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Chandrayaan-2: डॉ. अब्दुल कलाम ने क्या कहा था जब फेल हुआ था इसरो का SLV-3 मिशन

Sat, 07 Sep 2019 04:55 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चंद्रयान-2(Chandrayaan-2) का लैंडर विक्रम चांद पर स्मूथ व सॉफ्ट लैंडिंग करने और अपनी स्पीड को आवश्यक गति तक लाने में असफल रहा। ये एक ऐसा भावुक मौका है जब देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की याद जरूर आती है। असफलता का सामना कैसे किया जाए इस बारे में उनके शब्द बहुत कारगर हैं। उन्होंने 1979 में एसएलवी-3 सैटेलाइट लॉन्च के असफल होने की बात याद करते हुए उन्होंने जो कुछ कहा था वह बहुत प्रेरणादायी है। अब्दुल कलाम उस समय भारत के प्रथम सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल(SLV-VIII) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर थे और सतीश धवन इसरो के चेयरमैन थे।

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1979 की उस असफलता को याद करते हुए डॉ. कलाम ने 2013 में एक कार्यक्रम के दौरान बताया था कि असफलता का प्रबंधन कैसे करते हैं। उन्होंने कहा था, 'वो साल था 1979। मैं प्रोजेक्ट डायरेक्टर था। मेरा मिशन सैटेलाइट को ऑर्बिट में स्थापित करने का था। हजारों लोगों ने 10 साल तक इस पर काम किया। मैं श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड पर पहुंच चुका था। काउंटडाउन शुरू हो चुका था... टी माइनस 4 मिनट, टी माइनस 3 मिनट, टी माइनस 2 मिनट, टीम माइनस 1 मिनट, टी माइनस 40 सेकंड। और कम्प्यूटर ने उसे होल्ड पर रख दिया... इसे लॉन्च मत करो। मैं मिशन डायरेक्टर था, मुझे निर्णय लेना था।'

हालांकि कलाम ने बताया कि उन्हें विशेषज्ञों ने कहा कि आप लॉन्च करिए क्योंकि वह अपने कैल्कुलेशन को लेकर आश्वस्त थे। डॉ. कलाम ने कम्प्यूटर की बात न मानकर रॉकेट लॉन्च करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, 'मैंने कम्प्यूटर की बात न मानकर रॉकेट लॉन्च किया। सैटेलाइट लॉन्च करने से पहले चार चरण होते हैं। पहला स्टेज अच्छा गया और दूसरे स्टेज में वह पागल जैसा हो गया। वह स्पिन हुआ। रॉकेट ने सैटेलाइट को ऑर्बिट में रखने के बजाय बंगाल की खाड़ी में रख दिया।'
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वीडियो में देखें डॉ. कलाम ने क्या कहा...

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डॉ. कलाम ने कहा कि वैसे तो रॉकेट लॉन्च करने का निर्णय उनका था और यह मेरा निर्णय था कि कम्प्यूटर की बात न मानकर रॉकेट लॉन्च किया जाए। 'मैंने पहली बार असफलता देखी थी...और असफलता को कैसे मैनेज किया जाता है? सफलता का प्रबंधन तो मैं कर सकता था लेकिन असफलता का प्रबंधन कैसे करता?'

इसके बाद डॉ. कलाम ने आगे बताया कि कैसे तत्कालीन इसरो चीफ सतीश धवन ने उन्हें लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस की वो भी बिना आलोचना के भय के। कलाम ने बताया कि सतीश धवन ने उस वक्त प्रेस कांफ्रेंस में कहा था, 'प्रिय मित्रों, आज हम असफल हो गए। मैं अपने टेक्नोलॉजिस्ट, अपने वैज्ञानिकों, अपने स्टाफ का समर्थन करता हूं ताकि अगले साल ये सफल हो जाएं।'

कलाम ने आगे कहा, 'सतीश धवन ने मिशन फेल होने का सारा दोष अपने ऊपर ले लिया और ये भरोसा दिलाया कि अगले साल हम सफल होंगे क्योंकि उनकी टीम बहुत अच्छी है।' डॉ. कलाम ने उस साल को याद करते हुए आगे कहा कि, 'अगले साल 18 जुलाई 1980 को उसी टीम ने जिसकी अगुवाई डॉ. कलाम कर रहे थे ने सफलतापूर्वक रोहिणी RS-1 को ऑर्बिट में स्थापित किया।' मिशन सफल होने के बाद धवन ने डॉ. कलाम को प्रेस कांफ्रेंस करने के लिए कहा।

इस बात को याद करते हुए डॉ. कलाम ने लोगों को बताया था कि, वो दिन मेरी जिंदगी की बहुत बड़ी सीख थी। जब असफलता मिलती है तो संस्था का लीडर उसकी जिम्मेदारी लेता है। जब सफलता आई तो उन्होंने उसे अपनी टीम को दे दिया। यह सबसे बेहतरीन प्रबंधन का पाठ था जो मैंने किसी किताब से नहीं सीखा बल्कि ये मैंने अपने अनुभव से सीखा।
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