आज दशहरा है। बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को जलाकर लोग जश्न मनाएंगे। बुराई पर अच्छाई की जीत से लोग उत्साहित होंगे। हालांकि यह हर साल होता है। यही वजह है कि इस बार लोग कई अन्य परेशानियों को भी रावण के पुतले के साथ भस्म होते देखना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए आपको और हम सबको कंधे से कंधे मिलाकर साथ देना होगा। तभी इन परेशानियों से निजात मिल पाएगी।
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- फोटो : अमर उजाला
1- जाम की समस्या है आम
शहर में जाम की समस्या आम हो गई है। इससे निजात पाने के लिए शहर के 23 प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस की ओर से जाम को लेकर सर्वे भी किया जा रहा है। लेकिन यह समस्या दूर नहीं हो पा रही है। सुबह और शाम के पीक आवर में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर भी काफी प्रयास किए गए। लेकिन शहर को जाम की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पाई है।
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- फोटो : अमर उजाला
2- अतिक्रमण का जाल हर ओर
शहर में अतिक्रमण का जाल लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। सेक्टर-18 सहित अन्य सेक्टरों के अलावा गांवों में भी अतिक्रमण का जाल घटने के बजाए बढ़ता जा रहा है। अतिक्रमण के भी कई रूप हो गए हैं। कहीं तो यह स्थायी है तो कहीं अस्थायी। हालांकि इससे निजात दिलाने के लिए अधिकारियों की ओर से किसी तरह की बड़ी कार्रवाई नहीं होती।
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- फोटो : विवेक निगम
3- टूटी सड़कें कब होंगी ठीक
बारिश के बाद शहर की सड़कों का हाल बेहाल हो चुका है। कई सड़कें टूटी पड़ी हैं। इस बार टूटी सड़कों के रिपेयरिंग में लापरवाही बरती जा रही है। अगर ऐसा नहीं होता तो सड़कों में गड्ढे नहीं दिखते। हालांकि यहां गांवों में भी सड़कों के निर्माण की जरूरत महसूस की जा रही है। आलम यह है कि सेक्टर-62 में टूटी पड़ी सड़कों पर जैसे तरह पैचअप कर काम चलाया जा रहा है।
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- फोटो : कुमार संजय
4- यातायात नियम तोड़ते वाहनों की भरमार
शहर में यातायात नियम तोड़ने में वाहन चालक सबसे आगे हैं। ट्रैफिक पुलिस की ओर से लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद इनकी संख्या में कोई कमी नजर नहीं आती। रोजाना 200-250 चालान होने के बावजूद नियम तोड़ने वाले सामने आ जाते हैं। सबसे ज्यादा रांग साइड और अवैध पार्किंग के मामले सामने आते हैं। यही नहीं हेलमेट नहीं पहनने और बिना सीट बेल्ट के गाड़ी चलाने में भी नोएडा के निवासी आगे हैं। यहां जरूरी यह है कि लोगों को खुद ही जागरूक होना होगा और नियमों को मानना होगा।
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- फोटो : विवेक निगम
5- गंदगी से कोई तो निजात दिलाए
शहर को साफ सुथरा रखने के लिए नोएडा प्राधिकरण की टीम समय-समय पर कार्रवाई करती है। बावजूद इसके कई सेक्टरों में गंदगी पसरी हुई देखी जा सकती है। सेक्टर-62, 12, लेबर चौक, भंगेल, हरौला सहित कई सेक्टरों में सफाई की जरूरत है ताकि नोएडा का नाम भी स्वच्छ शहरों में शुमार हो। हालांकि स्वच्छ शहर के लिए प्राधिकरण के साथ आम लोगों को भी साथ देना होगा।
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- फोटो : विवेक निगम
6- साइबर क्राइम का गढ़ बन रहा शहर
शहर में साइबर क्राइम की कई घटनाएं सामने आ रही हैं। दिल्ली से सटे होने और आईटी हब होने की वजह से नोएडा मेें सबसे ज्यादा साइबर क्राइम की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसा कोई भी दिन नहीं होता कि जब तीन से चार लोग साइबर क्राइम के शिकार न होते हों। प्रदेश में सबसे ज्यादा फर्जी कॉल सेंटर का गिरोह नोएडा में हैं। विगत एक वर्षों में तीन दर्जन से ज्यादा फर्जी कॉल सेंटर को सीज किए गए और सैकड़ों अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। बावजूद इसके ऐसे सेंटर और मामले सामने आते रहे हैं।
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- फोटो : विवेक निगम
7- दिनदहाड़े बाइकर्स दे रहे घटनाओं को अंजाम
बाइक सवार बदमाशों का आतंक शहर में आम है। ऐसे बदमाश दिनदहाड़े महिलाओं व अन्यों से चेन और मोबाइल लूट की घटनाओं को अंजाम देते आ रहे हैं। कई बार तो अगर पुलिस ने सड़क पर उन्हें पकड़ना या विरोध करना चाहा तो ऐसे बेखौफ बदमाश पुलिस पर फायरिंग करने से भी नहीं चूके। इन बाइक सवार बदमाशों ने शहर में कई हथियारों की लूट की घटनाओं को भी अंजाम दिया है जो कि आज तक अनसुलझे हैं। कई बार ऐसे बदमाशों की पहचान करने पर वे पढ़े लिखे पाए गए। ऐसे में इनको जागरूक करने की जरूरत है।
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- फोटो : कुमार संजय
8- डेंगू और चिकनगुनिया से हो रही लड़ाई
शहर और इससे सटे गांवों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां कम नहीं हो रहीं। इस वर्ष चिकनगुनिया और डेंगू के रिकॉर्ड तोड़ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग का पूरा अमला इससे लड़ने को जुटा हुआ है। यही नहीं यहां टाइफाइड के मामलों मेें तेजी देखी जा रही है। इससे निजात दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को जरूरी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है।
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- फोटो : कुमार संजय
9- लावारिस कुत्तों से सेक्टरों में खौफ
शहर में लावारिस पशुओं के विचरण पर रोकथाम और लगाम लगाने की जरूरत है। चाहे वह सांड़ हो या फिर गाय या कुत्ते। इनकी वजह से एक ओर शहर में यातायात बहाली में भी कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यही नहीं लावारिस कुत्तों की वजह से कई सेक्टरों में लोग खौफ में जी रहे हैं। इसके लिए पीएफए की भी मदद ली गई। यही नहीं इनको एंटी रैबिज के टीके भी लगने जरूरी है।
10- गाड़ियों का प्रदूषण कैसे हो खत्म
दिल्ली-एनसीआर में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए एनजीटी ने कई बार प्रयास किए। लेकिन प्रदूषण का खात्मा नहीं हो पा रहा है। नोएडा मेें 10 और 15 वर्ष पुरानी डीजल गाड़ियों के चलने पर रोक भी लगाई गई। लेकिन प्रदूषण खत्म नहीं हो रहा है। प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए लोगों को भी अपनी गाड़ियों की हमेशा प्रदूषण जांच केंद्रों पर जांच करानी चाहिए और जरूरी उपायों का पालन करना चाहिए।