में सलंबा गांव के किसानों ने बताया कि सहकारी बीज व खाद की दुकानों पर भी पुराने नोट नहीं लिए जा रहे जिससे उन्हें खाद तक खरीदने में परेशानी हो रही है।
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- फोटो : लाल सिंह
4. काम छोड़कर लगना पड़ रहा लाइन में: गुड़गांव से नूंह जाते हुए हाइवे पर गांव पड़ता है जहां पिछले 14 दिनों से एटीएम में कैश नहीं डाला गया है।  यहां लाइन में लगे लोगों में से रौशन ने बताया कि कल भी वो अपनी दिहाड़ी छोड़कर लाइन में लगा लेकिन उसे पैसे नहीं मिले। उससे कहा गया कि आज पैसे मिल जाएंगे लेकिन आज भी आधा दिन बीत चुका है और पैसे अभी तक नहीं आए हैं। अपने ही पैसे निकालने के लिए उसे अपनी दो दिन की दिहाड़ी का नुकसान करना पड़ा है।
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- फोटो : लाल सिंह
5. बुजुर्ग और महिलाओं को नहीं मिल रही कोई राहत: नूंह में कचहरी के ठीक सामने सिंडीकेट बैंक के बाहर रोज पैसे लेने वालों की लंबी लाइन लगती है। पिछले तीन दिन से बैंक आ रहे 68 वर्षीय नूर मोहम्मद बताते हैं कि वो बीमार है और ठीक से बोल भी नहीं पाते लेकिन उन्हें पेंशन नहीं मिल पा रही है क्योंकि जब तक तक उनका नंबर आता है बैंक में पैसे ही खत्म हो जाते हैं। इस वजह से वो अपनी दवा भी नहीं ले पा रहे हैं। कोटला गांव से आए 68 वर्षीय अनीस खान को भी अभी तक नवंबर माह की पेंशन नहीं मिल पाई है। वो भी पिछले तीन दिन से बैंक की लाइन में लग रहे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
6. रोज कमाने-खाने वालों की बढ़ती जा रही परेशानी: पुरानी तहसील नूंह में छप्पर लगाकर टाइपिंग का काम करने वाले शाहिद बताते हैं कि नोटबंदी की घोषणा से पहले वो रोजाना तीन से चार सौर रुपये की कमाई कर लेते थे लेकिन पिछले बीस दिन से उनकी रोजाना की कमाई 50 रुपये से भी कम हो गई है।

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- फोटो : लाल सिंह
7. घटते जा रहे रोजगार: 20 दिन बाद भी कस्बों और गांवों तक नए नोटों की पहुंच न के बराबर हैं।  नोट की कमी ‌के खेतों से लेकर बढ़ई मजदूर तक को छुट्टी दे रखी है क्योंकि लोगों के पास इन्हें देने के लिए नए नोट हैं नहीं और पुराने नोट लेने से अब इन्होंने भी इनकार करना शुरु कर दिया है क्योंकि इसकी उन्हें पूरी कीमत नहीं मिल रही है। ऐसे में इन कामों से अपना पेट पालने वाले मजदूर वर्ग का रोजगार लगातार घटता जा रहा है।

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8. छुट्टे पैसों की कमी से बढ़ाई परेशानी: कुल मुद्रा में 1000 और 500 के पुराने नोटों की हिस्सेदारी 86 फिसदी थी जिसे चलन से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में लोग छोटी कीमत वाली कैरेंसी को खर्च करने में डरने लगे हैं। इन्हें वहीं खर्च किया जा रहा है जहां खर्चना मजबूरी है ऐसे में बाजारों में छुट्टे की भी कमी हो गई है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गुडगांव के सेक्टर 15 में दो भाई आपस में इसलिए लड़ पड़े क्योंकि एक ने 1000 के पुराने नोट का छुट्टा देने से मना कर दिया।

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- फोटो : लाल सिंह
9. मांग में लगातार हो रही गिरावट: गुड़गांव के सेक्टर 15 में शराब की दुकान चलाने वाले अवनीश पांडे बताते हैं कि नोटबंदी के बाद से उनकी दुकानदारी 50 फिसदी से भी कम हो गई है। उनका कहना है कि अब हम 1000 और 500 के पुराने नोट तो ले नहीं रहे और जिनके पास 100 के नोट हैं वो इन्हें शराब में खर्चने का रिस्क नहीं ले रहे।

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- फोटो : अमर उजाला
10. कैशलेस की सुविधा देने वाले दुकानदार हुए निराश: नोटबंदी के बाद कम से कम दिल्ली-गुड़गांव में कई छोटे दुकानदारों ने पेटीएम जैसे कैशलेस माध्यमों से भुगतान की सुविधा शुरु की लेकिन उसके प‌रिणाम ने उन्हें और भी परेशानी में डाल दिया है। गुड़गांव में ही मेडिकल स्टोर चलाने वाले राजेश गेरा बताते हैं कि हमने भले ही पेटीएम की सुविधा दे रखी है लेकिन 30 में से कोई एक ही कस्टमर ऐसा होता है जो इनके इस्तेमाल को जानता है या इसे सुरक्षित मानता है।
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- फोटो : लाल सिंह
​11. कैश के लिए जूझ रहे एटीएम और बैंक:  गुडगांव जैसे अत्याधुनिक शहर के सेक्टर 15 में बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के ब्रांच ऑफिस अगल-बगल हैं। इन दोनों बैंकों ने तीन-तीन एटीएम लगा रखे हैं। यानि दस मीटर से भी कम दूरी पर यहां छह एटीएम लगे हुए हैं और ये सभी एटीएम सरकारी बैंकों के हैं। सोमवार को पैसों के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग 65 वर्षीय यादराम ने बताया कि शनिवार और रविवार को बैंक बंद थे। आज इस उम्मीद से बैंक आए थे कि नए नोट मिल जाएंगे लेकिन छह के छह एटीएम में से किसी में पैसे नहीं हैं और बैंक वाले कह रहे हैं कि कैश खत्म हो गया है।
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