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गैस चैंबर बनी दिल्ली: हवा में घुले हैं रेत के कण, स्मॉग की तरह जानलेवा हो सकती है ये धूल

Sat, 16 Jun 2018 10:42 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पिछले कुछ दिनों से राजस्थान से आई धूल ने दिल्ली को गैस चैंबर बना दिया है। यहां के लोगों का खुले में सांस लेना दूभर हो चुका है। इसी प्रदूषण को लेकर नई दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डीन डॉ. राजीव सूद का कहना है कि स्मॉग की तरह ये प्रदूषित कण भी लोगों को बीमार बना सकते हैं। आमतौर पर प्रदूषण को सांस और दिल की बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है लेकिन प्रदूषण के अणु लोगों की किडनी तक खत्म करते हैं। हालांकि यह प्रभाव करीब 10 साल बाद देखने को मिलता है। इस समय दिल्ली की सड़कों पर जो धूल दिखाई दे रही है, उसके अणुओं में कई तरह के जहरीले रसायन मिश्रित हैं।    
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वहीं, मैक्स अस्पताल के डॉ. विवेक कुमार का कहना है कि आने वाले एक हफ्ते तक लोग सुबह-शाम टहलने न जाएं क्योंकि हवा में घुले कण शरीर में जाने पर सेहत को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। चूंकि, सुबह के वक्त प्रदूषण अधिक है इसलिए अस्थमा, खांसी, आंखों में जलन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।  

 
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यूं समझें इस प्रदूषण को
डॉ. सूद के अनुसार, हवा में धूल कणों की उपस्थिति को पीएम 2.5 और पीएम 10 में रखा जाता है। पीएम 2.5 या इससे कम के माइक्रोन के धूल कण सांस के साथ फेफड़े, आंख और त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं, खून में जाकर यह रक्त कोशिकाओं, दिमाग और किडनी को प्रभावित करते हैं लेकिन पीएम 10 का दुष्प्रभाव भी कम नहीं है।       
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दिल्ली में बढ़ जाता है अणुओं में रसायन
कालरा अस्पताल के डॉ. आरएन कालरा बताते हैं कि आंधी में रेत उड़ती है तो उसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला रासायनिक धुआं भी उसके साथ मिल जाता है। यह रासायनिक धुआं इन रेत कणों पर परत जमा देता है। जिससे रेत कण ज्यादा घातक हो जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन अणुओं के किडनी में जाने से नेफ्रोन बंद होने लगते हैं। जिससे किडनी के काम करने की क्षमता कम होने लगती है।
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