pollution
यूं समझें इस प्रदूषण को
डॉ. सूद के अनुसार, हवा में धूल कणों की उपस्थिति को पीएम 2.5 और पीएम 10 में रखा जाता है। पीएम 2.5 या इससे कम के माइक्रोन के धूल कण सांस के साथ फेफड़े, आंख और त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं, खून में जाकर यह रक्त कोशिकाओं, दिमाग और किडनी को प्रभावित करते हैं लेकिन पीएम 10 का दुष्प्रभाव भी कम नहीं है।