भीषम गर्मी से बेहाल हुए लोग
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वहीं, अगस्त में सूरज और बादलों के बीच लुकाछीपी का अधिक खेल चला। ऐसे में इस माह 41.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी, जबकि इस माह सामान्य तौर पर 233.1 मिमी बारिश होती है। ऐसे में करीब 82 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी। वहीं, सितंबर में अभी तक 8.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। आमतौर पर इस माह 39.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की जाती है। अभी भी करीब 77 फीसदी की कमी शेष है। मौसम विशेषज्ञ कहते हैं कि आगामी दिनों में भी अच्छी बारिश के संकेत नहीं हैं, जो इस माह की कमी को पूरा कर सके। इस वजह से संभावना है कि सितंबर भी सूखा बीत जाए। इस माह मानसून की भी वापस हो जाएगी।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार बार-बार बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब वाला क्षेत्र बना रहा। इसका अधिक असर मध्य भारत के गुजरात व मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों में देखने को मिला। यही वजह रही कि इन राज्यों में बाढ़ वाली स्थिति देखी गई। मानसूनी रेखा के जब उत्तर भारत की ओर बढ़ने का संकेत मिले, तब दोबारा बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब वाला क्षेत्र बन गया।