रोहिणी में विजय विहार स्थित आश्रम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय मामले में दिल्ली पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पुलिस ने अगर समय पर एफआईआर व शिकायतों पर कार्रवाई की होती, तो यह मामला इतना नहीं बढ़ता और न जाने कितनी ही नाबालिग लड़कियों व महिलाओं को पहले ही मुक्त करवा लिया गया होता।
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baba virendra dev dixit
हैरानी इस बात की है कि पीड़ित माता-पिता व स्थानीय लोगों की शिकायतें मिलने के बाद भी पुलिस सोती रही। आखिरकार कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद ही यौन शोषण का खुलासा हो पाया है।
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हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाते हुए पुलिस पर भरोसा न होने की बात कह दी और सीबीआई को एसआईटी से जांच कराने का निर्देश दे दिया। गौरतलब है कि रोहिणी के विजय विहार में यह आध्यात्मिक विश्वविद्यालय करीब बीस साल पहले वीरेंद्र दीक्षित ने बनवाया था। इसके बाद से ही इसके खिलाफ शिकायतें मिलनी शुरू हो गईं।
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virendra dev dixit
कोर्ट में दायर याचिका पर भरोसा करें तो कई माता-पिता ने अपनी बच्चियों के साथ यौन शोषण का आरोप वीरेंद्र दीक्षित पर लगाया है। इसके अलावा इस स्थान से नाबालिग लड़कियों को पंजाब व दूसरे स्थानों पर भेजने का भी आरोप लगा है।
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दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने भी इस आश्रम पर शक जाहिर करते हुए स्थानीय पुलिस को शिकायतें दी थीं। इन लोगों का कहना था कि आधी रात के बाद पंजाब व दूसरे राज्यों की बड़ी गाड़ियां आती थीं और नाबालिग लड़कियों को ले जाती थीं।
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वीरेन्द्र देव दीक्षित
मालीवाल के मुताबिक, आश्रम में लड़कियों से अश्लील पत्र लिखवाए जाते थे और उनके खाने पीने में नशा मिलाया जाता था। इससे लड़कियां सुधबुध खोकर विरोध करने की हालत में नहीं रहतीं। निरीक्षण के दौरान मालीवाल ने वहां रखा पानी चखा, तो वह भी काफी देर तक चकराती रहीं।
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वीरेन्द्र देव दीक्षित
वीरेंद्र दीक्षित पर दिल्ली के अलावा यूपी के फर्रुखाबाद में भी 1998 में एफआईआर दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट के बाहर एक महिला ने बताया कि वह खुद आश्रम में थी और उससे दुष्कर्म हुआ।
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वीरेन्द्र देव दीक्षित
अब उसकी चार बेटियां वहां पर हैं, इनमें एक का कोई अता पता नहीं है। इसके अलावा एक पिता ने बताया कि उसकी बेटी छत्तीसगढ़ में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी और अब आश्रम के चक्कर में पड़कर पढ़ाई छोड़ यहीं रह रही है।
विजय विहार स्थित थाने में सात एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें यौन शोषण, बंधक बनाने व सुसाइड करने के आरोप थे। इसके अलावा कई माता-पिता ने थाने में डीडी इंट्री भी करवाई, लेकिन पुलिस ने वीरेंद्र दीक्षित या आश्रम पर समय रहते कार्रवाई नहीं की।