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हू-ब-हू मां-बेटी की तरह ही लटके थे बाप-बेटे के शव, उन्हीं कमरों में की सुसाइड 

Thu, 29 Sep 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूर्व डीजी व बेटे ने की सुसाइड - फोटो : अमर उजाला
इसी महज इत्तेफाक कहेंगे या कुछ और, लेकिन यह हकीकत है कि योगेश ने अपनी बहन व बीके बंसल ने अपनी पत्नी के कमरे में उसी पंखे पर लटकर फांसी लगाई, जिस पर उन लोगों ने फांसी लगाई थी। जिस अवस्था में नेहा का शव बरामद हुआ था उसी अवस्था में योगेश का भी शव मिला। 
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मां-बेटी ने दी थी जान - फोटो : अमर उजाला
फर्क बस इतना था कि नेहा व सत्यबाला ने चुन्नी के सहारे फांसी लगाई थी जबकि योगेश व उसके पिता ने रस्सी से फंदा बनाकर फांसी लगाई थी। पड़ोसियों का कहना था कि हालांकि मिलनसार नहीं था, लेकिन एक दूसरे से उन्हें काफी मोहब्बत थी। नेहा और सत्यबाला की मौत के बाद दोनों पिता-पुत्र का रोते-रोते बुरा हाल था।
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पूर्व डीजी व बेटे ने की सुसाइड - फोटो : अमर उजाला
बीके बंसल और योगेश बंसल का बुधवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। दरअसल मंगलवार को रिश्तेदार देर से दिल्ली पहुंचे थे, जिसकी वजह से दोनों के शवों का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। बीके बंसल के परिवार में बड़े भाई पवन बंसल व उनका बेटा विनोद व अन्य सदस्य हैं। 

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मां-बेटी ने दी थी जान - फोटो : अमर उजाला
उनका परिवार गांधी चौक हिसार में रहता है। परिवार का किराने की बड़ी दुकान है। सत्यबाला और नेहा की मौत के बाद दिल्ली आए पवन ने उस समय बताया था कि बीके बंसल परिवार से कम ही मिलते थे। बच्चों की शादी के सिलसिले में कुछ दिनों से उन्होंने हिसार आना शुरू किया था।
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मां-बेटी ने दी थी जान - फोटो : अमर उजाला
बीके बंसल और उनके बेटे योगेश को ज्योतिष पर काफी यकीन था। पत्नी सत्यबाला और बेटी नेहा की मौत के बाद उनके ज्योतिषी ने बीके बंसल को बताया था कि दोनों का बस इतना ही जीवन था। उनकी मौत की वजह बनने के लिए ही सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया था। पूजा पाठ के बाद ग्रहों की शांति आएगी और घर में वापस खुशहाली लौटेगी। ज्योतिषी ने ही बीके बंसल को दीपावली के बाद बेटे की शादी कराने के लिए कहा था। 
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मां-बेटी ने दी थी जान - फोटो : अमर उजाला
अपने घर की शांति और खुशियों को वापस लाने के लिए ही बीके बंसल व योगेश ने इसी माह अपनी सोसायटी के मंदिर में सुंदरकांड का पाठ शुरू कराया था। 51 दिन चलने वाला सुंदरकांड का पाठ पांच नवंबर को खत्म होना था। ज्योतिषी ने बताया था कि ग्रहों की शांति के बाद करीब तीन-चार साल में सीबीआई से उनका मुकदमा खत्म हो जाएगा और वह बरी भी हो जाएंगे।
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