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निर्भया गैंगरेप कांड के चार साल बाद भी नहीं बदले दिल्ली के हालात

Fri, 16 Dec 2016 02:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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delhi streets - फोटो : कुमार संजय/अमर उजाला
16 दिसंबर 2012 से लेकर 15 दिसंबर 2016 तक चार वर्ष बीतने के बाद भी राजधानी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के हालात जस के तस हैं। हालांकि मुनिरका बस स्टॉप की सूरत बदली हुई नजर आ रही है, क्योंकि निर्भया गैंगरेप कांड की बरसी के चलते यहां खाकी और पीसीआर का पहरा बढ़ गया है। लेकिन खाकी पहरे के चंद कदमों की दूरी पर एक महिला ऑटो केे लिए भटकती नजर आई और शांति, सेवा व न्याय का दिल्ली पुलिस का नारा झूठा साबित हुआ। पुलिस को महिला की परेशानी नहीं दिखी।
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delhi streets - फोटो : कुमार संजय/अमर उजाला
वसंत विहार गैंगरेप की पीड़िता निर्भया ने मुनिरका के जिस बस स्टॉप से बस ली थी और महिपालपुर रूट पर जहां पीड़िता को बस से फेंका गया था, वहां के बस स्टॉप पर बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात दिखे। वहीं, अन्य इलाकों में सुरक्षा के नाम पर सन्नाटे के सिवा कुछ नहीं था। अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा और फोटोग्राफर कुमार संजय ने मुनिरका से महिपालपुर रूट और अन्य इलाकों का जायजा लिया, तो ऐसी स्थितियां नजर आईं। पेश है रिपोर्ट...
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delhi streets - फोटो : अमर उजाला
बस की टाइमिंग से परेशान यात्री
कृषि भवन बस स्टॉप : रात 8:30 बजे 
मंत्रालय में काम करने वाले संतोष पांडे रूट नंबर 781 और रूट नंबर 610 की बस का पिछले आधे घंटे से इंतजार कर रहे थे। संतोष का कहना था कि चार साल बेशक बीत गए हैं, लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कोई सुधार नहीं हुआ। मुझे अशोक होटल तक जाना है, लेकिन चंद किलोमीटर की दूरी के लिए देर शाम घंटों बस के इंतजार में परेशान होना पड़ता है।

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delhi streets - फोटो : कुमार संजय/अमर उजाला
यात्री के बीच सड़क आने पर रुकी बस
मुनरिका बस स्टॉप से 100 मीटर पहले : रात नौ बजे 
मुनिरका बस स्टॉप से करीब 100 मीटर पहले डीडीए फ्लैट मुनिरका बस स्टॉप पर पुलिस कर्मी अपने मोबाइल पर बिजी था। बस के इंतजार में रोजाना सफर करने वाले यात्री मनदीप पालम और एसके गुप्ता जनकपुरी के लिए बस की राह देख रहे थे। यात्रियों का कहना था कि 16 दिसंबर के चलते यहां दो दिन से पुलिस दिखाई दे रही है, जबकि अन्य दिन सन्नाटा पसरा होता है। इसी बीच रूट नंबर 778 की बस आती दिखी, तो मनदीप ने हाथ दिया। बस की स्पीड कम न होने पर वे बीच सड़क पहुंच गए। बीच सड़क ही अचानक ड्राइवर ने ब्रेक लगाई। अन्य यात्रियों का कहना था कि यहां तो बस रुकती ही नहीं। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चार साल में क्या बदलाव आया।
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delhi streets - फोटो : कुमार संजय/अमर उजाला
पुलिस और पीसीआर महज दिखावा, नहीं बदले हालात
मुनिरका मुख्य बस स्टॉप : रात 9.37 बजे (इसी समय निर्भया यहां से निजी बस में बैठी थी)
