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कमल का एक्सीडेंट नहीं मर्डर हुआ: हादसे के दोषी सिस्टम के तीन विभाग, सबसे पहले सुरक्षा गार्ड ने देखा था हादसा

Sat, 07 Feb 2026 11:11 PM IST
विकास कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

कमल की मौत मामले में सीधे तौर सुरक्षा गार्ड योगेश और उप ठेकेदार राजेश तो हैं ही साथ ही सिस्टम के तीन प्रमुख विभाग जलबोर्ड, स्ट्रीट लाइट लगाने वाला विभाग और पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में हैं। हैरत की बात यह है कि गड्ढे में बाइक के साथ गिरे कमल को सुरक्षा गार्ड और उप ठेकेदार ने देखा था। 
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जनकपुरी में बाइक सवार कमल की गड्ढे में गिरने से मौत - फोटो : अमर उजाला
जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड के खुले गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय कमल की मौत कोई दुर्घटना भर नहीं, बल्कि सिस्टम के कई चेहरों की सामूहिक नाकामी का जीता-जागता सबूत है। यह मौत सवाल पूछती है....और जवाब मांगती है...उन तमाम विभागों से, जिनकी लापरवाही ने एक युवा की जान ली और फिर सच्चाई को रात के अंधेरे में दफन करने की कोशिश की।
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कमल मौत मामले में सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
जल बोर्ड ने स्वीकार की गलती
सबसे पहले बात उस मौके की जहां हादसा हुआ। जिस मार्ग पर यह घटना हुई, वहां न तो पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था थी और न ही सुरक्षा के न्यूनतम इंतजाम। स्ट्रीट लाइटें बंद थीं, चेतावनी बोर्ड नदारद थे और गड्ढे को ढकने या बैरिकेडिंग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। खुद दिल्ली जल बोर्ड ने अपनी आंतरिक जांच रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। 
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कमल की बाइक - फोटो : अमर उजाला
कौन कर रहा था निगरानी?
सवाल यह है कि जब मानक थे ही नहीं, तो काम कैसे चल रहा था? और अगर मानक थे, तो उनकी निगरानी कौन कर रहा था? मामले में दर्ज की गई एफआईआर में भी पुलिस की ओर कहा गया है कि दिल्ली जल बोर्ड और उसके ठेकेदार को पता था कि बिना सुरक्षा इंतजाम के सड़क के बीचों-बीच इतना बड़ा गड्ढा छोड़ना जानलेवा हो सकता है। इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। यह दर्शाता है कि विभाग और ठेकेदार ने जानबूझकर लोगों की जान जोखिम में डाली।

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ऑफिस से लौटते बाइक सवार कमल की मौत - फोटो : अमर उजाला
सीधे तौर पर तीन विभाग सवालों के घेरे में....
कमल की मौत मामले में सीधे तौर सुरक्षा गार्ड योगेश और उप ठेकेदार राजेश तो हैं ही साथ ही सिस्टम के तीन प्रमुख विभाग जलबोर्ड, स्ट्रीट लाइट लगाने वाला विभाग और पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में हैं। हैरत की बात यह है कि गड्ढे में बाइक के साथ गिरे कमल को सुरक्षा गार्ड और उप ठेकेदार ने देखा था। वहीं दूसरी ओर जिस मार्ग पर हादसा हुआ, वहां स्ट्रीट लाइटें बंद थीं। स्ट्रीट लाइट लगाने और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने वाला विभाग कहां था? वहीं पुलिस पर इस मामले में शुरू से ही हल्के में लेकर निपटाने की कोशिश का आरोप लग ही रहा है।
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मृतक कमल की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
पेट, गले और चेहरे पर मिले चोट के निशान...
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कमल के पेट, गले और चेहरे पर गहरे चोट के निशान पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि जब कमल को पहली बार गड्ढे में देखा गया था, तब वह अपनी बाइक के नीचे दबा हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि कमल पहले मुंह के बल गड्ढे में गिरा और उसके ऊपर बाइक आ गिरी। इसी टक्कर और दबाव के कारण पेट, गले और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। जिस तरह की चोटें सामने आई हैं, वे यह संकेत देती हैं कि कमल कुछ समय तक गड्ढे में जीवित रहा हो सकता है। ऐसे में हादसे के बाद तुरंत रेस्क्यू न होना सिस्टम की सबसे बड़ी लापरवाही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मौत के सही कारणों पर अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जा सकेगा। शनिवार तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को प्राप्त नहीं हुई थी और रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत सीधे तौर पर किन चोटों के कारण हुई।
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