गौतम गंभीर
- फोटो : एएनआई
घरेलू सहायिका पिछले छह साल से गंभीर के घर पर काम कर रही थीं। गंभीर ने ट्वीट कर बताया कि मेरे बच्चों की देखभाल करने वाली घरेलू सहायिका नहीं हो सकती। वह परिवार का हिस्सा थीं। उनका अंतिम संस्कार करना मेरा फर्ज था। गंभीर ने कहा मेरा हमेशा से मानना रहा है कि व्यक्ति किसी भी जाति, धर्म, वर्ग, सामाजिक दर्जे का हो, वह बराबर सम्मान का हकदार है। इसी से हम बेहतर समाज और देश बना सकते हैं।