फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक और नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री का भंड़ाफोड़, मिनटों में ऐसे तैयार होते थे सिक्के 

Mon, 17 Oct 2016 04:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
नकली सिक्के बनाने वालों का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली-एनसीआर में 10 रुपये के नकली सिक्के बनाने के एक और फैक्ट्री का दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस संबंध में दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान संजय शर्मा और सुनील कुमार के रूप में हुई है। 
विज्ञापन

2 of 6
नकली सिक्के बनाने वालों का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने उनके पास से 10 रुपये के 800 नकली सिक्के, सिक्के बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली डाई, मशीन और अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस की मानें तो गिरफ्तार दोनों आरोपी पहले पुलिस के हत्थे चढ़े नरेश कुमार के ही मॉड्यूल का हिस्सा हैं। नरेश के ही इशारे पर दोनों नकली सिक्के बनाने का धंधा कर रहे थे। 
विज्ञापन

3 of 6
नकली सिक्के बनाने वालों का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला
अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रवींद्र यादव ने बताया कि बृहस्पतिवार को एसीपी श्वेता चौहान व इंस्पेक्टर रंजीत दहिया की टीम को सूचना मिली कि नकली सिक्के लेकर दो शख्स आउटर, रिंग रोड, रोहिणी सेक्टर-3 के पास आने वाले हैं। सूचना के बाद पुलिस ने संजय शर्मा और सुनील को दबोच लिया। सुनील के पास से 400 और संजय के पास से 200 सिक्के बरामद हुए।

4 of 6
नकली सिक्के बनाने वालों का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला
बाद में दोनों की निशानदेही पर पीरागढ़ी स्थित फैक्ट्री से 200 तैयार सिक्के और भारी मात्रा में सिक्के बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला कच्चा माल बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान दोनों ने बताया कि वह पहले गिरफ्तार हुए चरखी दादरी निवासी नरेश कुमार की मदद से यह गोरखधंधा कर रहे थे।
विज्ञापन

5 of 6
नकली सिक्के बनाने वालों का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला
नरेश को बाहरी जिला पुलिस ने दबोचा था। वह भी सोनू उर्फ स्वीकार लूथरा नामक शख्स की मदद से नकली सिक्कों का धंधा कर रहा था। पुलिस से बचने के लिए गैंग जल्दी-जल्दी अपने ठिकाने बदलता रहता था।   
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
नकली सिक्के बनाने वालों का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला
ऐसे बनाते थे सिक्के
सिक्के बनाने के लिए खास तरह की डाई और हाइड्रोलिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाता था। सिक्के दो भागों में होते थे पहला और बाहरी भाग ब्रास का बना होता था। वहीं अंदर वाले भाग को निकिल पॉलिश कर उसे हाइड्रोलिक मशीन से जोड़ा जाता था। संजय ने बताया कि उसे नरेश ने ही नकली सिक्के बनाने के धंधे से जोड़ा था। पुलिस दिल्ली-एनसीआर में सिक्कों को वितरित करने वाले बाकी लोगों को तलाश कर रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें