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दिल्ली से लेकर गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा तक, जिधर देखो मजदूर ही मजदूर, घर जाने की जद्दोजहद

Mon, 18 May 2020 07:56 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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प्रवासी मजदूर पैदल अपने घर जाते हुए
आज से देशभर में लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू हो गया है। इसके साथ ही अपने घर जाने के लिए निकले मजदूरों का संयम अब जवाब देने लगा है। दिल्ली-एनसीआर में सोमवार का दिन इन्हीं श्रमिकों के नाम रहा। जिधर देखो, वहीं ये लोग नजर आते हैं। चाहे बात गाजियाबाद के रामलीला मैदान की हो या दिल्ली-यूपी सीमा की हो। हर जगह इन्हीं मजदूरों का सैलाब देखा जा सकता है। अपने घर जाने की तड़प इन लोगों की आंखों में देखी जा सकती है। कहीं इन्हें पैदल चलने नहीं दिया जा रहा तो कहीं इन्हें ट्रेन और बस के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है। आगे पढ़ें पूरा मामला और देखें तस्वीरें.....
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गाजीपुर बॉर्डर पर खड़े मजदूर - फोटो : जी पाल
गाजीपुर बॉर्डर पर मजदूरों की इस भीड़ को देखकर समझा जा सकता है कि लोग यहां कितनी भारी तादाद में जुटे हुए हैं। ये लोग गाजीपुर बॉर्डर पर तो आ गए लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के चलते इन मजदूरों को पैदल आगे नहीं जाने दिया जा रहा। यह इंतजार कितना लंबा होगा इसका जवाब केवल प्रशासन ही दे सकता है।
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गाजीपुर बॉर्डर पर खड़े मजदूर - फोटो : जी पाल
यूपी सरकार का आदेश है कि किसी भी मजदूर को पैदल, ट्रक आदि से न चलने दिया जाए। इसके चलते जो मजदूर पैदल यहां पहुंचे हैं, उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। इनमें से कुछ का कहना है कि उन्हें पता चला था कि आनंद विहार से बस चलने वाली हैं, जिसके चलते वो यहां आए थे। अब न बस चल रही है न ही पैदल जाने दिया जा रहा है।

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गाजीपुर बॉर्डर पर खड़े मजदूर - फोटो : जी पाल
गाजियाबाद से आज यानि की सोमवार को मजदूरों को लेकर छह ट्रेनें रवाना होने को थीं। इनमें यूपी के तीन रूट पर जाने वाली ट्रेनों के लिए श्रमिक कविनगर रामलीला मैदान में जुटे, जबकि बिहार जाने वाली तीन ट्रेनों के लिए श्रमिक घंटाघर रामलीला मैदान में एकत्र हुए। इन दोनों ही जगहों पर श्रमिकों की संख्या हजारों में है। 
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गाजीपुर बॉर्डर पर खड़े मजदूर - फोटो : जी पाल
बिहार रूट की तीन ट्रेनों के लिए जिला प्रशासन रामलीला मैदान घंटाघर में अब-तक करीब 4000 लोगों को पंजीकरण कर उन्हें पास जारी कर चुका है। अभी भी करीब 3000 लोग रामलीला मैदान में ऐसे हैं जिनका पंजीकरण नहीं हो पाया है और वह घर जाने का प्रयास कर रहे हैं।
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गाजीपुर बॉर्डर पर खड़े मजदूर - फोटो : जी पाल
बता दें कि गाजियाबाद से जाने वाले वो मजदूर जिनका आज रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका वो अभी से ही कल रजिस्ट्रेशन की लाइन में लग गए हैं। यह सभी मजदूर बहुत दूर-दूर से यहां पहुंचे हैं और अपने घरों को जाना चाहते हैं। सरकारें चाहे कुछ भी कहें लेकिन मजदूरों की समस्या के आगे उनके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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गाजीपुर बॉर्डर पर खड़े मजदूर - फोटो : जी पाल
रेलवे हाईकोर्ट से बोला- मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए सभी तैयारियां पूरी 
एक ओर जहां पूरे देश में मजदूर अपने घरों तक पहुंचने के लिए परेशान हैं, वहीं एक अपील की सुनवाई पर रेलवे ने बताया कि मजदूरों को भेजने की उसकी सभी तैयारियां पूरी हैं।   प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने की मांग वाली याचिका पर रेलवे ने दिल्ली हाईकोर्ट को जवाब दिया है कि रेलवे प्रवासी मजदूरों को दिल्ली से उनके घरों तक पहुंचाने के लिए तैयार है।

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गाजीपुर बॉर्डर पर खड़े मजदूर - फोटो : जी पाल
रेलवे ने कोर्ट को बताया इस संबंध में पहले ही श्रमिक ट्रेनें चलानी शुरू कर दी गई हैं। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने इस याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की। इस दौरान रेलवे ने पीठ को बताया कि रेलवे प्रवासी मजदूरों को अन्य राज्यों में स्थित उनके घरों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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गाजीपुर बॉर्डर पर खड़े मजदूर - फोटो : जी पाल
रेलवे ने कहा कि अब तक करीब 10 लाख यात्रियों को लेकर 800 ट्रेनें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। यह याचिका में बंधुआ मजदूर उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय अभियान समिति की ओर से दायर की गई है। याचिका में यह दावा किया गया कि प्रवासी मजदूरों की उनके घर वापसी के लिए पंजीकरण हेतु निर्धारित की गई सरकार की वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

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ग्रेटर नोएडा में ट्रेन पकड़ने के लिए पहुंचे श्रमिक - फोटो : हरि प्रकाश
इस वजह से काफी मजदूर अपने घर जाने के लिए पंजीकरण ही नहीं करवा पा रहे हैं, जिस कारण मजदूरों को परेशान होना पड़ रहा है। 
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ग्रेटर नोएडा में ट्रेन पकड़ने के लिए पहुंचे श्रमिक - फोटो : अमर उजाला
इस समस्या के समाधान के लिए याचिका में एक नोडल अधिकारी तैनात करने की मांग की गई है। मांग है कि दिल्ली के हर जिले के मुताबिक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि परेशान प्रवासी मजदूरों की समस्या का निवारण करके उन्हें उनके घर वापस भेजा जा सके।
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