मुंबई प्लेन क्रेश हादसे में मारे गए दो में से एक पायलट दिल्ली के द्वारका इलाके में परिवार के साथ रहते थे। दोपहर करीब1.30 बजे कैप्टन पीएस राजपूत के परिवार को प्लेन हादसे में उनकी मौत की सूचना मिली। इसके बाद परिवार फौरन मुंबई के लिए रवाना हो गया।
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इधर, मौत की खबर कुछ ही देर में पूरी सोसायटी में फैल गई। उनके घर के बाहर पड़ोसियों का तांता लग गया। पड़ोसियों ने दावा किया कि 2007 में राजपूत पहले भी हवाई जहाज हादसे का शिकार होकर घायल हो गए थे, लेकिन उस समय भाग्य ने उनका साथ दिया और उनकी जान बच गई। लंबे इलाज के बाद उन्होंने दोबारा जहाज उड़ाना शुरू कर दिया था।
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अब वह निजी वीआईपी जहाज या जांच के लिए टेस्ट फ्लाइट उड़ाते थे। जानकारी के अनुसार कैप्टन पीएस राजपूत पिछले करीब एक साल से द्वारका सेक्टर-11 की द गोल्ड क्रॉफ्ट सोसायटी में सी-242 रहते थे। पांच जून को इन्होंने निजी कारणों से सोसायटी के फ्लैट नंबर-212 में शिफ्ट किया था। इनके परिवार में पत्नी के अलावा एक 25 साल का बेटा है, जो मर्चेंट नेवी में देश को अपनी सेवाएं दे रहा है।
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इनके पड़ोसी अनिल ने बताया कि वह खुद भी एविएशन में नौकरी करते हैं। सोसायटी में आने के बाद पीएस राजपूत ने बताया था कि वह कई कंपनी में निजी पायलट की नौकरी कर चुके थे। कई कंपनी में उन्होंने टेस्ट पायलट की नौकरी भी की थी। 2007 में राजस्थान में हादसे का शिकार होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, वह उसके बाद भी टेस्ट फ्लाइट उड़ाते थे।
अनिल के मुताबिक, बृहस्पतिवार हुए हादसे के समय भी वह हवाई जहाज को चेक करने के लिए उड़े थे। अचानक उनकी मौत से परिवार का बुरा हाल हो गया। खबर मिलते ही परिवार दिल्ली से मुंबई के लिए रवाना हो गया।