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दिल्ली हिंसा: होली पर कपड़ा कारोबार का रंग फीका, गांधी बाजार, सदर बाजार समेत सभी मार्केट बेरौनक

Mon, 02 Mar 2020 10:24 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
उत्तर-पूर्वी दिल्ली की हिंसा से सैकड़ों घर तो तबाह हुए ही हैं, परंपरागत उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। होली के त्योहार पर व्यापारियों की सभी तैयारियां धरी रह गईं। जो ऑर्डर थे भी, कारीगर नहीं मिलने के कारण व्यापारी उन्हें पूरे नहीं कर पा रहे हैं। कपड़ों की सप्लाई सबसे अधिक प्रभावित है। परंपरागत रूप से होली पर दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, पूरे देश के व्यापारी खरीदारी के लिए दिल्ली पहुंचते थे।
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
फैक्टरी मालिकों पर होली के दौरान कपड़ों की सप्लाई का दबाव था, लेकिन कारीगरों के घर जाने से इनमें से कई फैक्टरियां बंद हो गईं। यहां तक कि एशिया के सबसे बड़े मार्केट गांधी नगर व जींस के लिए मशहूर टैंक रोड में भी रेडीमेड कपड़ों की सप्लाई नहीं है। चांदनी चौक के कपड़ा मार्केट में भी ऑर्डर लगातार कैंसिल हो रहे हैं। कारण कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों से कारीगर पलायन कर गए हैं। ऐसे में फैक्टरी बंद पड़ी हुई हैं। गांधी नगर में उपद्रव तो नहीं हुआ, लेकिन व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
होलसेल गारमेंट एसोसिएशन अशोक बाजार गांधी नगर के अध्यक्ष केके बल्ली का कहना है कि गांधी नगर में कपड़ों का कारोबार सबसे अधिक है। इस मार्केट में आने वाले कपड़ों की सिलाई उत्तर पूर्वी दिल्ली के हिंसाग्रस्त इलाकों में ही होती है। कपड़ों की दुकानों पर पैकिंग व अन्य काम करने वाले अधिकांश कारीगर और मजदूर भी प्रभावित इलाकों में रहते थे। अब ये अपने कमरा छोड़कर गांव चले गए हैं। सिलाई फैक्टरियों में काम करने वाले कई मजदूर काम पर नहीं लौटे हैं। 

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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
रंग रसायन व्यापार संघ के चेयरमैन अजय अरोड़ा का कहना है कि हिंसा प्रभावित इलाकों में सबसे अधिक रंगरेज रहते थे। राजस्थान से आए इन रंगरेज को कपड़े की रंगाई की कारीगरी विरासत में मिली है। इनके पलायन कर जाने की वजह से कपड़ा उद्योग प्रभावित हुआ है। रंगों की मांग ही नहीं है, जबकि होली के दौरान यह सर्वाधिक होती थी। 
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
सदर बाजार के व्यापारी देवराज बावेजा का कहना है कि कारीगर नहीं मिलने से होली का रंग फीका पड़ गया है। हिंदुस्तान मर्केन्टाइल एसोसिएशन के अरुण सिंहानिया ने कहा कि व्यापार के लिए शांति जरूरी है। फिलहाल पैकिंग व प्रोडक्शन का काम बिल्कुल ठप है। चांदनी चौक के क्लॉथ मार्केट में भी व्यापार ठप है।
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