फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'मुबारक हो.. शादी टूट गयी, चलो पार्टी हो जाए'

Mon, 07 Dec 2015 04:58 PM IST
अरीश रिज़वी/अमर उजाला, गाजियाबाद
विज्ञापन
1 of 7
प्रेमी युगल में ब्रेकअप पार्टी तो खूब सुनने को मिलती हैं, मगर अब घर बिखरने पर भी ‘पार्टी’ हो रही हैं। परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलिंग के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि तलाक के लिए दंपति की सहमति बनने पर वे इसे सेलीब्रेट करते हैं।
विज्ञापन

'मुबारक हो.. शादी टूट गयी, चलो पार्टी हो जाए'

2 of 7
ऐसे लोग यह कहते हुए भी नजर आते हैं कि मुबारक हो! रिश्ता टूट गया..चलो पार्टी हो जाए। कुछ तो यहां तक कहते हैं कि बहुत टेंशन रही, चलो फाइनली कोई डिसिजन तो हुआ, भले ही डिवोर्स की शक्ल में हुआ हो। रोज की तकरार तो खत्म हुई।
विज्ञापन

'मुबारक हो.. शादी टूट गयी, चलो पार्टी हो जाए'

3 of 7
भारतीय समाज में तलाक होना बड़ी बात मानी जाती है। इससे परिवार बिखरते हैं, बच्चे माता-पिता केप्यार से महरूम रह जाते हैं। बावजूद इसके दंपतियों में तलाक हो रहे हैं और कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो इसे सेलीब्रेट भी कर रहे हैं।

'मुबारक हो.. शादी टूट गयी, चलो पार्टी हो जाए'

4 of 7
गाजियाबाद में भी इस तरह के कई केस इन दिनों सामने आए हैं। महिला थाने की एसएचओ अंजू तेवतिया ने बताया कि दंपति में डिवोर्स पर सहमति बनने के बाद उसे सेलीब्रेट करने वाली ज्यादातर फैमिली दिल्ली या टीएचए की रहने वाली हैं।
विज्ञापन

'मुबारक हो.. शादी टूट गयी, चलो पार्टी हो जाए'

5 of 7
इन परिवारों में ज्यादातर झगड़ों की वजह हैं, आपस में विचार न मिलना और दंपति में से किसी एक या दोनों के विवाहेतर संबंध होना या फिर संबंधों का शक होना है।
विज्ञापन

'मुबारक हो.. शादी टूट गयी, चलो पार्टी हो जाए'

6 of 7
इस तरह के10-15 मामले हर माह आ रहे हैं, जिनमें दोनों पक्ष तलाक पर सहमत हो जाते हैं। इस साल 67 मामले ऐसे रहे हैं। एसएचओ ने बताया कि इनमें से कुछ परिवार ऐसे भी रहे, जिन्होंने तलाक पर सहमत होने पर उसे सेलीब्रेट किया और उसमें आने के लिए पुलिसवालों को भी कहा।


विज्ञापन
विज्ञापन

'मुबारक हो.. शादी टूट गयी, चलो पार्टी हो जाए'

7 of 7
समाजशास्त्री जेएल रैना के मुताबिक पहले रिश्तों को अहमियत दी जाती थी। रिश्तों के टूटने पर दर्द होता था, मगर अब दंपति को निजी जिंदगी में एक-दूसरे का दखल बर्दाश्त नहीं है। उन्हें लगता है कि अलग होकर वे अपने निर्णय बेहतर तरीके से ले सकेंगे और उसका जश्न भी मनाने लगे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें