अदालत ने बलात्कार की झूठी शिकायत करने वाली महिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का निर्देश देने से इंकार कर दिया। अदालत ने कहा कि महिला शिकायत दर्ज करने के लिए बहुत दबाव में थी और उनका इरादा संबंधित व्यक्ति को बदनाम करने के लिए नहीं था। महिला ने अदालत में माना शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बने थे।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौतम मनन ने महिला के खिलाफ झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करने के लिए अभियोजन पक्ष की याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा कथित आरोपी मामले में बरी हो चुका है और उसने भी महिला के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
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अदालत ने कहा महिला की गवाही से यह स्पष्ट है कि उसने अभियुक्त को चोट पहुंचाने या बदनाम करने के लिए शिकायत दर्ज नहीं की थी। उसकी गवाही से यह भी स्पष्ट है कि वह प्राथमिकी दर्ज करने के लिए बहुत दबाव में थी। इसके अलावा महिला ने अदालत में ऐसा कुछ भी झूठ नहीं बोला जिससे गुमराह करने का शक हो। ऐसे में उसके खिलाफ सीआरपीसी की धारा के तहत मुकदमा दर्ज करने का कोई आधार नहीं है।
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- फोटो : amar ujala.
अभियोजन पक्ष ने अपनी याचिका में कहा कि महिला ने रेप की झूठी एफआईआर दर्ज कराई है और पुलिस को गलत जानकारी दी जिस कारण उक्त व्यक्ति को कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
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सांकेतिक चित्र
महिला ने 26 दिसंबर 2015 को प्रोपर्टी डीलर के खिलाफ द्वारका के एक मकान में रेप करने का आरोप लगाया था। तलाकशुदा उक्त महिला ने आरोप लगाया था कि वह दिल्ली कछ वर्ष पहले आई थी और आरोपी ने उसे किराए का मकान दिलवाने की आड़ में वारदात को अंजाम दिया।
महिला ने अदालत से कहा था कि उसने दबाव में मामला दर्ज किया था और उस व्यक्ति ने उसके साथ बलात्कार नहीं किया था। दोनों के बीच शारीरिक संबंध उसकी सहमति से बने थे।