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लॉकडाउनः दो दिन झाड़ी के बेर खाकर किया गुजारा, अब जान जोखिम में डालकर कर रहे मजदूरी

Fri, 27 Mar 2020 02:43 PM IST
पूजा त्रिपाठी पवन कुमार सेठी, अमर उजाला, गुरुग्राम
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corona virus lockdown - फोटो : अमर उजाला
गुरुग्राम समेत पूरे देश में लॉक डाउन का सबसे अधिक असर दिहाड़ीदार मजदूरों पर पड़ रहा है। जेब में रुपये न होने व प्रशासन से मदद न मिलने के कारण जिले में करीब 10 हजार से अधिक मजदूर रोटी के लिए तरस गए हैं। कुछ ने तो दो दिन तक झाड़ी के बेर खाकर गुजारा किया। जब भूख के मारे रुका नहीं गया तो वह अपनी जान जोखिम में डालकर पुलिस व प्रशासन से बचते हुए मजदूरी करने पहुंच गए।
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मजदूरी करने को मजबूर मजदूर - फोटो : अमर उजाला
यह आलम जिले के पालम विहार, शीतला कॉलोनी, पुरानी दिल्ली रोड, मानेसर, पटौदी, सोहना समेत अन्य स्थानों का है, जहां जरूरतमंदों को चार दिन बाद भी प्रशासन से मदद नहीं मिल पाई है। कुछ स्थानों पर गैर सरकारी संस्थाओं व पड़ोस में रहने वाले लोगों ने मदद कर दी, लेकिन यह मदद भी अपर्याप्त है। दरअसल, सरकार ने कोरोना वायरस फैलने से रोकने के लिए देश भर में लॉक डाउन किया है। जरूरतमंदों को राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपी है, लेकिन प्रशासन अब तक केवल योजना ही बना पाया है। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अभी कागजी कार्रवाई की जा रही है।
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corona virus lockdown - फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से ऐटा निवासी सतीश कुमार ने बताया कि वह गुरुग्राम में ढाई साल से है और दिहाड़ी करके रोजी रोटी कमाते हैं। चार दिन से उनके पास न तो रुपये हैं और न ही कमरे पर राशन। कोरोना वायरस को देखते हुए मकान मालिक ने कमरा खाली करवा लिया है। ऐसे में सेक्टर 23 की मार्केट में दुकान के बाहर सो रहे हैं। वह अकेले ऐसे नहीं है बल्कि मजदूरी करने वाले करीब 5 हजार लोग ऐसे हैं जिन्होंने मंदिर, पार्क, मार्केट समेत ट्राला पार्किंग व अन्य स्थानों पर रुकने के लिए शरण ली है, लेकिन किसी के भी पास खाने को रोटी नहीं है। प्रशासन की तरफ से मदद नहीं मिली है।

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- फोटो : अमर उजाला
सुधीर ने बताया कि मकान मालिक के कमरे से बाहर निकाले जाने व दुकानदार द्वारा राशन देने से मना करने पर वह खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। भूख के मारे बुराहाल हो रहा था। पास ही जंगल में झाड़ी पर बेर लगे देखे जिसे खाकर थोड़ी भूख शांत की, लेकिन अब रहा नहीं जा रहा। सड़क पर पुलिस ने नाके लगाए हैं, जो किसी को भी आने-जाने नहीं दे रहे। पुलिस से बचता हुआ काम की मदद लेने पहुंचा। एक व्यक्ति ने अपना बगीचा साफ करने के लिए लगा दिया। खाने के लिए दो रोटी दे दी। अब शाम को जो दिहाड़ी मिलेगी उससे दो वक्त का खाना खाऊंगा।
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सिर्फ बंदर ही नहीं अन्य जानवर भी लॉकडाउन से हैं परेशान - फोटो : अमर उजाला
शीतला कॉलोनी निवासी रवि ने बताया कि वह परिवार समेत यहां रहते हैं और मजदूरी करते हैं। चार दिन से काम पर नहीं गया। घर पर राशन भी खत्म है। कल से भूखे हैं। पड़ोसियों ने रात को रोटी दे दी थी जिसे नमक लगाकर खा लिया। प्रशासन ने मदद देने की बात कही थी, लेकिन आज तक मदद नहीं मिली है।
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