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‘नब्बे फीसदी विद्यार्थियों की पहली पसंद है कंप्यूटर साइंस’

Sun, 02 Jul 2017 02:00 PM IST
amarujala.com- Presented by: संध्या द्विवेदी
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छात्र कोतवाली का घेराव करते हुए - फोटो : amarujala
तकनीकी शिक्षा का हब माने जाने वाले ग्रेटर नोएडा के कॉलेजों में पिछले कुछ वर्षों में बीटेक-एमटेक की कोर ब्रांच से हटकर सीएस,आईटी जैसी ब्रांच की ओर विद्यार्थियों का रुझान बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो बाजार के बदलते परिवेश और मांग के अनुसार विद्यार्थियों की रुचि में लगातार बदलाव आ रहा है। 
 विशेषज्ञों और कॉलेज प्रबंधकों के अनुसार तो बीटेक और एमटेक में 80 फीसदी से ज्यादा विद्यार्थियों की प्राथमिकता कंप्यूटर साइंस और आईटी ब्रांच में दाखिला लेने की होती है। इस बार एकेटीयू की काउंसलिंग के बाद इंजीनियरिंग कॉलेजों में जानकारी के लिए पहुंच रहे अधिकतर छात्रों का रुझान भी सीएस और आईटी की ओर है। वहीं बीटेक और एमटेक की कोर ब्रांचो में केवल मैकेनिकल ब्रांच का आकर्षण बचा है। मालूम हो कि इंजीनियरिंग में इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल और सिविल ब्रांच को कोर ब्रांच माना जाता है। 
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दिल्ली विश्वविद्यालय
प्लेसमेंट के आकर्षण में प्रबंधन क्षेत्र और फॉर्मास्यूटिकल सेक्टर में अभी भी विद्यार्थियों की रुचि बनी हुई है। हालांकि बीसीए-एमसीए कोर्स विद्यार्थियों की बांट जोहते रहते हैं। दुनियाभर के बदलते बाजार और सर्विस सेक्टर की मांग के अनुरूप प्रभाव ग्रेटर नोएडा के कॉलेजों में पड़ रहा है। ग्रेटर नोएडा में 48 तकनीकी कॉलेज हैं, जिनमें स्नातक और परास्नातक कोर्स चलाए जा रहे हैं।       
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दिल्ली विश्वविद्यालय
बीटेक में भरती हैं लगभग 60 फीसदी सीटें      

48 कॉलेजों में बीटेक-एमटेक में करीब 18 हजार सीटें हैं। पहली कतार वाले पांच से छह कॉलेजों के लगभग सभी ब्रांच की सीटें फुल हो जाती हैं। जबकि ज्यादातर कॉलेज में बीटेेक की करीब 60 फीसदी सीटों पर ही दाखिला हो पता है। लगभग 40 फीसदी सीटें खाली रह जाती हैं। वहीं शहर के कॉलेजों में एमबीए-एमसीए की लगभग 15 हजार तक सीटें हैं। अन्य सेक्टर में जहां तेजी से बदलाव होता जा रहा है, वहीं मैनेजमेंट सेक्टर की ग्रोथ से आकर्षण बरकरार है। बीबीए-एमबीए में पचास फीसदी से अधिक सीटें भर जाती हैं। 

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दिल्ली विश्वविद्यालय
फॅार्मा सेक्टर में प्लेसमेंट से बेहतर रुझान      

बीफॉर्मा-एमफॉर्मा में करीब दस कॉलेजों में करीब पांच हजार सीटें हैं। बड़ी संख्या में दवा कंपनियों द्वारा पिछले कुछ वर्षों में बूम आने पर इस सेक्टर में प्लेसमेंट जबरदस्त हो रहा है। फॉर्मास्यूटिकल सेक्टर में मिलते अच्छे प्लेसमेंट से प्रभावित होकर 80 से 90 फीसदी तक सीटें भर जाती हैं।       
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बीसीए-एमसीए को ढूंढे नहीं मिलते छात्र      

शहर के सभी कॉलेजों में बीबीए-एमबीए में करीब तीन हजार सीटें हैं। डिप्लोमा कोर्स की अपेक्षा छात्र बीटेक-एमटेक की डिग्री लेना अधिक पसंद करते हैं। ऐसे में इस सेक्टर की सबसे ज्यादा खराब हालत हैं। यहां करीब 25 से 30 फीसदी सीट ही भर पाती हैं। पिछले पांच वर्षों में आधा दर्जन कॉलेजों ने तो कोर्स भी बंद कर दिया है।       
मुक्ता के मैनेजर एचआर, वरमीर  की मानें तो अच्छे प्लेसमेंट के चलते विद्यार्थियों की पहली पसंद सीएस और आईटी ही हैं। भले ही अमेरिका में एच1वीजा की दिक्कत बढ़ी है पर प्रत्येक कार्य में कंप्यूटरीकृत के कारण इसकी मांग बरकरार रहेगी। वैसे दो से तीन वर्षों मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल सेक्टर में प्लेसमेंट बढ़ने की उम्मीद है।     
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delhi university
जॉब करने वाले वापस आकर कर रहे एमबीए      
इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के क्षेत्रों में काम कर रहे लोग भी नौकरी के बीच में एमबीए कर रहे हैं। एचआर मैनेजर,नवप्रीत का कहना है कि केवल बीटेक करने या मैनेजमेंट करने से बेहतर नौकरी नहीं मिल रही है। कंपनियों को भी ऐसे लोग चाहिए जो अपनी फील्ड के जानकार होने के साथ-साथ अच्छे मैनेजर भी हों। इसलिए समय के साथ विद्यार्थी बीटेक-एमटेक के बाद मैनेजमेंट कोर्स भी कर रहे हैं। अक्सर देखा गया है कि बीटेक के बाद अच्छी ग्रोथ न होने पर जॉब पकड़ते हैं, फिर वापस आकर एमबीए करते हैं।-
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