अगर आप फिल्मों के शौकीन हैं और रिलीज होते ही उसे देखने को बेताब हो जाते हैं तो अक्सर जल्दबाजी में आप एक गलती कर जाते हैं जिसके बारे में असल में कम ही लोग जानते हैं। असल में नई फिल्मों के रिलीज होते ही उसे ऑनलाइन देखने या उसकी पाइरेटेड सीडी का धंधा दिल्ली सहित पूरे देश में तेजी से फैल चुका है।
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आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पाइरेसी के इस गोरखधंधे से हर साल इंडियन फिल्म इंर्डस्ट्री को लगभग 19000 करोड़ का नुकसान होता है। अगर आप भी पाइरेसी के इस धंधे में योगदान देते हैं तो आपके लिए संभल जाने का वक्त आ गया है क्योंकि अब आप ऐसा करते हुए रंगे हाथों पकड़े जा सकते हैं।
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दिल्ली की एक प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी ने दावा किया है कि उसने एक ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप किया है जो पाइरेसी करने वालों को रंगे हाथों पकड़ लेगा।
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असल में फिल्म के रिलीज के बाद से ही टॉरेंट नामक साइट से इसे अपलोड कर उसकी पाइरेटेड सीडी बाजार में उतार दी जाती है। इस पूरे सिस्टम पर लगाम नहीं लगाई जा सकी है क्योंकि इस सिस्टम का ट्रैक करना लगभग असंभव है।
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इस सॉफ्टवेयर को बनाने वाली कंपनी का दावा है कि कॉपकॉर्न नामक ये सॉफ्टवेयर ऑनलाइन पाइरेसी पर निगाह रखता है और किसी भी फिल्म के लीक होते ही ये बता देता है कि इसे कहां-कहां अपलोड किया जा रहा है।
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कॉपकॉर्न को डेवलेप करने वाली वॉयजर इनफोसेक प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर जितेज जैन का कहना है कि एक खास प्रक्रिया के द्वारा ये सॉफ्टवेयर पूरी दुनिया में कहीं भी फिल्म के लीक होने को ट्रैक कर लेता है। यह सॉफ्टवेयर अपने मकसद में 98 फिसदी तक सही साबित होता है।
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बता दें कि पाइरेसी के धंधे से जहां बॉलीवुड को काफी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है वहीं, सरकार को भी इसे खासा नुकसान होता है। हाल ही में 'उड़ता पंजाब' और 'ग्रेट ग्रैंड मस्ती' जैसी फिल्में तो रिलीज से पहले ही ऑनलाइन लीक हो गई थीं।
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जबकि सुल्तान, दंगल, जॉली एलएलबी2 जैसी बड़ी फिल्में भी रिलीज से कुछ घंटे बाद ही इंटरनेट पर लीक हो गई थीं। यहां तक कि बॉलीवुड की अब तक की सबसे बड़ी हिट 'बाहुबली' भी रिलीज से कुछ घंटों बाद ही पाइरेसी का शिकार हो गई थी।
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जैन का कहना है कि 'कहानी2' के रिलीज के बाद उन्होंने अपने सॉफ्टवेयर कॉपकॉर्न का इस्तेमाल किया जिससे पता चला कि लगभग इंटरनेट पर 1.56 लाख लोगों ने टॉरेट की साइट से इसे डाउनलोड करने की कोशिश की।