इसी मुनिरका मुख्य बस स्टॉप से 16 दिसंबर 2012 की रात 9.37 बजे निर्भया ने अपने दोस्त के साथ निजी बस पकड़ी थी। पिछले साल बस स्टॉप जहां मोमबत्ती व फूलों से अटा पड़ा था, वहीं इस बार यह सुनसान था। तीन पुलिस कर्मी यहां तैनात थे। रोजाना इसी बस स्टॉप से रात को घर जाने के लिए बस लेने वाले यात्री एसके वर्मा ने गुस्से में कहा कि पुलिस, पीसीआर व जांच महज दिखावा है। क्योंकि 16 दिसंबर की पूर्व संध्या पर मीडिया इस जगह की कवरेज करने आएगा। जबकि आम दिनों में यहां पुलिस कर्मी या पीसीआर दूर-दूर तक नहीं दिखती। एक अन्य यात्री गौरव ने कहा कि दो से तीन दिन देर शाम बसों की टाइमिंग समेत संख्या में भी इजाफा हो जाता है। क्योंकि इस रूट पर मीडिया की नजर रहती है। हालांकि आज भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कोई फर्क नहीं पड़ा है। इस रूट पर अभी भी रोजाना देर शाम को निजी बसें चलती हैं और यात्रियों को बैठाती हैं। हालांकि वसंत विहार गैंगरेप के बाद अदालत समेत सरकार ने ऐसी बसों पर रोक लगा दी थी। ऐसी बसों को जांचने के लिए कभी कोई अधिकारी या पुलिस नहीं आती।
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delhi streets - फोटो : कुमार संजय/अमर उजाला
ऑटो नहीं मिला, अब बस में जाऊंगी
वसंत विहार डिपो बस स्टॉप : रात 09:45 बजे  
मुनिरका निवासी कृति अपने भाई विकास के साथ बस का इंतजार कर रही थी। कृति का कहना था कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने के लिए ऑटो रोका पर कोई जाने को तैयार नहीं हुआ। सामने पीसीआर व पुलिस कर्मी हैं, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आता। हालांकि पुलिस की मुस्तैदी देख समझ में आ गया कि 16 दिसंबर के चलते मीडिया को दिखाने के लिए यह तामझाम है। पुलिस समेत सोसायटी में आज भी कोई बदलाव नहीं आया है।
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delhi streets - फोटो : कुमार संजय/अमर उजाला
चालक, परिचालक व गार्ड को नहीं पता कैसे करनी है मदद
महिपालपुर रूट : रात 10 बजे
रूट नंबर 764 की नजफगढ़ जाने वाली बस में होम गार्ड दीपक मिला, लेकिन खाली हाथ। उसके पास एक डंडा तक नहीं था, न ही हेल्पलाइन नंबर की जानकारी थी। सुरक्षा के नाम पर महिला की मदद के लिए किससे मदद और कैसे लेनी है, उसे इसकी जानकारी नहीं थी। जबकि वसंत विहार गैंगरेप मामले के बाद रात्रि बस सेवा में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ गाइडलाइन भी बनीं थीं, जिसमें चालक, परिचालक व होम गार्ड को बताया जाना था कि मुश्किल में महिला यात्री की मदद कैसे करनी है। डीटीसी ने बड़े जोर-शोर से ट्रेनिंग की बात भी की, लेकिन रात्रि पड़ताल में पता चला कि चालक, परिचालक व होम गार्ड सुरक्षा की जानकारी नहीं रखते हैं। बस में सवार यात्री भावना ने बताया कि बस थोड़ी सेफ है, लेकिन टाइमिंग सही न होने के चलते परेशानी आती है। खासकर बस स्टॉप पर बस का इंतजार करना मुश्किल होता है।
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संसद से चंद कदम दूर रकाबगंज गुरुद्वारा बस स्टॉप भी अंधेरे में डूबा
संसद के सामने : रात 10:15 बजे
संसद से चंद कदम दूर रकाबगंज गुरुद्वारा बस स्टॉप पर अंधेरा पसरा था। राजधानी के 70 फीसदी बस स्टॉप अंधेरे में डूबे नजर आए। महज नई दिल्ली और गैंगरेप वाले स्थल को छोड़कर अन्य में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं दिखे। दिल्ली सरकार का ट्रांसपोर्ट विभाग बस स्टॉप पर लाइट समेत मेंटेनेंस का खर्च देता है, फिर भी यहां अंधेरा रहता है। आउटर दिल्ली, ग्रामीण इलाके, पूवी दिल्ली, उत्तरी दिल्ली, मध्य दिल्ली, पुरानी दिल्ली, रोहिणी, द्वारका के इलाकों की सबसे अधिक शिकायतें यात्रियों ने डीटीसी हेल्पलाइन पर भेजी थी, जिसका कभी कोई हल नहीं निकला।
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