सोहना रोड स्थित पार्क अस्पताल में बुधवार को डॉक्टर की लापरवाही के कारण 11 साल के मासूम बच्चे की जान चली गई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने बच्चे को गलत इंजेक्शन लगवा दिया। इसके चलते उसकी मौत हो गई।
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prateek's death
- फोटो : सुदर्शन झा
गुस्साए परिजनों ने बुधवार को अस्पताल में काफी हंगामा किया और शव लेने से इंकार कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह मामले को शांत कराया।
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परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ पुलिस को लिखित में शिकायत दी है। जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर शवगृह भेज कर पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। आगे की कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन से रिपोर्ट मांगी है।
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दिल्ली नगर निगम में कार्यरत गंगा विष्णु अपने परिवार के साथ गुरुग्राम के बसई इलाके में रहते हैं। उनका 11 वर्षीय बेटा प्रतीक छठी कक्षा का छात्र था। मंगलवार को प्रतीक को उल्टी व दस्त हुए थे।
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इसके बाद इलाज के लिए वह उसे लेकर सीजीएचएस डिस्पेंसरी गए। वहां से प्रतीक को सोहना रोड के पार्क अस्पताल में रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन मंगलवार शाम करीब चार बजे उसे लेकर पार्क अस्पताल पहुंचे, जहां उसे भर्ती किया गया।
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परिजनों ने बताया कि देर रात करीब 10 बजे प्रतीक को अचानक बेचैनी होने लगी। जिसके बाद अस्पताल द्वारा उसे आईसीयू में भर्ती किया गया। सुबह तीन बजे के करीब बच्चे की हालत बिगड़ने लगी।
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इस पर परिजनों ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया, लेकिन रात के समय वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। अस्पताल में मौजूद कंपाउंडर ने डॉक्टर को फोन कर इसकी जानकारी दी। जिसके बाद डॉक्टर की सलाह पर कंपाउंडर ने बच्चेे को एक इंजेक्शन दिया।
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इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद बच्चेेे की हालत और खराब हो गई। जिसके चलते सुबह करीब 4 बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही से बच्चेेे को गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
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मां निर्मला का आरोप है कि अस्पताल ने बच्चे को इलाज के दौरान दी जा रहीं दवाइयों के रिकॉर्ड से भी छेड़खानी की है। बच्चेे की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा पर्ची पर लिखे गए इंजेक्शन के नाम को काट कर दोबारा बदला गया है।
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वहीं इस मामले में बच्चेे का इलाज कर रहे डॉ. महेंद्र मिनोचा का कहना है कि जिस समय बच्चेेे को अस्पताल में लाया गया था, उस समय उसकी हालत खराब थी।
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बच्चे को डायरिया व टाइफाइड था। रात को बच्चेे को अचानक दौरा पड़ा, जिसे रोकने के लिए इंजेक्शन लगाया गया। डॉक्टर के मुताबिक कई अंगों के काम बंद करने के कारण बच्चेे की मौत हो गई।
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गुस्साए परिजनों ने कंपाउंडर को दौड़ाया
गुस्साए परिजनों के सामने जब इंजेक्शन देने वाला कंपाउंडर सामने आया, तो सभी उसी के पीछे पड़ गए। प्रतीक के परिजनों ने उसे दबोच लिया, लेकिन कंपाउंडर वहां से भागने में सफल रहा और पुलिस वालों के बीच जाकर छिप गया। आरोप है कि डॉक्टर के कहने पर कंपाउंडर ने ही इंजेक्शन लगाया था।
इस मामले में परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने शव लेकर पोस्टमार्टम करवा दिया है। इस मामले में सिविल सर्जन से रिपोर्ट मांगी गई है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी। -विजय कुमार, एसएचओ, थाना सदर