देश एक और चमत्कार की दुआ कर रहा था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सियाचिन में मौत को चुनौती देने वाले लांस नायक हनुमंथप्पा आखिरकार जिंदगी की जंग हार गए। लांस नायक को दिल्ली कैंट के बरार स्क्वायर में पूरे सैनिक सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। (सभी फोटो: ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली)
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हादसे से एक दिन पहले हनुमंथप्पा ने की थी परिवार की मदद
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इस दौरान परिकर ने हनुमंथप्पा के परिवार से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही एडब्ल्यूडब्ल्यूए की अध्यक्ष नमिता सुहाग और आर्मी स्टाफ प्रमुख ने भी हनुमंथप्पा के परिवार से मुलाकात की। इसके बाद वायुसेना के विशेष विमान से शव को कर्नाटक ले जाया गया। हनुमंथप्पा का अंतिम संस्कार शुक्रवार को कर्नाटक के धारवाड़ जिले के उनके पैतृक गांव बेटादूर में किया जाएगा।
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हादसे से एक दिन पहले हनुमंथप्पा ने की थी परिवार की मदद
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सेना के अनुसार हनुमंथप्पा आखिरी वक्त में डीप कोमा में चले गए थे और उनके सभी अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था। सेना के मुताबिक हनुमंथप्पा आखिरी वक्त में डीप कोमा में चले गए थे और उनके सभी अंगों ने धीरे धीरे काम करना बंद कर दिया। बर्फ मे छह दिन तक दबे रहने से उनके खून कई जगह जम गए थे।
हादसे से एक दिन पहले हनुमंथप्पा ने की थी परिवार की मदद
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अस्पताल में दुनिया के श्रेष्ठ उपकरणों और दवाईयों के बावजूद उसके जमे खून को सामान्य प्रवाह में नहीं लाया जा सका। उसका किडनी और लीवर पहले ही काम करना बंद कर चुका था। सेना के अधिकारी के मुताबिक बर्फ के 35 फीट की गहराई से निकालने के बाद हनुमंथप्पा ने आंखे खोली थी। इससे उसके जिंदा बचने की उम्मीद जगी। दिल्ली पहुंचने के चौबीस घंटे बाद से उसकी हालत बिगड़नी शुरु हो गई थी।
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हादसे से एक दिन पहले हनुमंथप्पा ने की थी परिवार की मदद
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हनुमंथप्पा अपने पीछे पत्नी महादेवी राजश्री और दो साल की बेटी नेत्र को छोड़ गए हैं। सेना सूत्रों के मुताबिक लांस नायक हनुमंथप्पा सेना की भर्ती का तीन इम्तहान फेल कर चुका था। शुरु से अपने पर यकीन करने वाले हनुमंथप्पा ने हार नहीं मानी। तेरह साल पहले वह चौथी बार में भर्ती इम्तहान पास किया और मद्रास रेजिमेंट में उसकी बहाली हुई। उसके बाद से वह हमेशा कठिन पोस्टिंग के लिए अर्जी दिया करता था।
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छह महीने पहले सियाचिन में उसकी तैनाती उसी कोशिशों का हिस्सा था। घारवार के इस किसान परिवार में हनुमंथ्प्पा का अलावा पांच युवक पिछले कुछ सालों में सेना में भर्ती हुए हैं। हादसे के एक दिन पहले उसने फोन पर अपनी पत्नी और परिवार से बात की थी। उसने अपनी कमाई से अपने गांव में नया घर बनाने में परिवार की मदद की थी।