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बेटी के हत्यारे नरपिशाचों को फांसी दिलाने में बिक गया मकान, कर्ज में डूबा रोम-रोम

Tue, 25 Jul 2017 11:25 PM IST
संजय शिशौदिया/राहुल कुमार/अमर उजाला, गाजियाबाद

सार

निठारी फैसला : साइड स्टोरी
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बिका आधा मकान, कर्जा भी हुआ आठ लाख

- बेटी के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए बेचा आधा मकान
- निठारी कांड के एक पीड़ित ने रोते हुए सुनाई दुख भरी कहानी

 
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- फोटो : अमर उजाला
निठारी कांड के एक अन्य विचाराधीन मामले के पीड़ित का कहना है कि अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए वह अपना आधा घर तक बेच चुके हैं। इतना ही नहीं उन पर करीब आठ लाख का भी कर्ज है, मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है। केस की लड़ाई में करीब 13 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। बेटी के हत्यारों मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली को फांसी दिलाने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार हैं। सोमवार को निठारी कांड के एक मामले में फैसले के दौरान इसी कांड से प्रभावित कुछ अन्य पीड़ित परिजन भी कोर्ट पहुंचे थे।
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- फोटो : अमर उजाला
खूनी कोठी के पास ही कपड़े प्रेस करने वाले पीड़ित ने बताया कि उनकी बेटी की हत्या भी इसी खूनी कोठी में हुई थी। खूनी कोठी से ही उनकी दस साल की बेटी के कपडे़, चप्पल और अन्य अवशेष मिले थे। 11 साल से वह न्याय के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाए हुए हैं। पुलिस से लेकर सीबीआई अफसरों तक उन्होंने कई प्रार्थना पत्र दिए हैं। केस की पैरवी करने में ही उनका 60 गज का मकान आधा बिककर अब 30 गज का रह गया है। केस की पैरवी में करीब 13 लाख रुपये का कर्ज हुआ तो उन्होंने अपना आधा मकान बेच दिया।
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- फोटो : अमर उजाला
अब भी उन पर करीब आठ लाख रुपये का कर्ज है। पीड़ित ने बताया कि सरकार से मिले पांच लाख रुपये भी इसी केस की पैरवी की भेंट चढ़ चुके हैं। कोर्ट का फैसला आने के बाद रोते हुए पीड़ित ने बताया कि खुशी इस बात की है कि आरोपियों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।
आठ को मिला न्याय... अभी भी ‘मिस्ट्री’ हैं निठारी के तीन मामले
- सीबीआई कोर्ट अब तक निठारी कांड के आठ मामलों में सुना चुकी है सजा
- विशेष सीबीआई कोर्ट में ही निठारी कांड के अभी आठ मामले और हैं विचाराधीन
- तीन मामलों का पता नहीं कर सकी सीबीआई, दाखिल की जा चुकी है क्लोजर
दिल दहला देने वाले निठारी कांड के आठ मामलों में गाजियाबाद सीबीआई विशेष कोर्ट फैसले चुना चुकी है, मगर इसी कांड से जुडे़ आठ मामले अब भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। इन मामलों में भी अभी फैसला आना बाकी है। इसके साथ ही निठारी कांड से जुडे़ तीन मामले ऐसे भी हैं, जिन से अब कभी पर्दा नहीं उठ पाएगा। कई महीनों की जांच के बाद जब इन तीन मामलों में कोई सबूत नहीं मिला तो सीबीआई ने इनमें अपनी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी। इसके साथ ही साथ ही शेखराजा, कुमारी सोनी समेत लापता हुए तीन बच्चों के मामले हमेशा के लिए ‘मिस्ट्री’ बनकर रह गए।

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- फोटो : अमर उजाला
29 दिसंबर 2006 को जब नोएडा स्थित खूनी कोठी संख्या डी-5 के पीछे नाले से एक के बाद एक 16 मानव खोपड़ियां और अन्य अवशेष बरामद हुए तो देश की राजनीति तक में भूचाल आ गया था। बरामद मानव खोपड़ियां और अन्य अवशेष मिलने के बाद निठारी कांड के इस प्रकरण में कुल 19 एफआईआर दर्ज की गईं थीं। पुलिस, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ के हाथों से होकर 11 जनवरी 2007 को यह पूरा प्रकरण राज्य सरकार द्वारा सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद सीबीआई ने अपनी पड़ताल शुरू की। सीबीआई ने कुल 19 एफआईआर में से 16 में अपनी चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी।
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- फोटो : अमर उजाला
इन 16 मामलों में से अब तक आठ मामलों में गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट कोली को फांसी की सजा सुना चुकी है, हालांकि एक मामले में कोली की फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। वर्तमान सजा के साथ ही इन आठ मामलों में पंधेर को भी सीबीआई कोर्ट ने दो मामलों में फांसी की सजा सुनाई, मगर पूर्व के एक मामले में हाईकोर्ट पंधेर को बरी कर चुका है। बाकी बचे आठ मामले अब भी विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की कोर्ट में विचाराधीन हैं। इसके अलावा तीन मामलों में आरसी-4, आरसी 18 और आरसी-19 की गहन पड़ताल के बाद भी सीबीआई उनमें किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। यही कारण रहा कि इन तीन मामलों में सीबीआई ने अपनी फाइनल रिपोर्ट (क्लोजर) कोर्ट में दाखिल कर दीं। यह तीन मामले मासूम शेखराजा, कुमारी सोनी और एक अज्ञात बालक से संबंधित हैं। निठारी से यह तीन बच्चे भी उसी दौरान गायब हुए थे, मगर सीबीआई यह तक पता लगाने में नाकाम रही कि आखिर इन तीन बच्चों को जमीन निगम गई या आसमान। 
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