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आज के बाद इतिहास बन जाएगा 85 साल पुराना रीगल, आखिरी शो में देखिए राजकपूर की फिल्म

Thu, 30 Mar 2017 03:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजकपूर की फिल्म संगम होगा रीगल का आखिरी शो 
राजकपूर की फिल्म संगम का होगा रीगल में आज आखिरी शो 
-पब्लिक डिमांड पर बृहस्पतिवार को मेरा नाम जोकर और संगम फिल्म का शो, दोनों हाउसफुल 
-कनॉट प्लेस में 85 साल पुराना यह सिंगल स्क्रीन थियेटर अब मल्टीप्लेक्स बनेगा, मगर डिजाइन यही रहेगा
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दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस में करीब 85 साल के अपने सिनेमा और नाट्य मंच के सुनहरे दौर को समेटे रीगल बृहस्पतिवार रात को अपने आखिरी शो के साथ बंद हो जाएगा। रीगल का आखिरी शो अभिनेता राजकपूर की फिल्म संगम से होगा जिनकी फिल्मों का प्रीमियर कभी इसी सिनेमा हाल में होता था। रीगल सिनेमा के मैनेजर रूप घई ने बताया कि पब्लिक डिमांड पर आखिरी दो शो राजकपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर 6 बजे और संगम का शो रात 10 बजे होगा। इससे पहले नई फिल्म फिल्लौरी के दो शो दिन में चलेगा।
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एनडीएमसी ने नहीं दी मोहलत

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मल्टीप्लेक्स के इस दौर में जब सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर बंद हो रहे थे तब भी रीगल सिनेमा ने अपना अस्तित्व बचाए रखा। मगर नई दिल्ली नगर पालिका परिषद की ओर से संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणपत्र को लेकर जारी नोटिस के बाद संचालकों को इसे बंद करना पड़ा। संचालकों ने इसे मल्टीप्लेक्स बनाए रखने तक चलाना चाहते थे मगर एनडीएमसी की ओर से एक महीने की अतिरिक्त मोहलत नहीं मिलने के चलते इसे बंद करना पड़ा। मगर संचालकों का कहना है कि वह इसे मल्टीप्लेक्स के साथ दोबारा चालू करेंगे। रीगल के मैनेजर रूप घई कहते है कि हम इसे बंद कर रहे हैं मगर रीगल सिनेमा प्रेमियों के लिए फिर लौटेगा। नए सिनेमाई दौर यानि मल्टीप्लेक्स के साथ। उन्होंने कहा कि इसके बंद होने का दुख तो है, मगर लोगों का जो प्यार मिल रहा है उससे हम बहुत खुश है। उन्होंने बताया कि राजकपूर की जिन दो फिल्मों के आखिरी शो के रूप में पब्लिक डिमांड पर दिखाया जा रहा है वे हाउसफुल हो चुके है।
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यहां आती थी  नामचीन हस्तियां

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घई बताते है कि रीगल भले ही भीतर से आधुनिक दौर के मुताबिक बदल जाए मगर बाहर का अक्स ऐतिहासिक ही बना रहेगा। 1932 में वास्तुकार वाल्टर साइक्स जॉर्ज ने जो रूप इसे दिया वह आगे भी बरकरार रहेगा। रीगल के बाहरी डिजाइन को जस का तस रखा जाएगा। 1932 की बात है जब रीगल थियेटर में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने अपनी पत्नी के साथ यहां नाटकों का लुत्फ उठाया है। इसके अलावा रीगल सिनेमा पृथ्वीराज कपूर से लेकर राजकपूर तक की फिल्मों के प्रीमियर का गवाह रहा है। वहीं राजनीति की नामचीन हस्तियों जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल विहारी वाजपेयी की यादें भी इस थियेटर से जुड़ी हुई है।

बीते 6 माह में 5 सिनेमाघर हुए बंद

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रूप घई के मुताबिक एक दौर था जब यहां चार आना (25 पैसे) में टिकट मिलता था। फिर यह बढ़कर 2 रुपये फिर पौने तीन रुपये से लेकर अब यह 100 से 200 रुपये तक पहुंच गया है। मगर रीगल जैसी ऐतिहासिक धरोहर में फिल्म देखना लोगों के लिए खास है। जानकार कहते है कि इसके बंद होने से सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों का एक अध्याय इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगा।  मल्टीफ्लेक्स के इस दौर में रीगल सिनेमा ही था जो कि सिंगल स्क्रीन होने के बाद भी अपने आप को बचाए हुए था। एनडीएमसी से नोटिस के बाद इसे बंद करना पड़ा। आंकड़ों पर नजर डाले तो बीते छह माह में 5 सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर दिल्ली में बंद हो चुके है। इसमें दरियागंज स्थित गोलचा भी शामिल है। गोलचा 1954 में बना था इसका उद्घाटन तत्कालीन उपराष्ट्रपति एस राधाकृष्णन ने किया था।
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रीगल सिनेमा से जुड़ी फैक्ट फाइल:
1932 में बनकर यह तैयार हुआ था। 
1939 में पहली फिल्म गॉन विद द विंड लगी थी। 
658 लोगों के बैठने की क्षमता है वर्तमान में। 
25 पैसे में मिलता था एक समय टिकट। 
200 रुपये तक टिकट है वर्तमान में। 
2017 में आई फिल्लौरी आखिरी फिल्म।
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