विश्वविख्यात पर्यटक स्थल श्रीनगर के गुलमर्ग में रविवार का दिन पर्यटकों के लिए काल बनकर आया। गंडोला (रोपवे) टूटने से सात पर्यटकों की मौत हो गई। इनमें दिल्ली निवासी परिवार के चार सदस्य भी शामिल हैं। ये परिवार दिल्ली के शालीमार बाग के रहने वाले थे।
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delhi family dies in gulmarg incident
श्रीनगर के गुलमर्ग में हुए गंडोला केबल कार हादसे में जयंत अंद्रासकर, उनकी पत्नी और दो बेटियों की मौत की खबर से शालीमार बाग स्थित उनकी सोसायटी में गम का माहौल है। किसी को भी यकीन नहीं हो रहा कि हंसते-खेलते परिवार में अब कोई भी सदस्य जीवित नहीं बचा। रविवार दिन में जैसे ही सोसायटी में परिवार के मौत की खबर आई, पड़ोसियों की भीड़ जयंत के घर के नीचे इकट्ठा हो गई। मासूम अनघा और जाह्नवी की मौत की खबर से पड़ोस के कई बच्चों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
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हादसे की सूचना मिलने पर जयंत के साले सौरव भी उनके घर पर पहुंचे। दिल्ली गवर्नमेंट ऑफिसर्स रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स सोसायटी के अध्यक्ष राजेश कुमार सांगवान ने बताया कि जयंत का परिवार वर्ष 2013 से यहां रह रहा था। पहले ही दिन से कभी ऐसा नहीं लगा कि जयंत सोसायटी में नए हैं। चंद दिनों के भीतर ही उनका पूरा परिवार सोसायटी के लोगों घुल-मिल गया था। बच्चियां तो सभी पड़ोसियों की आंखों का तारा बनी हुई थी।
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राजेश ने बताया कि होनहार जयंत दिल्ली सरकार के पूसा इंस्टीट्यूट में लेक्चरर थे। उनकी पत्नी गृहणी थी। अनघा शालीमार बाग के गुडले पब्लिक स्कूल में पहली कक्षा की छात्रा थी। मासूम जाह्नवी का इसी साल प्रेप में दाखिला कराया था।
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जयंत के फ्लैट के नीचे रहने वाले एमएल मीणा ने बताया कि चंद दिनों पहले ही वे अपने परिवार के साथ कश्मीर के लिए निकले थे। चारों बेहद खुश नजर आ रहे थे। खासकर दोनों बच्चियां श्रीनगर जाने के लिए बेहद उत्साहित थीं। उन्होंने बताया कि जयंत मूलरूप से नागपुर के रहने वाले और सामाजिक सोच वाले व्यक्ति थे। सोसायटी के हर कार्यक्रम और गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे।
जयंत सोसायटी की समस्याओं के निराकरण के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। वे चाहते थे कि सोसायटी के बच्चों को बेहतर माहौल मिले। बच्चे हर क्षेत्र में अच्छा नाम करें और इसके लिए वे प्रयास भी करते थे। उनकी पत्नी का भी ऐसा ही स्वभाव था। सोसायटी के लिए इनकी मौत परिवार के सदस्य के खोने जैसा है।