दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ताओं ने खास आर्थिक, सामाजिक तथा घनी आबादी को ध्यान में रखते हुए लोगों की लामबंद व हिंसा के लिए उत्तर पूर्वी दिल्ली को चुना था। यह दावा दिल्ली दंगों के सिलसिले में दाखिल आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस की ओर से किया गया है।
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- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली पुलिस का दावा है कि इस इलाके को इसलिए चुना गया क्योंकि यह दक्षिण पूर्वी दिल्ली के मुकाबले कहीं ज्यादा संवेदनशील है जबकि साजिशकर्ता पॉश कालोनियों के आलीशन घरों में टीवी सैट के सामने सुरक्षित बैठे रहे और दंगों की आंच रोज मेहनत कर रोजी रोटी कमाने वालों पर आई।
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दिल्ली पुलिस की ओर से 16 सितंबर को दाखिल आरोपपत्र में कई गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि स्थानीय निवासियों के विरोध के बावजूद उत्तर पूर्वी दिल्ली को लोगों को जमा करने के लिए चुना गया।
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दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप नाम से बनाया था व्हाट्सएप ग्रुप बनाया
दंगों की साजिश से जुड़े एक शख्स ने विरोध प्रदर्शन को सेक्युलर चेहरा देने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का काम किया था ताकि इसमें सिविल सोसाइटी के अधिक से अधिक लोग शामिल हों। यह दावा दिल्ली पुलिस ने दंगों की साजिश के सिलसिले में दाखिल आरोप पत्र में किया है।
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Violence in delhi
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उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगे सुनियोजित थे और 24 फरवरी की शाम से जामिया कॉर्डीनेशन कमेटी (जेसीसी) के सदस्यों की ओर से होने वाली संचार के तेवर बदल गए थे। वह एक ओर पीड़ितों के पुनर्वास तथा राहत की बात कर रहे थे तो वहीं दूसरी ओर सरकार, पुलिस तथा भाजपा को जान माल के नुकसान का जिम्मेदार बताते हुए भ्रामक संदेश फैला रहे थे।
दिल्ली पुलिस का दावा है कि साजिशकर्ताओं ने भड़काऊ भाषणों की असलियत छिपाने के लिए राष्ट्रवाद की लुभावनी बातों का इस्तेमाल किया था जबकि उनका मुख्य मकसद खास समुदाय को भड़काना तथा उसका दबदबा कायम करना था। इसके लिए दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था।